नाना पाटेकर के निधन पर रवि त्रिपाठी हुए भावुक:प्रतापगढ़ गायक बोले- गुरु के घर अक्सर आते थे, खुद खाना बनाकर खिलाते और कविताएं सुनाते थे
प्रतापगढ़ के लालगंज अझारा निवासी पार्श्व गायक रवि त्रिपाठी अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर से भावुक हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि दी और उनके साथ बिताए पुराने पलों को याद किया। नाना पाटेकर का गुरुवार को 75 साल की उम्र में गोवा स्थित आवास पर निधन हो गया। रवि त्रिपाठी ने बताया कि जब वह अपने गुरु सुरेश वाडकर के यहां रहते थे, तभी से नाना पाटेकर का उन्हें स्नेह मिलता रहा। नाना अक्सर सुरेश वाडकर के घर आते थे। रवि के मुताबिक उनका स्वभाव बेहद सरल और अपनापन भरा था। कई बार वह खुद खाना बनाते और वहां मौजूद सभी लोगों को अपने हाथों से खिलाते थे। गुरु के घर से जुड़ी थीं यादें रवि त्रिपाठी ने बताया कि सुरेश वाडकर के घर रहने के दौरान उनकी नाना पाटेकर से कई मुलाकातें हुईं। नाना का व्यवहार किसी बड़े स्टार जैसा नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य जैसा था। वह सहजता से सभी से मिलते-जुलते और अपनेपन से बातचीत करते थे। रवि के मुताबिक नाना पाटेकर कई बार खुद खाना बनाते थे। भोजन के बाद वह अपनी लिखी कविताएं भी सुनाते थे। उनकी सादगी और साहित्य के प्रति लगाव रवि को हमेशा याद रहेगा। कई मौकों पर रवि उन्हें कार से उनके घर छोड़ने भी गए।
परिवार को भी मिला नाना का स्नेह रवि त्रिपाठी ने बताया कि उनकी पत्नी शांभवी त्रिपाठी, बेटे शिवोहम और बेटी शार्वी को भी नाना पाटेकर का स्नेह मिला। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में नाना की लिखी पंक्तियां भी साझा कीं—“इस कमरे में कुल छह लोग, चार दीवारें, इक छत और मैं। बोले- भारतीय सिनेमा ने महान कलाकार खोया रवि ने कहा कि नाना पाटेकर के निधन की खबर से वह कुछ कह नहीं पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नाना का जाना उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भी बड़ा दुख है। उनके निधन से भारतीय सिनेमा ने एक महान कलाकार खो दिया है। नाना पाटेकर ने हिंदी और मराठी सिनेमा में करीब पांच दशक तक काम किया और कई यादगार भूमिकाएं निभाईं।
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