नाबालिग के अपहरण में 5 साल की सजा:अलीगढ़ कोर्ट का फैसला्र बलात्कार और पॉक्सो एक्ट के आरोप साबित नहीं हुए, पीड़िता को मिलेंगे 10 हजार रुपये
नाबालिग को उसकी मां की संरक्षा से ले जाने के मामले में पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी अरबाज को दोषी करार देकर पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। वहीं, बलात्कार और पॉक्सो एक्ट समेत अन्य आरोप संदेह से परे साबित नहीं होने पर आरोपी को इन आरोपों से दोषमुक्त कर दिया गया। जुर्माने की राशि में से 10 हजार रुपये पीड़िता को देने के आदेश दिए गए हैं। मामले में फैसले की जानकारी एडीजीसी महेश सिंह ने दी।
मामला क्वार्सी थाना क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार, 26-27 मार्च 2023 की रात करीब तीन बजे एक नाबालिग अपने घर में सो रही थी। आरोप था कि पड़ोस में रहने वाला युवक अरबाज उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। शिकायत में घर से एक लाख रुपये नकद और सोने-चांदी के आभूषण ले जाने का आरोप भी लगाया गया था। परिजनों ने युवक के परिवार से पूछताछ की तो विवाद हुआ। शिकायत में युवक के पिता पर नाबालिग का जबरन निकाह कराने की धमकी देने का आरोप भी लगाया गया था।
पीड़िता ने अपनी मर्जी से जाने की बात कही
मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) अभिषेक कुमार बागड़िया की अदालत में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाह पेश किए गए। सुनवाई के दौरान पीड़िता ने पुलिस, मजिस्ट्रेट और अदालत में दिए गए बयानों में युवक के साथ अपनी मर्जी से जाने की बात कही। फॉरेंसिक जांच में नमूने में मानव वीर्य और शुक्राणु मिलने की पुष्टि हुई, लेकिन इससे आरोपी अरबाज के खिलाफ बलात्कार का आरोप निर्णायक रूप से साबित नहीं हो सका।
नाबालिग की उम्र के आधार पर अपहरण में दोषी
अदालत ने शैक्षणिक प्रमाणपत्र के आधार पर घटना के समय पीड़िता की उम्र 16 वर्ष से कम मानी। न्यायालय ने पाया कि नाबालिग को उसकी मां की संरक्षा से ले जाने का आरोप साबित होता है। इसी आधार पर आरोपी अरबाज को भारतीय दंड संहिता की धारा 363 के तहत दोषी ठहराया गया। वहीं, अन्य धाराओं में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर संदेह का लाभ दिया गया। अदालत ने अरबाज को पांच साल के कठोर कारावास के साथ 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा नहीं करने पर उसे छह महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। जेल में पहले बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा। जुर्माने में से 10 हजार रुपये पीड़िता को देने का आदेश दिया गया है।
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