नाबालिग को बहला-फुसलाकर भगाने वाले को 10 साल की सजा:पॉक्सो कोर्ट ने 6 साल बाद सुनाया फैसला, 1 लाख का जुर्माना भी लगा
मैनपुरी के बेवर थाना क्षेत्र में नाबालिग को बहला-फुसलाकर भगाने के पांच साल पुराने मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय ने दोषी को 10 साल के कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषी पर एक लाख रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। पुलिस और अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी के बाद 17 अक्टूबर की शाम करीब 5 बजे यह फैसला आया, जिसका ऑर्डर रात करीब 7 बजे जारी किया गया। मामला बेवर थाने में दर्ज मुकदमा पॉक्सो एक्ट से संबंधित है। इसमें किशनी थाना क्षेत्र के उदवाह गांव निवासी अजीत पुत्र गिरंद पाल को आरोपी बनाया गया था। आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366, 376 और पॉक्सो एक्ट की धारा 3/4 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप था कि उसने वादी की नाबालिग पुत्री को बहला-फुसलाकर भगा लिया था। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और विवेचना के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया। इसके बाद विशेष पॉक्सो न्यायालय मैनपुरी ने उसे 10 वर्ष के कारावास और एक लाख रुपए के जुर्माने से दंडित किया। इस मामले में सजा दिलाने में पुलिस और अभियोजन पक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण रही। पुलिस के अनुसार, सजा के लिए विवेचक द्वारा संकलित साक्ष्यों और न्यायालय में प्रस्तुत तथ्यों ने अहम भूमिका निभाई। अभियोजन पक्ष की ओर से मामले की प्रभावी पैरवी की गई। एसपी गणेश प्रसाद साहा के निर्देशन में चल रही प्रभावी पैरवी की प्रक्रिया के तहत अभियोजन कार्यालय, विवेचक और कोर्ट पैरवीकार ने समन्वय के साथ काम किया। मामले में एपीओ शैलेंद्र राजपूत, कोर्ट मोहर्रिर ललिता, विवेचक रामशंकर गौतम और कोर्ट पैरवीकार सुनील की भूमिका रही।
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