नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की विशेष पूजा:फतेहपुर में हुई आराधना, जानें पौराणिक कथा और महत्व
फतेहपुर में नवरात्रि के पांचवें दिन देवी दुर्गा के पांचवें स्वरूप 'मां स्कंदमाता' की पूजा-अर्चना बड़े ही श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ की जाती है। देवी का यह स्वरूप नारी शक्ति और मातृ शक्ति का सजीव एवं प्रेरणादायी चरित्र माना गया है।भगवान कार्तिकेय (स्कंदकुमार) की माता होने के कारण ही इन्हें 'स्कंदमाता' के नाम से जाना जाता है।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार,गणेश जी देवी के मानस पुत्र हैं तथा कार्तिकेय जी का जन्म गर्भ से हुआ है। शास्त्रों में वर्णित कथा के अनुसार,असुर तारकासुर को यह वरदान प्राप्त था कि उसकी मृत्यु केवल भगवान शिव के तेज से उत्पन्न पुत्र के हाथों ही संभव हो सकती है। इसी कारण से देवी पार्वती का विवाह भगवान शिव के साथ संपन्न हुआ।इसके पश्चात कार्तिकेय का जन्म हुआ और उन्होंने तारकासुर का वध करके देवताओं को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई।
सनातन परंपरा में शिव-पार्वती के इस मांगलिक मिलन को ही विवाह संस्कार और कन्यादान की परंपरा का प्रारंभ माना जाता है।सनातन संस्कृति में कन्यादान और गर्भधारण जैसी व्यवस्थाएं इसी शिव-पार्वती प्रसंग के उपरांत आरंभ हुईं।मां स्कंदमाता की कृपा से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। वही गुरुवार के दिन नवरात्र पर्व के पांचवे दिन सुबह से भक्तों की भीड़ दुर्गा पंडालों में पूजा अर्चना के लिए पहुच रही है।दुर्गा पंडालों में कलाकरों के द्वारा भक्ति गानों के धुन पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जा रहा।शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में सजे 2200 दुर्गा पंडालों में सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किया गया है।जिसके लिए 1700 सौ पुलिस कर्मी सभी दुर्गा पंडालों में तैनात है
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