MLN में हाई कोर्ट अधिवक्ताओं के लिए मेडिको-लीगल वर्कशॉप:इंजरी एस्फिक्सिया, गनशॉट, हैंगिंग, स्ट्रैंगुलेशन और ग्रीवियस-डेंजरस पर फॉरेंसिक चर्चा

Oct 10, 2026 - 15:09
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MLN में हाई कोर्ट अधिवक्ताओं के लिए मेडिको-लीगल वर्कशॉप:इंजरी एस्फिक्सिया, गनशॉट, हैंगिंग, स्ट्रैंगुलेशन और ग्रीवियस-डेंजरस पर फॉरेंसिक चर्चा
प्रयागराज के मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (एमएलएन) के फॉरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी विभाग द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट के शासकीय अधिवक्ताओं के लिए मेडिको-लीगल विषयों पर रिफ्रेशर वर्कशॉप आयोजित किया गया। वर्कशॉप प्रोफेसर प्रीतम दास सभागृह में हुई। जिसमें अधिवक्ताओं को चोट, गला घोंटना, फांसी, गनशॉट इंजरी और सड़क दुर्घटना जैसे मामलों से जुड़े फॉरेंसिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी गई। आयोजन न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल के निर्देश पर तथा सरकारी अधिवक्ताओं के प्रभारी पतंजलि मिश्रा के सहयोग से किया गया। वर्कशॉप के आयोजन सचिव एवं एमएलएन मेडिकल कॉलेज के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजेश कुमार राय ने बताया कि अधिवक्ताओं से गूगल फॉर्म के माध्यम से उनकी रुचि के विषय मांगे गए थे। इसमें सर्वाधिक रुचि इंजरी, एस्फिक्सिया और गनशॉट विषयों पर आई। इन विषयों पर हुई चर्चा वर्कशॉप में हैंगिंग, स्ट्रैंगुलेशन, गनशॉट इंजरी, विभिन्न प्रकार की चोटें, ग्रीवियस हर्ट तथा डेंजरस इंजरी जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। डॉ. राजेश राय ने कहा कि ये विषय न्याय की प्रक्रिया में बार-बार उत्पन्न होने वाले प्रश्नों से जुड़े होते हैं, इसलिए अधिवक्ताओं को इनकी वैज्ञानिक समझ देना आवश्यक था। उन्होंने बताया कि फॉरेंसिक मेडिसिन में नए सिद्धांत और तकनीकें लगातार विकसित हो रही हैं, जिनसे न्याय के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर देने में मदद मिलती है। वर्कशॉप में अधिवक्ताओं को समझाया गया कि वे ऐसे तकनीकी पहलुओं पर भी विशेषज्ञों से प्रश्न पूछ सकते हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कमियों पर भी चर्चा विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. अर्चना कौल ने बताया कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद यह वर्कशॉप आयोजित किया गया, क्योंकि अधिवक्ताओं को चोट, गला घोंटने और फांसी जैसे रोजमर्रा के मामलों पर अक्सर क्वेरी और भ्रम होता है। साथ ही, कुछ डॉक्टरों द्वारा किए गए पोस्टमार्टम में आने वाली कमियों के मामले भी हाई कोर्ट के आदेश पर विभाग में आते हैं। वर्कशॉप में ओपन हाउस चर्चा का फॉर्मेट रखा गया, ताकि आए अधिवक्ता अपनी क्वेरी रख सकें और विशेषज्ञ उनका समाधान कर सकें। उन्होंने कहा कि चिकित्सा और कानून दोनों क्षेत्रों की जानकारी को जोड़कर मेडिको-लीगल समझ को मजबूत किया जा रहा है। भविष्य में भी ऐसे वर्कशॉप समूहों के माध्यम से नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे।

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