ओएमआर शीट में गलती पर हाईकोर्ट का राहत से इंकार:कोर्ट ने कहा- परीक्षा निर्देशों का पालन जरूरी, मूल्यांकन नहीं कर सकते

Oct 02, 2026 - 00:50
0
ओएमआर शीट में गलती पर हाईकोर्ट का राहत से इंकार:कोर्ट ने कहा- परीक्षा निर्देशों का पालन जरूरी, मूल्यांकन नहीं कर सकते
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ओएमआर शीट भरने में परीक्षा निर्देशों का पालन नहीं करने वाली अभ्यर्थी को राहत देने से इंकार कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि ओएमआर शीट भरने के संबंध में जारी निर्देश अनिवार्य हैं और उनमें गलती होने पर बाद में हाथ से शीट की जांच कराने की अनुमति नहीं दी जा सकती। जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने कहा कि यदि इस तरह की रियायत बाद में दी जाती है तो इससे परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठ सकते हैं। इसलिए ओएमआर शीट का हाथ से मूल्यांकन कराने की अनुमति नहीं दी जा सकती। जानिये क्या है मामला मामले में याचिकाकर्ता ने अपनी ओएमआर शीट में प्रश्न पुस्तिका संख्या के खाने में सही संख्या 204103343 दर्ज की। हालांकि, दूसरे खाने में उसने पहले गोले के साथ चौथे गोले को भी भर दिया। पहले गोले से अंक '0' दर्शाया जाता था। इस अतिरिक्त निशान के कारण उसकी ओएमआर शीट का मूल्यांकन नहीं किया गया। कई दलीलों को कोर्ट ने किनारे किया याचिकाकर्ता गरिमा दिवाकर की ओर से दलील दी गई कि केवल चौथे गोले पर मामूली निशान लग जाने के कारण उसकी शीट का मूल्यांकन रोक दिया गया, जबकि प्रश्न पुस्तिका संख्या अंकों में सही दर्ज की गई। इस पर आयोग की ओर से बताया गया कि ऐसी गलती केवल याचिकाकर्ता से नहीं हुई। इस तरह की करीब 14 हजार ओएमआर शीट खारिज की गई। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें अदालत ने शैक्षणिक मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाओं पर विचार किया था। हाईकोर्ट के फैसले को बताया आयोग ने विनय कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में हाईकोर्ट की खंडपीठ के फैसले का भी उल्लेख किया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर विचार किया गया, जिसमें स्पष्ट किया गया कि परीक्षा में अभ्यर्थियों के लिए जारी निर्देश अनिवार्य और बाध्यकारी होते हैं तथा उनका सख्ती से पालन किया जाना जरूरी है। हाईकोर्ट ने अपने पूर्व के जय करण सिंह और 52 अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले का भी उल्लेख किया। उस मामले में अभ्यर्थियों ने ओएमआर शीट में पंजीकरण संख्या, अनुक्रमांक, प्रश्न पुस्तिका की श्रेणी या परीक्षा में चुनी गई भाषा के संबंध में गलत जानकारी भर दी थी। इसके कारण उनके परिणाम घोषित नहीं किए गए। उस मामले में हाईकोर्ट ने कहा कि मूल्यांकन की प्रक्रिया तय करना परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था का काम है। जब अभ्यर्थियों को स्पष्ट रूप से बताया गया कि गलत जानकारी भरने पर परिणाम घोषित नहीं किया जाएगा, तब परीक्षा संस्था को बड़ी संख्या में ओएमआर शीट की हाथ से जांच करने का निर्देश नहीं दिया जा सकता। शीट की जांच में लगेगा समय अदालत ने यह भी माना कि हजारों ओएमआर शीट की हाथ से जांच में काफी समय लगेगा और इससे परिणाम में देरी होगी। ओएमआर प्रणाली का उद्देश्य ही मूल्यांकन की प्रक्रिया को तेज करना है। पंजीकरण संख्या और अनुक्रमांक अभ्यर्थी की पहचान तय करने वाले महत्वपूर्ण विवरण हैं, इसलिए इनमें की गई गलती को मामूली नहीं माना जा सकता। ओएमआर शीट का मूल्यांकन नहीं जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने कहा, “निर्देश अनिवार्य हैं और अभ्यर्थियों से अपेक्षा की जाती है कि वे उन्हें ध्यान से पढ़ें। निर्देशों का उल्लंघन होने पर ओएमआर शीट का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता।” हाईकोर्ट ने कहा कि जो अभ्यर्थी परीक्षा निर्देशों को ठीक से नहीं पढ़ते और प्रश्न पुस्तिका के संबंधित खाने को निर्धारित तरीके से नहीं भरते, उन्हें बाद में उस गलती को सुधारने की रियायत नहीं दी जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसी रियायत देने से परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है। इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को कोई राहत देने से इनकार करते हुए याचिका खारिज की।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User