होर्मुज पर ईरान की हुंकार
मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय है और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा। वहीं अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नए हवाई हमलों की पुष्टि की है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
दि राइजिंग न्यूज़ | तेहरान | 16 जुलाई 2026
मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच टकराव लगातार गहराता जा रहा है। इसी बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए अमेरिका को सीधी चेतावनी दी है। ईरान के सैन्य मुख्यालय के प्रवक्ता ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य देश की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा विषय है। यदि किसी भी बाहरी शक्ति ने यहां हस्तक्षेप करने की कोशिश की तो उसका जवाब पूरी ताकत के साथ दिया जाएगा।ईरान ने स्पष्ट किया कि उसकी सशस्त्र सेनाएं किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। तेहरान का कहना है कि यदि अमेरिका ने उसके बुनियादी ढांचे या सैन्य ठिकानों पर हमले बढ़ाए तो जवाब पहले से कहीं अधिक व्यापक और कठोर होगा। इस बयान के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
ईरान ने क्या दी चेतावनी
ईरान के सैन्य प्रवक्ता ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य देश की "लाल रेखा" है और इसे किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि दुनिया की कोई भी ताकत ईरान से होर्मुज को अलग नहीं कर सकती। यदि अमेरिका या उसके सहयोगी किसी प्रकार का सैन्य हस्तक्षेप करते हैं तो उसका जवाब केवल सीमित नहीं बल्कि व्यापक स्तर पर दिया जाएगा।प्रवक्ता ने यह भी कहा कि ईरान अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। उनका दावा है कि यदि संघर्ष और बढ़ा तो पूरे क्षेत्र में मौजूद उन ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है जिन्हें अब तक सुरक्षित माना जाता रहा है।
संसद अध्यक्ष का बड़ा बयान
ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर देश की भूमिका राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि कोई भी बाहरी शक्ति ईरान पर अपनी इच्छा नहीं थोप सकती। यदि देश की सुरक्षा को खतरा हुआ तो हर आवश्यक कदम उठाया जाएगा।उन्होंने यह भी कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन यदि राष्ट्रीय हितों की रक्षा का सवाल आया तो पीछे नहीं हटेगा। उनके अनुसार शांति तभी संभव है जब सभी पक्ष समझौतों का सम्मान करें और एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करें।
समझौते पर भी उठाए सवाल
ईरानी नेतृत्व ने हाल में हुए शांति समझौते को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि किसी भी समझौते का महत्व तभी है जब उसकी सभी शर्तों का पालन किया जाए। यदि समझौते से ईरान को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिलता तो उसके लिए उस पर कायम रहने का कोई औचित्य नहीं है।ईरान का यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्ते पहले से ही बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे में समझौते के भविष्य को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ गई है।
अमेरिका ने फिर किए हवाई हमले
दूसरी ओर अमेरिका ने पुष्टि की है कि उसने ईरान से जुड़े सैन्य ठिकानों पर एक और चरण के हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि इन हमलों का उद्देश्य उन ठिकानों को निशाना बनाना था जिनसे होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को खतरा पैदा हो रहा था।इन हमलों के बाद मध्य पूर्व में सैन्य गतिविधियां और तेज हो गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव कम नहीं हुआ तो इसका असर वैश्विक व्यापार, समुद्री परिवहन और कच्चे तेल की आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।
महत्वपूर्ण बिंदु
- ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को अपनी लाल रेखा बताया।
- अमेरिका को किसी भी हस्तक्षेप पर कड़े जवाब की चेतावनी दी।
- ईरान ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा।
- संसद अध्यक्ष ने होर्मुज को देश की सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
- अमेरिका ने ईरान से जुड़े सैन्य ठिकानों पर नए हवाई हमलों की पुष्टि की।
- बढ़ते तनाव से पूरे मध्य पूर्व में हालात और गंभीर हो गए हैं।