नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा:फतेहपुर में भक्तों ने की उपासना, जानें धार्मिक महत्व और मंत्र
यूपी के फतेहपुर जिले में नवरात्रि के छठे दिन शुक्रवार को सुबह से ही मां भगवती के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना किया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता ने अपने इस पुत्री स्वरूप के माध्यम से अपने पिता के कुल की रक्षा करने का संदेश दिया है। पौराणिक कथा के अनुसार,महर्षि कात्यायन ने कठोर तपस्या करके देवी भगवती से यह वरदान मांगा था कि वे उनके घर में पुत्री रूप में जन्म लें। देवी ने ऋषि कात्यायन की भक्ति और प्रसन्नता के लिए अपने अजन्मा स्वरूप का त्याग किया और उनके कुल में पुत्री के रूप में अवतार लिया। सामान्यतः विवाह के बाद पुत्री का गोत्र उसके पति के गोत्र से जुड़ता है, लेकिन मां कात्यायनी सदा-सर्वदा के लिए अपने पिता के गोत्र से जुड़ी रहीं। इसी कारण उनका नाम 'कात्यायनी' पड़ा। नवरात्र की षष्ठी तिथि मां सरस्वती को भी समर्पित मानी जाती है। मान्यता है कि इस रात्रि में जागरण, जप और ध्यान करने से साधक को मां कात्यायनी की कृपा का सहज ही लाभ प्राप्त होता है। उपासना का मंत्र या देवी सर्वभूतेषु स्मृति रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ वही नवरात्र पर्व पर माँ दुर्गा पंडाल सजाए भक्त तांबेश्वर नवदुर्गा कमेटी अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव,उपाध्यक्ष,उपेन्द्र पटेल कोषाध्य,आशीष तिवारी,अजय पाल व्यवस्थापक, केके तिवारी, अमित तिवारी महामंत्री, राहुल सिंह,अमित पटेल,विकास सोनी,कृष्णा,शशि राज,राजू यादव,रजोल साहू,सुफल पटेल ने बताया कि नवरात्र पर्व पर मां के श्रृंखला प्रतिदिन किया जा जाता है और रात्रि जागरण के साथ भंडारा का आयोजन भी किया जाता है। नवरात्र पर्व पर शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है।
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