पॉलीग्राफ टेस्ट और पेट के अधपचे खाने से खुला कत्ल:मां के पेट में मिले खाने और लाई डिटेक्टर टेस्ट ने खोला 26 महीने पुराना राज

Oct 03, 2026 - 09:39
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पॉलीग्राफ टेस्ट और पेट के अधपचे खाने से खुला कत्ल:मां के पेट में मिले खाने और लाई डिटेक्टर टेस्ट ने खोला 26 महीने पुराना राज
बरेली के भमोरा थाना क्षेत्र स्थित कुड्डा गांव में 26 महीने पहले हुई 58 वर्षीय रामबेटी की हत्या की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है। जिस कलयुगी बेटे ने रिश्तेदारों को उम्रकैद कराने की नीयत से मां की हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था, वही अपनी मां का कातिल निकला। पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और फॉरेंसिक जांच के सहारे 37 वर्षीय आरोपी बेटे महेंद्र को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है। दिल्ली में पॉलीग्राफ टेस्ट ने पलटा पूरा केस, निर्दोष निकले नामजद रिश्तेदार 7 अगस्त 2024 को कुड्डा गांव में बुजुर्ग महिला रामबेटी की गला दबाकर हत्या की सूचना पुलिस को मिली थी। बेटे महेंद्र ने अपने चचेरे भाइयों नत्थू सिंह, सर्वेश, सुरेंद्र, वीरेंद्र, छोटेलाल और बाद में वीरेश बाबा पर हत्या का आरोप लगाते हुए नामजद मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस करीब दो साल तक जांच में जुटी रही, लेकिन रिश्तेदारों के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिले। इसके बाद पुलिस सभी नामजद आरोपियों को दिल्ली लेकर गई, जहां उनका पॉलीग्राफ (लाई डिटेक्टर) टेस्ट कराया गया। टेस्ट में किसी भी नामजद व्यक्ति के खिलाफ कोई नकारात्मक या विपरीत फाइंडिंग नहीं मिली और वे पूरी तरह निर्दोष साबित हुए। फूड डाइजेशन से तय हुआ मौत का वक्त, स्टेट मेडिको-लीगल सेल की रिपोर्ट बनी आधार नामजद आरोपियों के बेकसूर साबित होने के बाद एसएसपी के निर्देश पर एसपी साउथ अंशिका वर्मा की निगरानी में एसआईटी का गठन किया गया। एसआईटी ने स्टेट मेडिको-लीगल सेल से मेडिकल और एक्सपर्ट ओपिनियन ली। विसरा और मेडिकल रिपोर्ट में पेट के अंदर मौजूद खाने (फूड डाइजेशन) का वैज्ञानिक अध्ययन किया गया। डॉक्टरों की रिपोर्ट से स्पष्ट हुआ कि महिला की मौत खाना खाने के महज 2 से 4 घंटे के भीतर ही हो चुकी थी। इस टाइमिंग ने बेटे महेंद्र द्वारा पुलिस को बताई गई झूठी कहानी की कलई खोल दी। साइंटिफिक एविडेंस के सामने टूटा बेटा, जमीन की रंजिश में घोंटा था सगी मां का गला जांच टीम ने जब भौतिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों (सरकमस्टेंशियल एविडेंस) को जोड़ा, तो सामने आया कि घटना की रात रामबेटी अपने घर के बजाय बेटे के घर पर थीं और महेंद्र लगातार पुलिस से अहम जानकारियां छिपा रहा था। कैंट थाना प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार धीर की टीम ने जब महेंद्र को हिरासत में लेकर मेडिकल रिपोर्ट और वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर सख्ती से पूछताछ की, तो वह टूट गया। उसने कबूल किया कि चचेरे भाइयों से जमीन और पारिवारिक रंजिश का बदला लेने के लिए उसने खुद सोते समय अपनी मां का गला घोंटा था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। एसपी साउथ अंशिका वर्मा का बयान "7 अगस्त 2024 को थाना भमोरा स्थित ग्राम भुड्डा से एक 58 वर्षीय महिला, जिनका नाम रामबेटी था, उनकी हत्या की सूचना प्राप्त हुई। इसके पश्चात नियमानुसार पुलिस टीम द्वारा पोस्टमार्टम कराते हुए सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया। लगातार साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया प्रचलित थी एवं इस केस में एसआईटी (SIT) का गठन भी किया गया, जिनके द्वारा गहनता से विवेचना की गई। और इसमें जितने नामजद व्यक्ति थे, उनका पॉलीग्राफ टेस्ट भी कराया गया, जिसमें कोई भी विपरीत या नकारात्मक फाइंडिंग्स नहीं रहीं। इसके अतिरिक्त स्टेट मेडिको-लीगल सेल से फूड डाइजेशन को आधार मानते हुए मृत्यु का समय निर्धारित करने के लिए मेडिकल और एक्सपर्ट ओपिनियन भी ली गई। तमाम जो भौतिक साक्ष्य एवं सरकमस्टेंशियल एविडेंस हैं, उससे यह तथ्य प्रकाश में आए कि यह हत्या रामबेटी के बेटे महेंद्र द्वारा ही कारित की गई थी एवं समय-समय पर महेंद्र द्वारा कई तथ्य पुलिस से छुपाए भी गए। इस संबंध में महेंद्र को गिरफ्तार करके जेल भेजा जा चुका है और इस संबंध में अग्रिम विधिक कार्रवाई प्रचलित है।" ​Q1. क्या नामजद किए गए रिश्तेदार जेल गए थे, उनका मौजूदा स्टेटस क्या है? जवाब: नहीं, नामजद रिश्तेदारों को जेल नहीं भेजा गया था। पुलिस ने उन्हें थाने बुलाकर गहन पूछताछ की थी, लेकिन उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला। पॉलीग्राफ टेस्ट में क्लीन चिट मिलने के बाद वे पूरी तरह बेदाग साबित हो चुके हैं। ​Q2. पॉलीग्राफ टेस्ट कब हुआ और इससे पुलिस को क्या दिशा मिली? जवाब: घटना के करीब 20 महीने बाद (लगभग 5 महीने पहले) नामजद लोगों का दिल्ली में पॉलीग्राफ टेस्ट कराया गया था। टेस्ट की रिपोर्ट निगेटिव आने से यह साफ हो गया कि हत्या बाहरी लोगों ने नहीं, बल्कि घर के ही किसी शख्स ने की है। ​Q3. मामले की जांच के लिए SIT कब बनी और टीम में कौन-कौन शामिल थे? जवाब: लगभग 6 महीने पहले एसआईटी का गठन हुआ था। यह जांच एसपी साउथ अंशिका वर्मा के निर्देशन में चली, जिसमें कैंट इंस्पेक्टर संजय धीर ने मुख्य भूमिका निभाई। उनके साथ भमोरा थाने के उपनिरीक्षक अनोज कुमार और हेड कांस्टेबल सुंदरपाल सिंह टीम में शामिल थे। ​Q4. फूड डाइजेशन (पेट के खाने) से कातिल का सुराग कैसे लगा? जवाब: स्टेट मेडिको-लीगल सेल की एक्सपर्ट ओपिनियन से पता चला कि महिला की मौत खाना खाने के 2 से 4 घंटे के भीतर हो चुकी थी। बेटे ने पुलिस को जो समय बताया था, वह इस वैज्ञानिक रिपोर्ट से मेल नहीं खा रहा था। इसी विरोधाभास ने बेटे की साजिश का भंडाफोड़ कर दिया। ​Q5. क्या मामले में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है? जवाब: अभी चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है। आरोपी महेंद्र को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है और पुलिस सभी वैज्ञानिक व परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को संकलित कर जल्द ही कोर्ट में चार्जशीट पेश करेगी। ​Q6. आरोपी बेटे ने अपनी ही मां की जान क्यों ली? जवाब: आरोपी महेंद्र का अपने चचेरे भाइयों से जमीन और परिवार को लेकर पुराना विवाद चल रहा था। वह उन्हें किसी भी कीमत पर उम्रकैद या सख्त सजा दिलाना चाहता था। इसी रंजिश में उसने मां की बलि चढ़ा दी और चचेरे भाइयों पर झूठा मर्डर केस दर्ज करा दिया। केस डायरी: घटना और खुलासे की पूरी डिटेल हत्यारा बेटा और उम्र: महेंद्र सिंह (उम्र करीब 37 वर्ष), पुत्र अमर सिंह, निवासी ग्राम कुड्डा, थाना भमोरा, बरेली। मृतका: रामबेटी (उम्र 55 वर्ष), आरोपी महेंद्र की सगी मां। घटना की तारीख व समय: 6 और 7 अगस्त 2024 की दरम्यानी रात। पंजीकृत मुकदमा: धारा 103 (1) बीएनएस, थाना भमोरा। फंसाने की साजिश: आरोपी ने अपने चचेरे भाइयों नत्थू सिंह, सर्वेश, सुरेंद्र, वीरेंद्र, छोटेलाल और बाद में वीरेश बाबा को झूठा नामजद कराया था। संदेह का कारण: नामजद आरोपियों के खिलाफ कोई भौतिक या चिकित्सकीय साक्ष्य नहीं मिला। दिल्ली में पॉलीग्राफ टेस्ट में सभी बेकसूर साबित हुए। साइंटिफिक साक्ष्य बने गले की फांस: मेडिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार मृतका की मौत भोजन करने के 2 से 4 घंटे के भीतर हुई। उस रात मृतका महेंद्र के घर पर मौजूद थी। घटना से पूर्व और पश्चात बेटे व उसकी पत्नी की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं। आरोपी का आपराधिक इतिहास: आरोपी महेंद्र पहले से ही मारपीट, गाली-गलौज, धमकी और आर्म्स एक्ट (मु0अ0सं0 68/16, 69/21, 361/22, 82/25, 460/09) समेत पांच मुकदमों में शामिल रह चुका है। गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम: प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार धीर (थाना कैंट/विवेचक), उपनिरीक्षक अनोज कुमार (थाना भमोरा), हेड कांस्टेबल सुंदरपाल सिंह (थाना भमोरा)। घटना से गिरफ्तारी तक: पूरी टाइमलाइन वारदात और झूठी एफआईआर: 06/07 अगस्त 2024 की रात ग्राम कुड्डा (भमोरा) में 55 वर्षीय रामबेटी की गला दबाकर हत्या। बेटे महेंद्र सिंह ने चचेरे भाइयों नत्थू सिंह आदि के खिलाफ हत्या (धारा 103(1) बीएनएस) की नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई। पॉलीग्राफ टेस्ट और दोषमुक्ति: 2024 - 2025 के दौरान पुलिस जांच में नामजद आरोपियों की संलिप्तता का कोई साक्ष्य नहीं मिला। सभी नामजदों का दिल्ली में पॉलीग्राफ टेस्ट कराया गया, जिसमें वे बेकसूर निकले और कोर्ट ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया। एसआईटी का गठन और साक्ष्यों का मिलान: 2026 की शुरुआत, एसएसपी बरेली द्वारा एसआईटी गठित। कैंट इंस्पेक्टर संजय कुमार धीर ने जांच संभालते हुए मेडिकल विसरा, पाचन प्रक्रिया (भोजन के 2-4 घंटे बाद मौत) और बेटे की गतिविधियों का मिलान किया। कलयुगी बेटे की गिरफ्तारी: 1 अक्टूबर 2026, एसआईटी व भमोरा पुलिस टीम ने 37 वर्षीय आरोपी महेंद्र सिंह को उसके घर से गिरफ्तार किया। अदालत में पेश कर रिमांड स्वीकृत कराया गया और जेल भेजा गया।

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