मथुरा में रावण बोला में राम का भक्त:मांट में बुलडोजर से युद्ध के मैदान में पहुंचा, शहर में 75 फीट ऊंचा तो कोसी में 65 फीट के पुतले का हुआ दहन
विजय दशमी पर्व पर कान्हा की नगरी प्रभु श्री राम के जयकारों से गुंजायमान हो उठी। मथुरा में 20 से ज्यादा जगह पर रावण के पुतले का दहन किया गया। मथुरा शहर में प्रमुख आयोजन रामलीला मैदान में हुआ तो देहात क्षेत्र के अलग अलग इलाकों में भी रावण के पुतले को दहन किया गया। मथुरा में रावण ने कहा कि वह निजी जीवन में प्रभु श्री राम के भक्त हैं,वहीं इस स्वरूप में प्रभु श्री राम उनके शत्रु हैं। रावण की अट्टहास से गूंजा मैदान मथुरा के रामलीला मैदान में दशहरा पर राम रावण युद्ध लीला का मंचन किया गया। लीला करने पहुंचे रावण से जब दैनिक भास्कर ने बात की तो उन्होंने बताया कि वह निजी जीवन में राम भक्त हैं लेकिन यहां में राम का परम शत्रु हूं। उन्होंने कहा इसको करने का केवल एक ध्येय हैं जो हमारी संस्कृति नष्ट हो रही है,कुछ लोग इसे मिटाना चाहते हैं उसे बचाया जा सके। नई पीढ़ी इस परंपरा को देखकर सीखे। क्योंकि राम का जीवन चरित्र सत्य,कर्तव्य और त्याग पर है,यही मानव जीवन का आधार है। मां बनें सीता,पुरुष बनें राम रावण ने कहा रामलीला देखकर माता सीता बनें,पुरुष राम बनें तो निश्चित ही राम राज की स्थापना होगी। इसके बाद वह तेज तेज अट्टहास करने लगे और मंच पर पहुंच गए। जहां उनके दूतों ने बताया कि युद्ध में मेघनाथ वीरगति को प्राप्त हो गए हैं। इसके बाद रावण अपने पुत्र अहिरावण को युद्ध के लिए भेजता है। लेकिन हनुमान जी उसका बध कर भगवान राम और लक्ष्मण को पाताल लोक से मुक्त करा लाते हैं। जिसके बाद पूरा मैदान संकट मोचन हनुमान के जयकारों से गूंज उठा। भगवान राम ने रावण को मारे 31 बाण लीला मंचन के दौरान राम और रावण की सेना में भीषण युद्ध हुआ। इस दौरान विभीषण ने प्रभु श्री राम को बताया कि रावण का वध उसकी नाभि में वाण मारने से होगा। इसके बाद भगवान राम ने 10 वाण उसके दस सिर पर चलाए,20 बाण उसकी भुजाओं पर और एक नाभि पर चलाया। नाभि पर बाण लगते ही रावण जय श्री राम बोलते हुए जमीन पर गिर पड़ा। रावण के गिरते ही उसका 75 फीट ऊंचा पुतला जल उठा और पूरा मैदान भगवान श्री राम के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। बुलडोजर पर बैठा रावण दशहरा पर्व पर मथुरा में सबसे अलग नजारा देखने को मिला मांट में। यहां रावण और उसके दल के दानव बुलडोजर ने बैठकर युद्ध के मैदान में पहुंचे। इस नजारे को देखकर हर कोई आनंदित हो उठा। बुलडोजर से युद्ध के मैदान में पहुंचने के बाद सभी को उतारा गया। जिसके बाद राम और रावण की सेना में युद्ध हुआ। यहां अंत में रावण के पुतले का दहन किया गया।
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