नगर निगम में SIT जांच पर पार्षदों ने उठाए सवाल:कानपुर महापौर से पूछा- जांच टीम गठन का आधार क्या,बोले- न आदेश पता न शिकायत
कानपुर नगर निगम में टेंडर घोटाले समेत भ्रष्टाचार में शामिल अधिकारियों के खिलाफ चल रही जांच को लेकर एक दर्जन से ज्यादा पार्षदों ने सवाल उठाए हैं। पार्षदों ने महापौर को पत्र देकर एसआईटी गठन का आधार, आदेश और अधिकार क्षेत्र संबंधी सूचना मांगी है। जिस पर महापौर ने नगर आयुक्त से आख्या मांगी है। उनका कहना है कि करीब दो महीने से पुलिस विभाग के अधिकारी नगर निगम मुख्यालय के अलग-अलग विभागों में जानकारी जुटा रहे हैं, लेकिन जांच के उद्देश्य और दायरे के बारे में पार्षदों को स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। महापौर ने नगर आयुक्त से आख्या मांगी महापौर प्रमिला पांडेय को दिए गए पत्र में एसआईटी गठन का आधार, आदेश और अधिकार क्षेत्र संबंधी सूचना मांगी है। इसमें कहा गया कि नगर निगम के कार्यों की जांच के लिए दो अलग-अलग एसआईटी गठित की गई है, लेकिन एसआईटी के गठन के आदेश, जांच के बिंदु, शिकायतों और जांच के लिए निर्धारित क्षेत्र की जानकारी सदन या पार्षदों को नहीं दी जा रही है। जिस पर महापौर ने नगर आयुक्त से आख्या मांगी है। जांच के नाम पर अनिश्चितता का माहौल पार्षदों ने पत्र में कहा कि जानकारी के अभाव में नगर निगम में लोगों के बीच भय और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। इससे नगर निगम के विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों की कार्यशैली पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका है। पार्षदों ने कहा कि वह किसी भी निष्पक्ष जांच का विरोध नहीं कर रहे हैं। कानूनी प्रावधानों का दिया हवाला पत्र में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17-ए और अखिल भारतीय सेवाएं (आचरण) नियमावली, 1968 के नियम 3(3) का हवाला दिया गया है। पार्षदों ने कहा कि लोकसेवक के आधिकारिक कर्तव्यों से जुड़े निर्णयों की जांच या अन्वेषण से पहले सक्षम प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति और संबंधित मामलों में लिखित पुष्टि जैसे प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। पार्षदों ने अनुरोध किया है कि इस मामले को नगर निगम की आगामी बैठक के एजेंडे में शामिल किया जाए और सदन व कार्यकारिणी के समक्ष पूरी स्थिति रखी जाए।
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