नदीगांव ब्लॉक प्रमुख अर्जुन सिंह को प्रशासक पद से हटाया:जालौन में एसडीएम संभालेंगे जिम्मेदारी, हाईकोर्ट में 12 अक्टूबर को अगली सुनवाई
जालौन के नदीगांव क्षेत्र पंचायत के निवर्तमान ब्लॉक प्रमुख एवं प्रशासक अर्जुन सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनके खिलाफ चल रही जांच के बीच शासन ने उन्हें प्रशासक पद से हटाने का आदेश दिया है। क्षेत्र पंचायत के सामान्य कार्यों के संचालन के लिए संबंधित एसडीएम को प्रशासक नामित किया जाएगा। वहीं, अर्जुन सिंह के खिलाफ लगे आरोपों की अंतिम जांच के लिए जिलाधिकारी जालौन को जांच अधिकारी बनाया गया है। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम, 1961 के तहत की गई है। हाईकोर्ट में 12 अक्टूबर को अगली सुनवाई यह मामला अर्जुन सिंह के खिलाफ मिली शिकायतों और कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। जितेंद्र सिंह की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका संख्या 3259/2025 पर सुनवाई के दौरान अदालत ने कार्रवाई में देरी पर नाराजगी जताई थी। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को होनी है। नौ अक्टूबर को पंचायती राज विभाग के विशेष सचिव जय प्रकाश पांडेय ने मुख्य स्थायी अधिवक्ता को पत्र भेजकर शासन की ओर से प्रभावी पैरवी करने और अदालत को अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी देने के निर्देश दिए। कार्रवाई में देरी पर अदालत ने जताई थी नाराजगी एक सितंबर 2026 को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को मामले में निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। अदालत ने कहा था कि अगली तारीख तक जरूरी आदेश पारित नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने पर विचार किया जा सकता है। प्रमुख सचिव और विशेष सचिव, पंचायती राज विभाग को आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए थे। 28 सितंबर को हुई सुनवाई में अदालत ने फिर नाराजगी जताई। शासन की ओर से 25 सितंबर को जारी निर्देशों का उल्लेख करते हुए अदालत ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों से ऐसा प्रतीत होता है कि क्षेत्र पंचायत प्रमुख के खिलाफ रिपोर्ट आने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही है और मामले को लंबित रखा जा रहा है। अदालत ने प्रमुख सचिव, पंचायती राज विभाग को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया था। अगस्त 2025 में हुई थी प्रारंभिक जांच शासन के अनुसार, अर्जुन सिंह के खिलाफ शिकायतों पर 22 जुलाई 2025 को जिलाधिकारी को प्रारंभिक जांच कराने के निर्देश दिए गए थे। तत्कालीन अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) ने जांच के बाद सात अगस्त 2025 को रिपोर्ट शासन को भेजी थी। रिपोर्ट के परीक्षण में कुछ आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के आधार पर चार नवंबर 2025 को अर्जुन सिंह से अधिनियम की धारा 16 के तहत स्पष्टीकरण मांगा गया था। स्पष्टीकरण दाखिल करने में देरी के मामले में अर्जुन सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। एक दिसंबर 2025 को अदालत ने देरी माफ करते हुए शासन को अंतिम निर्णय लेते समय उनके स्पष्टीकरण पर भी विचार करने का निर्देश दिया। इसके बाद अर्जुन सिंह ने तीन दिसंबर 2025 को अपना जवाब शासन को उपलब्ध कराया। तालाब के सौंदर्यीकरण का मामला भी जांच के दायरे में जांच में तालाब की खुदाई और सौंदर्यीकरण से जुड़े कार्यों पर भी सवाल उठे। अभिलेखों के अनुसार, गाटा संख्या 113 में स्थित तालाब अर्जुन सिंह की निजी भूमि पर होने के बावजूद सार्वजनिक प्रयोजन के लिए इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया। शासन स्तर पर यह स्पष्ट करने को कहा गया कि संबंधित योजना के तहत निजी भूमि पर स्थित तालाब का सौंदर्यीकरण या जीर्णोद्धार कराया जा सकता है या नहीं। तालाब के स्वामित्वधारक, क्षेत्र पंचायत प्रमुख और सौंदर्यीकरण कराने वाली फर्म के बीच कानूनी संबंधों की स्थिति स्पष्ट करने को भी कहा गया। साथ ही, परियोजना की स्वीकृति में कई चरणों और अधिकारियों की भूमिका को देखते हुए यह सवाल उठाया गया कि उससे जुड़ी सभी त्रुटियों के लिए केवल क्षेत्र पंचायत प्रमुख को जिम्मेदार ठहराना उचित होगा या नहीं। संशोधित जांच रिपोर्ट के बाद शासन ने लिया फैसला अर्जुन सिंह को 27 मई 2026 को प्रमुख सचिव, पंचायती राज विभाग के समक्ष व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया गया था। इसके बाद अधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारी तय करने के लिए जिलाधिकारी से अभिलेख मांगे गए। जुलाई 2026 में तत्कालीन खंड विकास अधिकारी गौरव कुमार, तत्कालीन लेखाकार राज कुमार कोरी और तत्कालीन अवर अभियंता सुरेश कुमार पवन के खिलाफ आरोपपत्रों से संबंधित अभिलेख भी संबंधित विभागों को भेजे गए थे। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के कुछ बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण शासन ने दोबारा तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी। 24 अगस्त और सात सितंबर 2026 को इस संबंध में पत्र भेजे गए। इसके बाद 24 सितंबर को अर्जुन सिंह को फिर व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया गया। शासन के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने छह अक्टूबर को संशोधित रिपोर्ट सौंपी। आठ अक्टूबर को पत्रावली निर्णय के लिए मंत्री के समक्ष रखी गई। अंतिम जांच तक पद से दूर रहेंगे अर्जुन सिंह शासन के नौ अक्टूबर 2026 के आदेश के अनुसार, संशोधित रिपोर्ट के परीक्षण के बाद मामले को अंतिम जांच के लिए भेजा गया है। जिलाधिकारी जालौन को जांच अधिकारी नामित किया गया है। अंतिम जांच में आरोपों से मुक्त होने तक अर्जुन सिंह प्रशासक पद पर नहीं रहेंगे। क्षेत्र पंचायत नदीगांव के सामान्य और नियमित कार्यों का संचालन संबंधित एसडीएम करेंगे। शासन ने हाईकोर्ट में एक सितंबर के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने का उल्लेख करते हुए मुख्य स्थायी अधिवक्ता और अन्य विधि अधिकारियों को 12 अक्टूबर की सुनवाई पर प्रभावी पैरवी करने के निर्देश भी दिए हैं। अर्जुन सिंह के खिलाफ आरोपों पर अंतिम निर्णय आना बाकी है। प्रशासक पद से हटाने की कार्रवाई अंतिम जांच पूरी होने तक की गई है। इसे आरोपों पर अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।
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