मुंबई के डिजिटल अरेस्ट गैंग ने ठगे 1.78 करोड़:बेली अस्पताल की Ex CMS को एक महीने बनाए रखा था बंधक, एक गिरफ्तार

Oct 05, 2026 - 17:58
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मुंबई के डिजिटल अरेस्ट गैंग ने ठगे 1.78 करोड़:बेली अस्पताल की Ex CMS को एक महीने बनाए रखा था बंधक, एक गिरफ्तार
प्रयागराज में बेली अस्पताल की पूर्व सीएमएस को डिजिटल अरेस्ट कर 1.78 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की वारदात मुंबई से अंजाम दी गई। इसके पीछे एक इंटरस्टेट गैंग है, जिसके एक मेंबर को गिरफ्तार करते हुए सोमवार को पुलिस ने इस मामले का खुलासा कर दिया। बताया कि मामले में लखीमपुर खीरी के आयुष अवस्थी को गिरफ्तार किया गया है। उसके दो साथी निशांत त्रिवेदी और पीलीभीत निवासी राजन शुक्ला की तलाश की जा रही है। डीसीपी साइबर क्राइम सोनम कुमार और एडीसीपी गंगानगर पुष्कर वर्मा ने इस पूरे मामले का खुलासा किया पुलिस के मुताबिक, गैंग के सदस्य डिजिटल अरेस्ट और साइबर स्कैम से ठगी गई रकम को अलग-अलग बैंक खातों में डायवर्ट कराते थे। अब तक की जांच में 23.80 करोड़ रुपये की रकम अलग-अलग खातों में लेयरिंग के लिए डायवर्ट किए जाने की जानकारी सामने आई है। 10% कमीशन के लालच में खाते में मंगाता था रकम पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आयुष अवस्थी की Skillora Workforce Solutions Private Limited नाम से मैनपावर सप्लाई फर्म है। फर्म के नाम से HDFC बैंक में करंट अकाउंट संचालित है। जांच में इसी खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम मंगाने में सामने आया। पूछताछ में आयुष ने पुलिस को बताया कि नवंबर 2025 में गांव के निशांत त्रिवेदी के जरिए उसकी मुलाकात पीलीभीत के राजन शुक्ला से हुई थी। राजन ने साइबर फ्रॉड की रकम उसके खाते में डायवर्ट कराने के बदले 10 प्रतिशत कमीशन देने का लालच दिया। इसके बाद वह उनके साथ मुंबई गया। फ्लाइट से मुंबई पहुंचे थे पुलिस के अनुसार 6 सितंबर को आयुष, निशांत और राजन फ्लाइट से मुंबई पहुंचे। वहां अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर 7 और 8 सितंबर को एसआरएन की पूर्व सीएमएस के खाते से ठगी गई रकम में से 48.50 लाख रुपये आयुष से जुड़े खाते में ट्रांसफर कराए गए। इसी तरह कई अलग-अलग तिथियों में कुल 1.78 करोड़ रुपये ट्रांसफर कराए गए। बैंक स्टेटमेंट की जांच में पुलिस को इस खाते से जुड़े दूसरे लेन-देन भी मिले। जांच में पता चला कि इसी तरीके से उत्तराखंड, तमिलनाडु, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों के लोगों को साइबर स्कैम और डिजिटल अरेस्ट का शिकार बनाकर रकम अलग-अलग बैंक खातों में भेजी गई। खातों की जांच से खुला 23.80 करोड़ का फंड फ्लो पुलिस ने साइबर ठगी में इस्तेमाल बैंक खातों की KYC, फंड फ्लो और आरोपियों के मोबाइल नंबरों की CDR व CAF का विश्लेषण किया। इसी जांच में 23 करोड़ 80 लाख रुपये की रकम अन्य बैंक खातों में लेयरिंग के लिए डायवर्ट किए जाने की जानकारी सामने आई। अब पुलिस इस रकम के पूरे फंड फ्लो की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि रकम किन-किन खातों में पहुंची और इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं। 64.61 लाख की रकम फ्रीज पुलिस ने कार्रवाई के दौरान साइबर फ्रॉड से संबंधित 64 लाख 61 हजार 990 रुपये की रकम फ्रीज/बरामद कराई है। इसमें 24 लाख 53 हजार 990 रुपये का बैंक लियन अमाउंट और करंट अकाउंट में मिले 8 हजार रुपये शामिल हैं। इसके अलावा आरोपी से 40 लाख रुपये की दो इंश्योरेंस पॉलिसियां मिली हैं। इनमें 20 लाख रुपये की HDFC Life और 20 लाख रुपये की Aditya Birla Sun Life की पॉलिसी शामिल है। पुलिस ने दो मोबाइल फोन और एक चेकबुक भी बरामद की है। दो आरोपियों की तलाश, तीन टीमें लगाई पुलिस ने निशांत त्रिवेदी निवासी सिकंदराबाद, लखीमपुर खीरी और राजन शुक्ला निवासी दुधिया खुर्द बंजरिया, पूरनपुर, पीलीभीत को वांछित किया है। दोनों की गिरफ्तारी के लिए तीन पुलिस टीमें गठित की गई हैं। NCRP और SAMANVAYA पोर्टल के जरिए दूसरे राज्यों की पुलिस से भी संपर्क किया जा रहा है। पुलिस की अंतरराज्यीय कोऑर्डिनेशन टीम गैंग के अन्य सदस्यों की पहचान और दूसरे राज्यों में हुई साइबर ठगी की घटनाओं से इस नेटवर्क का कनेक्शन तलाश रही है। आरोपी पर पहले भी दो मुकदमे पुलिस के मुताबिक आयुष अवस्थी के खिलाफ लखीमपुर खीरी के गोला थाने में 2019 में दहेज हत्या और 2020 में आर्म्स एक्ट का मुकदमा लखीमपुर खीरी में दर्ज हुआ था। अब प्रयागराज साइबर क्राइम थाने में डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी का मुकदमा दर्ज किया गया है।

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