नीला ड्रम हत्याकांड: अधिवक्ता बोले- समाज में जाएगा कड़ा संदेश:फैसला सुनते ही अधिवक्ताओं ने बजाईं तालियां
देशभर में चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में बुधवार को दोषी मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद अधिवक्ताओं ने फैसले का स्वागत किया। फैसला सुनते ही कोर्ट रूम में मौजूद अधिवक्ताओं ने तालियां बजाईं और मिठाई बांटकर खुशी जताई। अधिवक्ताओं का कहना था कि इस फैसले से समाज में कड़ा संदेश जाएगा। साथ ही ऐसे अपराध करने वालों को भी कानून का डर रहेगा। मेरठ में हुए इस हत्याकांड ने पूरे देश का ध्यान खींचा था। अधिवक्ताओं ने कहा कि अदालत के फैसले से न्याय व्यवस्था के प्रति लोगों का भरोसा मजबूत होगा और भविष्य में इस तरह के अपराधों को रोकने में मदद मिल सकती है। न्यायालय ने न्यायहित में सही फैसला सुनाया मेरठ बार एसोसिएशन के सदस्य एडवोकेट एसके दीक्षित ने कहा कि बुधवार को आया फैसला ऐतिहासिक है। माननीय न्यायाधीश ने दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाकर न्यायहित में निर्णय लिया है। इससे समाज में एक संदेश जाएगा कि इस तरह के अपराध करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। मेरठ में जिस तरह का घिनौना अपराध हुआ, उसकी गंभीरता को देखते हुए यह फैसला महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से छोटे से लेकर बड़े अपराध करने वालों के मन में भी कानून का डर पैदा होगा। यह पूरे देश के लिए एक संदेश है। न्यायाधीश ने जो न्याय दिया है, उससे लोग प्रसन्न हैं और पीड़ित परिवार भी खुश है। मामले में बच्ची के भविष्य और उसकी परवरिश को लेकर उठ रहे सवालों पर एसके दीक्षित ने कहा कि बच्ची छोटी है, यह बात बिल्कुल सही है, लेकिन उसके भविष्य को अपराध से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा। अपराध की गंभीरता और बच्ची के भविष्य को अलग-अलग नजरिए से देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह एक अधिवक्ता के तौर पर जितना समझते हैं और अदालत में जो कार्यवाही उन्होंने देखी है, उसके आधार पर न्यायाधीश ने सही निर्णय दिया है। इसे केवल भावनात्मक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। बच्ची की उम्र और उसका भविष्य अपनी जगह है, लेकिन अपराध के लिए दी गई सजा पर विचार करते समय अपराध की गंभीरता भी महत्वपूर्ण है। पूरे देश में चर्चित हुआ मामला पूर्व शासकीय अधिवक्ता और मेरठ बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री मुकेश मित्तल ने कहा कि जब दोनों दोषियों की सजा पर बहस हो रही थी, तब वह न्यायालय में मौजूद थे। उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से महत्वपूर्ण तर्क रखे गए। यह मामला केवल मेरठ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे देश और दुनिया में नीले ड्रम हत्याकांड के नाम से चर्चित हुआ। मुकेश मित्तल ने कहा कि घटना के बाद समाज में इस तरह के अपराधों को लेकर काफी चर्चा हुई। यदि ऐसे अपराधों में कड़ी सजा नहीं मिलती, तो अपराध करने वालों के मन में यह विचार आ सकता है कि कुछ भी करने के बाद उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि न्यायालय के इस फैसले से ऐसे लोगों को संदेश मिलेगा कि अपराध करने पर कानून के तहत सजा का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मामले में प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं होने के बावजूद पुलिस और प्रशासन ने जांच तथा अभियोजन के स्तर पर काम किया।उन्होंने कहा कि यह फैसला उन लोगों के लिए नजीर बनेगा, जो इस तरह के अपराधों में शामिल होने के बारे में सोचते हैं या पहले से ऐसे अपराधों से जुड़े हैं। उनके मुताबिक, सजा का संदेश भविष्य में अपराध करने वालों को ऐसा कदम उठाने से रोकने में मदद कर सकता है। पहले दिन से मामले को देख रहा था, फैसले से बनेगी नजीर अधिवक्ता बलराम सोम ने कहा कि उन्होंने इस केस को पहले दिन से देखा और समझा है। उन्होंने पहले भी कहा था कि जिस प्रकार की निर्मम हत्या हुई, उसमें कड़ी सजा दी जा सकती है। उन्होंने मुकदमे की लंबी सुनवाई, गवाहों के बयान और अदालत में हुई कार्यवाही का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मामले में 22 गवाहों के बयान और 129 पेशियों के बाद फैसला आया है। उनके अनुसार, यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों के लिए नजीर पेश कर सकता है। उन्होंने फैसले के दौरान न्यायाधीश की ओर से महाभारत के श्लोक का उल्लेख किए जाने की बात भी कही। बलराम सोम के अनुसार, न्यायाधीश ने अपने निर्णय की शुरुआत महाभारत के श्लोक से की और दंड देने को धर्म से जोड़ते हुए अपराध की गंभीरता पर टिप्पणी की। उन्होंने बताया कि अदालत ने दोनों दोषियों को मृत्युदंड के साथ 50 हजार रुपये और 20 हजार रुपये के आर्थिक दंड से भी दंडित किया। इस तरह कुल 70 हजार रुपये के आर्थिक दंड का उल्लेख किया गया। बलराम सोम ने कहा कि उनके अनुसार, अदालत ने अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए फैसला सुनाया है और यह निर्णय ऐसे मामलों में एक उदाहरण बन सकता है। फैसले से समाज में पहुंचेगा कानून का संदेश अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि जिला जज साहब ने बहुत अच्छा फैसला सुनाया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह का कृत्य इस मामले में किया गया, उसके बाद समाज में इस तरह की घटनाओं को लेकर डर और चिंता का माहौल था। लोगों के मन में सवाल था कि ऐसे अपराधों में दोषियों को किस तरह की सजा मिलेगी। उन्होंने कहा कि अदालत के इस निर्णय से समाज में संदेश जाएगा कि अपराध करने वालों को कानून के तहत सजा मिल सकती है। इस तरह के फैसलों से लोगों में न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास बढ़ता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अदालत के निर्णय से ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी और लोग कानून को गंभीरता से लेंगे। मृत्युदंड का फैसला बना मिसाल अधिवक्ता नसीब सैफी ने कहा कि बुधवार को माननीय न्यायाधीश ने मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। उनके अनुसार, यह फैसला ऐसे मामलों में एक नजीर के रूप में देखा जाएगा। उन्होंने कहा कि मुकदमे के दौरान दोषियों को कड़ी सजा दिए जाने की मांग उठाई जा रही थी और बुधवार को अदालत ने अपना निर्णय सुना दिया। नसीब सैफी ने कहा कि इस मामले का फैसला आने के बाद यह चर्चा का विषय बना हुआ है। उनके अनुसार, इस तरह के अपराधों में अदालत की ओर से सुनाया गया फैसला समाज में कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाने और अपराध करने वालों को सजा का संदेश देने का काम करेगा। फैसला सुनते ही कोर्ट रूम में बजाईं तालियां नीले ड्रम हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद कोर्ट रूम में मौजूद अधिवक्ताओं ने प्रतिक्रिया दी। जैसे ही न्यायाधीश ने फैसला सुनाया, वहां मौजूद अधिवक्ताओं ने तालियां बजाईं। इसके बाद अधिवक्ताओं ने मिठाई भी बांटी। अधिवक्ताओं का कहना था कि लंबे समय से चर्चित इस मामले में फैसला आने के बाद न्यायिक प्रक्रिया के एक महत्वपूर्ण चरण का समापन हुआ है। अधिवक्ताओं ने कहा कि यह मामला केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे देश में इसकी चर्चा हुई। इसलिए इस मामले में सुनाए गए फैसले को लेकर लोगों की नजरें अदालत की कार्यवाही पर थीं। अधिवक्ताओं के अनुसार, फैसले से यह संदेश गया है कि गंभीर अपराधों में अदालत साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर निर्णय लेती है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय को भविष्य में ऐसे मामलों के संदर्भ में याद किया जाएगा।
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