नाबालिक से दुष्कर्म में अभियुक्त को 20 साल की सजा:सहारनपुर में बच्ची को टॉफी दिलाने के बहाने ले गया था, बेहोशी में बार–बार किया रेप

Oct 08, 2026 - 14:22
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नाबालिक से दुष्कर्म में अभियुक्त को 20 साल की सजा:सहारनपुर में बच्ची को टॉफी दिलाने के बहाने ले गया था, बेहोशी में बार–बार किया रेप
सहारनपुर में विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट)/अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या-13 सुबोध भारती की कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी बंशी को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट में 20 साल के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। वहीं, नाबालिग को बहला-फुसलाकर ले जाने के मामले में तीन साल के कारावास और तीन हजार रुपए अर्थदंड की सजा दी है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अर्थदंड की पूरी राशि पीड़िता को प्रतिकर के रूप में दिए जाने का आदेश दिया गया है। एडीजीसी संजय मलिक के अनुसार, मामला थाना कोतवाली देहात क्षेत्र के रहने वाले एक व्यक्ति ने 25 नवंबर 2021 को पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि उसकी करीब 13 साल की बेटी को बंशी बहला-फुसलाकर ले गया है। पुलिस ने धारा-363 में मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की। बाद में पीड़िता के बयान के आधार पर दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की धाराएं बढ़ाई गईं। दुकान से सामान लेने निकली थी नाबालिक अभियोजन के अनुसार, 25 नवंबर 2021 की दोपहर पीड़िता घर से सामान लेने दुकान जा रही थी। रास्ते में उसे पड़ोस का रहने वाला बंशी मिला। आरोप है कि बंशी उसे जबरदस्ती अपने साथ ऑटो में बैठाकर बड़ी नहर के पास एक खंडहर में ले गया। पीड़िता ने कोर्ट में बताया कि वहां उसे नशीला पदार्थ दिया गया, जिससे वो बेहोश हो गई। इसके बाद आरोपी ने उसकी इच्छा के खिलाफ कई बार शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता के अनुसार, बाद में आरोपी फोन पर बात करने के लिए बाहर आया तो वह मौका पाकर वहां से निकल गई और घर पहुंचकर परिजनों को घटना की जानकारी दी। कोर्ट में पीड़िता ने बताया- मजिस्ट्रेट के सामने घबरा गई थी मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने पीड़िता के मजिस्ट्रेट के सामने धारा-164 के तहत दर्ज बयान को आधार बनाया। उस बयान में पीड़िता ने कहा था कि आरोपी ने उसके साथ कुछ नहीं किया। कोर्ट में पीड़िता ने इस विरोधाभास पर सफाई देते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट के सामने बयान देते समय वह घबरा गई थी और उसके मुंह से यह बात निकल गई थी। कोर्ट ने माना कि धारा-164 के तहत दर्ज बयान अपने आप में मूल साक्ष्य नहीं होता। इसका इस्तेमाल गवाही की पुष्टि या विरोधाभास के लिए किया जा सकता है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पीड़िता की शपथ पर दी गई गवाही को महत्वपूर्ण माना और पाया कि उसने आरोपी द्वारा बहला-फुसलाकर ले जाने और उसके साथ गलत काम करने की बात कही है। प्रत्यक्षदर्शी ने बंशी को बच्ची के साथ जाते देखा अभियोजन के गवाह ने कोर्ट में बताया कि उसने बंशी को पीड़िता के साथ टैम्पो में जाते देखा था। दोनों उसकी कॉलोनी के रहने वाले थे। इस गवाही को भी कोर्ट ने अभियोजन के मामले के समर्थन में माना। पीड़िता के पिता ने कोर्ट में बताया कि घटना के समय वह घर पर नहीं थे। बच्चों से जानकारी मिलने के बाद उन्होंने बेटी को तलाश किया और अगले दिन पुलिस को सूचना दी। कोर्ट ने माना कि परिस्थितियों को देखते हुए एफआईआर में देरी अभियोजन के मामले को कमजोर नहीं करती है। स्कूल रिकॉर्ड से साबित हुई 13 साल 10 माह की उम्र पीड़िता की उम्र को लेकर भी कोर्ट ने स्कूल रिकॉर्ड को आधार माना। प्रधानाध्यापक ने प्रवेश फार्म और स्कूल के एसआर रजिस्टर पेश किए। इनमें पीड़िता की जन्मतिथि 1 जनवरी 2008 दर्ज थी। घटना 25 नवंबर 2021 को हुई थी। इसके आधार पर कोर्ट ने माना कि घटना के समय पीड़िता की उम्र 13 वर्ष 10 माह 24 दिन थी। 20 साल सश्रम कारावास, दोनों सजाएं साथ चलेंगी सजा के बिंदु पर बचाव पक्ष ने आरोपी की उम्र 24 साल बताते हुए कहा कि यह उसका पहला अपराध है और वह गरीब परिवार से है। कम से कम सजा देने की मांग की गई। वहीं, विशेष लोक अभियोजक ने अधिकतम सजा की मांग की। कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट की धारा-6 में 20 साल के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपए जुर्माने तथा धारा-363 में तीन साल के कारावास और तीन हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। कोर्ट ने आदेश दिया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी और मुकदमे के दौरान जेल में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित की जाएगी। कोर्ट ने दोषसिद्ध अभियुक्त को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जिला कारागार भेजने और अर्थदंड की पूरी राशि पीड़िता को प्रतिकर के रूप में दिए जाने का आदेश दिया है।

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