नालसर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, बीसीआई का आदेश रद्द
नालसर विश्वविद्यालय विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से छात्रों के खिलाफ जारी दोनों अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि विधि छात्रों के आचरण पर कार्रवाई करने का अधिकार संबंधित संस्थान के पास है और अधिवक्ता बनने से पहले बार काउंसिल छात्रों के व्यवहार को नियंत्रित नहीं कर सकती।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 03 सितंबर 2026
नालसर विश्वविद्यालय में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के दीक्षांत समारोह में शामिल होने को लेकर हुए विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से नालसर विश्वविद्यालय के छात्रों के खिलाफ जारी किए गए दोनों आदेशों को रद्द कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि छात्रों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई करने की जिम्मेदारी संबंधित शैक्षणिक संस्थान की है।
छात्रों के खिलाफ बार काउंसिल की कार्रवाई रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से जारी दोनों अधिसूचनाओं को निरस्त कर दिया है। अदालत के अनुसार, जब तक कोई विधि छात्र अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत नहीं हो जाता, तब तक उसके आचरण को नियंत्रित करने का अधिकार बार काउंसिल के पास नहीं है। इस फैसले से नालसर विश्वविद्यालय के उन छात्रों को राहत मिली है, जिनके खिलाफ बार काउंसिल ने कार्रवाई की थी। अदालत ने अधिकार क्षेत्र से जुड़े सवाल को भी स्पष्ट किया है।
छात्रों के आचरण पर संस्थान करेगा कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी शैक्षणिक संस्थान में पढ़ने वाले छात्रों के व्यवहार और अनुशासन से जुड़े मामलों पर कार्रवाई करने का अधिकार संबंधित संस्थान के पास होता है। यदि कोई छात्र नियमों का उल्लंघन करता है तो विश्वविद्यालय अपने निर्धारित नियमों के तहत उसके खिलाफ कदम उठा सकता है। अदालत ने माना कि बार काउंसिल को छात्रों के आचरण पर सीधे कार्रवाई करने का कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं है। यह अधिकार अधिवक्ता बनने के बाद पेशेवर आचरण से जुड़े मामलों में लागू होता है।
दीक्षांत समारोह को लेकर शुरू हुआ था विवाद
यह पूरा मामला नालसर विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाले दीक्षांत समारोह से जुड़ा है। समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के शामिल होने को लेकर विवाद सामने आया था। इसी घटनाक्रम के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों के खिलाफ कदम उठाए थे। मामले ने बाद में न्यायपालिका, विधि शिक्षा और छात्रों के अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए।
सुप्रीम कोर्ट ने अधिकार क्षेत्र पर दिया जोर
सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में बार काउंसिल के अधिकार क्षेत्र को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने स्पष्ट किया कि बार काउंसिल का मुख्य दायित्व अधिवक्ताओं और विधि व्यवसाय से जुड़े मामलों को नियंत्रित करना है। केवल विधि की पढ़ाई कर रहे छात्रों पर अधिवक्ताओं के पेशेवर आचरण से जुड़े नियम उसी तरह लागू नहीं किए जा सकते। अदालत ने इसी आधार पर छात्रों के खिलाफ जारी दोनों अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया।
नालसर के छात्रों को मिली बड़ी राहत
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नालसर विश्वविद्यालय के छात्रों को बड़ी राहत मिली है। छात्रों के खिलाफ बार काउंसिल की ओर से जारी किए गए दोनों आदेश अब प्रभावी नहीं रहेंगे। अदालत के इस निर्णय से यह भी स्पष्ट हुआ कि विश्वविद्यालय में छात्रों के अनुशासन से जुड़े मामलों को पहले संस्थागत नियमों के तहत देखा जाना चाहिए। इस फैसले को विधि छात्रों के अधिकारों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विधि शिक्षा और पेशेवर संस्था के अधिकार अलग
इस मामले ने विधि शिक्षा और अधिवक्ताओं को नियंत्रित करने वाली संस्था के अधिकारों के बीच अंतर को सामने रखा है। विधि छात्र विश्वविद्यालय के नियमों और अनुशासन व्यवस्था के अधीन रहते हैं। वहीं अधिवक्ता बनने के बाद पेशेवर आचरण और संबंधित नियमों के पालन की जिम्मेदारी बार काउंसिल के अधिकार क्षेत्र में आती है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी इसी अंतर को स्पष्ट करती है।
फैसले का क्या है महत्व
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से यह संदेश गया है कि किसी शैक्षणिक संस्थान में पढ़ रहे विधि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई उनके संस्थान के नियमों के अनुसार होनी चाहिए। बार काउंसिल को छात्रों के व्यवहार पर सीधे नियंत्रण का अधिकार नहीं है, जब तक वे अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत न हों। नालसर मामले में अदालत ने इसी कानूनी स्थिति को आधार बनाकर बार काउंसिल के दोनों आदेशों को रद्द किया है।
मुख्य बातें
- नालसर विश्वविद्यालय विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया।
- बार काउंसिल ऑफ इंडिया की दोनों अधिसूचनाएं रद्द कर दी गईं।
- अदालत ने कहा कि छात्रों के आचरण पर कार्रवाई का अधिकार संस्थान का है।
- अधिवक्ता बनने से पहले छात्रों पर बार काउंसिल का सीधा अधिकार नहीं है।
- मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के दीक्षांत समारोह से जुड़े विवाद के बाद सामने आया था।
- फैसले से नालसर विश्वविद्यालय के छात्रों को बड़ी राहत मिली है।
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