नीट विवाद के बीच छात्रा की मौत
पटना में मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही छात्रा श्रुति कुमारी मृत अवस्था में अपने छात्रावास के कमरे में मिली। छात्रा समस्तीपुर की रहने वाली थी और पिछले दो वर्षों से पटना में रहकर तैयारी कर रही थी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
दि राइजिंग न्यूज़। पटना। 02 जून 2026
पटना हॉस्टल में मिली श्रुति की लाश, परिवार और दोस्तों के दावों ने बढ़ाई चिंता
पटना में नीट की तैयारी कर रही समस्तीपुर की छात्रा श्रुति कुमारी मृत अवस्था में अपने हॉस्टल के कमरे में मिली। छात्रा पिछले दो वर्षों से राजधानी में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही थी। परिजनों और दोस्तों के अनुसार वह पिछले कुछ समय से मानसिक तनाव में थी। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है। घटना ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बिहार की राजधानी पटना से एक दुखद खबर सामने आई है। मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही छात्रा श्रुति कुमारी मृत अवस्था में अपने हॉस्टल के कमरे में मिली। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस और जांच दल ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार श्रुति कुमारी समस्तीपुर जिले की रहने वाली थी और वर्ष 2024 से पटना के पत्रकार नगर थाना क्षेत्र स्थित एक छात्रावास में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही थी। मंगलवार सुबह उसके कमरे का दरवाजा नहीं खुलने पर साथ रहने वाले छात्रों और छात्रावास प्रबंधन को शक हुआ। बाद में कमरे के भीतर उसका शव मिला।
कुछ दिनों से तनाव में थी छात्रा
छात्रा के करीबी लोगों का कहना है कि वह पिछले कुछ समय से मानसिक रूप से परेशान दिखाई दे रही थी। दोस्तों के अनुसार वह अक्सर कहती थी कि उसके माता-पिता उससे पहले की तरह बातचीत नहीं करते हैं। बताया जा रहा है कि वह लगभग दस दिन पहले ही अपने गांव से वापस पटना लौटी थी।
जांच में जुटी पुलिस
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। कमरे की जांच कर आवश्यक साक्ष्य जुटाए गए हैं। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और परिजनों को सूचना दे दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
इससे पहले मध्य प्रदेश की रहने वाली आकांक्षा चतुर्वेदी की मौत का मामला भी चर्चा में रहा था। परिजनों ने दावा किया था कि वह परीक्षा से जुड़े विवादों और भविष्य की चिंता को लेकर गहरे तनाव में थी। ऐसे मामलों ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को लेकर बहस तेज कर दी है।
बढ़ रही है मानसिक सहयोग की जरूरत
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को केवल शैक्षणिक नहीं बल्कि भावनात्मक और मानसिक सहयोग की भी आवश्यकता होती है। परिवार, शिक्षक और समाज की भूमिका ऐसे समय में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है ताकि छात्र किसी भी प्रकार के तनाव का सामना अकेले न करें।