नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा:ज्ञान, वैराग्य और सृष्टि की शक्ति मां की उपासना, फतेहपुर के 2200 पंडालों में भीड़

Oct 12, 2026 - 08:41
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नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा:ज्ञान, वैराग्य और सृष्टि की शक्ति मां की उपासना, फतेहपुर के 2200 पंडालों में भीड़
यूपी के फतेहपुर जिले में शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर मां दुर्गा के नव रूपों की पूजा का विशेष महत्व है। नवरात्रि के दूसरे दिन जगज्जननी मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप माता ब्रह्मचारिणी की पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जा रही है।पूरे जिले में सजे 2200 दुर्गा पंडालों में सोमवार के दिन सुबह भक्तों की भीड़ दर्शन के लिए पहुच रही है।दुर्गा पंडालों को बिजली के रंगबिरंगी लाइट से सजाया गया है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,मां ब्रह्मचारिणी ज्ञान,तपस्या, वैराग्य और ध्यान की अधिष्ठात्री देवी हैं। सृष्टि के विस्तार की दिव्य शक्ति ​पौराणिक ग्रंथों के अनुसार,मां ब्रह्मचारिणी को भगवान ब्रह्मा की मूल शक्ति के रूप में माना गया है।मान्यता है कि माता का उद्भव ब्रह्मा जी के कमंडल से हुआ था।सृष्टि के सर्जक ब्रह्मा जी जब अपने मानस पुत्रों के माध्यम से संसार का विस्तार करने में असमर्थ रहे, तब ब्रह्मा जी की इसी आदिशक्ति ने अवतरित होकर पूरी सृष्टि के विस्तार का मार्ग प्रशस्त किया।यही कारण है कि हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में स्त्री को सृष्टि के सृजन और विस्तार का मुख्य कारक माना गया है। ​मां का दिव्य स्वरूप और विशेषता ​मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अत्यंत शांत,निर्मल और दिव्य प्रभाव से युक्त है।माता शांत भाव से श्वेत वस्त्र धारण किए हुए ध्यान की मुद्रा में विराजती हैं।उनके एक हाथ में जल से भरा कमंडल और दूसरे हाथ में रुद्राक्ष की माला शोभायमान रहती है।माता का यह रूप साधकों को कठिन परिस्थितियों में भी संयम,तप और कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का संदेश देता है। ​पूजा का महत्व और आध्यात्मिक फल ​नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के उपासक देवी ब्रह्मचारिणी का विशेष ध्यान और जाप करते हैं।शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भक्त माता का जितना अधिक ध्यान और साधना करते हैं,उन्हें उतना ही श्रेष्ठ और शुभ फल प्राप्त होता है।माता की कृपा से व्यक्ति के जीवन से अज्ञानता का अंधकार दूर होता है और उसमें ज्ञान,ध्यान, संयम व वैराग्य की भावना जागृत होती है।

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