पाकिस्तान में रात 9 बजे बंद होंगे बाजार, आर्थिक संकट से हाहाकार!

पाकिस्तान ने आर्थिक संकट के बीच सरकारी खर्च और ईंधन की खपत कम करने के लिए कई सख्त कदम उठाए हैं। सरकारी वाहनों के ईंधन में 50 प्रतिशत कटौती, विदेशी दौरों पर रोक और बाजारों के जल्दी बंद होने जैसे फैसलों से देश में मितव्ययिता अभियान तेज हुआ है। इन कदमों का भारत पर संभावित असर मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और क्षेत्रीय आर्थिक स्थिरता से जुड़ा है।

Sep 18, 2026 - 11:54
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पाकिस्तान में रात 9 बजे बंद होंगे बाजार, आर्थिक संकट से हाहाकार!

दि राइजिंग न्यूज | पाकिस्तान | 18 सितंबर 2026

पाकिस्तान इस समय गंभीर आर्थिक दबाव से गुजर रहा है। सरकार ने खर्च कम करने और ईंधन की खपत नियंत्रित करने के लिए देशभर में कई कड़े उपाय लागू किए हैं। सरकारी वाहनों के लिए ईंधन कोटे में 50 प्रतिशत की कटौती से लेकर अधिकारियों के विदेशी दौरों पर रोक तक कई फैसले लिए गए हैं। इसके अलावा बाजार, दुकान, विवाह समारोह और सरकारी कार्यक्रमों को लेकर भी नए नियम लागू किए गए हैं।

आर्थिक संकट के बीच पाकिस्तान सरकार का बड़ा फैसला

पाकिस्तान सरकार के सामने विदेशी मुद्रा भंडार को बनाए रखने और बढ़ते ऊर्जा खर्च को नियंत्रित करने की चुनौती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, देश के पास करीब 26.79 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार बताया गया है। वहीं वित्त वर्ष 2027 में पाकिस्तान को करीब 21.5 अरब डॉलर का बाहरी कर्ज और उसका ब्याज चुकाना है, जिससे सरकार पर वित्तीय दबाव और बढ़ गया है।मध्य पूर्व में तनाव और लाल सागर में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर भी दबाव बढ़ा है। पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत करीब 390.79 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर बताई गई है। ऐसे हालात में सरकार ने सरकारी खर्च घटाने और तेल की खपत कम करने को प्राथमिकता दी है।

सरकारी वाहनों के ईंधन में आधी कटौती

पाकिस्तान के मंत्रिमंडल प्रभाग की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक अगले तीन महीनों के लिए सरकारी वाहनों के ईंधन कोटे में 50 प्रतिशत की कटौती की गई है। हालांकि सेना, अर्धसैनिक बलों, कानून लागू कराने वाली एजेंसियों और आपातकालीन सेवाओं को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है। सरकार का उद्देश्य सरकारी स्तर पर ईंधन की खपत कम करके विदेशी मुद्रा पर पड़ने वाले दबाव को घटाना है।इसके साथ ही सरकार ने नई गाड़ियों और टिकाऊ सामान की खरीद पर भी रोक लगा दी है। हालांकि सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े आवश्यक सामानों की खरीद को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है। इस फैसले से सरकारी विभागों के नए खर्च को सीमित करने और उपलब्ध संसाधनों का अधिक सावधानी से इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है।

सरकारी विभागों के बजट में भी कटौती

वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान कर्मचारियों के वेतन से जुड़े खर्च को छोड़कर अन्य बजटीय खर्चों में पांच प्रतिशत की कटौती करने का आदेश दिया गया है। यह कटौती हर महीने लागू की जाएगी। इस व्यवस्था का असर विदेशों में तैनात पाकिस्तानी दूतावासों और वहां काम करने वाले कर्मचारियों से जुड़े कुछ खर्चों पर भी पड़ेगा।हालांकि दूतावासों के कर्मचारियों के किराये, शिक्षा और इलाज जैसे आवश्यक खर्चों को पहले की तरह जारी रखने की बात कही गई है। सरकार का प्रयास है कि गैर-जरूरी खर्चों को कम करके आवश्यक सरकारी सेवाओं के लिए धन उपलब्ध रखा जाए।

मंत्रियों और अधिकारियों के विदेशी दौरों पर रोक

पाकिस्तान सरकार ने अगले तीन महीनों के लिए मंत्रियों, सलाहकारों और अधिकारियों के विदेशी दौरों पर पूरी तरह रोक लगाने का फैसला किया है। सरकार के मुताबिक केवल बेहद जरूरी यात्राओं को ही अनुमति दी जा सकेगी। ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारियों को सामान्य श्रेणी में ही यात्रा करनी होगी।इसके अलावा बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व करने के लिए मंत्रियों या अधिकारियों की जगह संबंधित देशों में तैनात पाकिस्तानी राजदूतों को भेजे जाने की व्यवस्था की गई है। इससे यात्रा, आवास और प्रतिनिधिमंडल से जुड़े सरकारी खर्चों को कम करने की कोशिश की जा रही है।

सरकारी बैठकों और कार्यक्रमों पर भी रोक

सरकारी दफ्तरों में होने वाली बैठकों को अब अधिक से अधिक दूरस्थ माध्यम से आयोजित करने पर जोर दिया जा रहा है। सरकारी खर्च से होने वाले सेमिनार, प्रशिक्षण कार्यक्रम और सम्मेलन भी रोक दिए गए हैं। अधिकारियों के लिए सरकारी खर्च पर आयोजित होने वाले रात्रिभोज पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।हालांकि विदेशी मेहमानों के लिए आधिकारिक रात्रिभोज की अनुमति रखी गई है। इन फैसलों का उद्देश्य सरकारी कामकाज को पूरी तरह रोकना नहीं, बल्कि ऐसे खर्चों को कम करना है जिन्हें मौजूदा आर्थिक संकट के दौरान टाला जा सकता है।

शादी समारोहों में सिर्फ एक व्यंजन

पाकिस्तान में विवाह समारोहों को लेकर भी खर्च सीमित करने का फैसला किया गया है। नए नियमों के तहत शादी समारोहों में केवल एक व्यंजन परोसे जाने की व्यवस्था लागू की गई है। सरकार का मानना है कि इस तरह के कदमों से सामाजिक आयोजनों में होने वाले अनावश्यक खर्च और खाद्य सामग्री की खपत को नियंत्रित किया जा सकता है।यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब सरकार देश के नागरिकों और संस्थानों से भी खर्च में कटौती तथा ऊर्जा बचत के उपाय अपनाने की अपील कर रही है। शादी समारोहों में भोजन की सीमा तय करना इसी व्यापक मितव्ययिता अभियान का हिस्सा बताया जा रहा है।

रात 9 बजे तक बंद होंगे बाजार

पाकिस्तान में बाजारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए पहले से लागू समय-सीमा को जारी रखा गया है। दुकानें, बड़े बाजार, खरीदारी केंद्र और किराना प्रतिष्ठान रात नौ बजे तक बंद करने होंगे। विवाह भवनों और संबंधित आयोजनों के लिए रात दस बजे तक तथा भोजनालयों के लिए रात ग्यारह बजे तक संचालन की अनुमति होगी।हालांकि भोजन की घर तक आपूर्ति और तैयार भोजन ले जाने की सुविधा पर रोक नहीं लगाई गई है। अस्पताल, औषधि दुकानें, बेकरी, तंदूर, डेयरी की दुकानें और पेट्रोल पंप जैसे जरूरी प्रतिष्ठानों को इन समय-सीमाओं से बाहर रखा गया है। सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों और दूरभाष सहायता केंद्रों को भी छूट दी गई है।

आम पाकिस्तानियों पर पड़ेगा असर

इन फैसलों का असर पाकिस्तान के आम लोगों और कारोबारियों पर भी पड़ सकता है। बाजार जल्दी बंद होने से दुकानदारों के कामकाज के घंटे कम होंगे और रात में खरीदारी करने वाले ग्राहकों की संख्या प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर सरकार का तर्क है कि ऊर्जा और ईंधन की बचत के लिए ऐसे कदम जरूरी हैं।विवाह समारोहों में भोजन सीमित करने और सरकारी आयोजनों पर रोक से भी खर्च कम करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि इन उपायों से आम जनता की रोजमर्रा की गतिविधियों और छोटे कारोबार पर कितना आर्थिक प्रभाव पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

भारत पर सीधे असर की संभावना सीमित

पाकिस्तान के इन आर्थिक कदमों का भारत पर तत्काल और सीधा प्रभाव सीमित दिखाई देता है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा व्यापार बहुत कम है, इसलिए पाकिस्तान में ईंधन की खपत घटाने के फैसले का भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ने की संभावना कम है।हालांकि पाकिस्तान की ओर से तेल की मांग में कमी का वैश्विक बाजार पर मामूली असर पड़ सकता है। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आती है, तो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश को भी कुछ राहत मिल सकती है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से पूरा करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है।

दक्षिण एशिया की आर्थिक स्थिरता भी महत्वपूर्ण

पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति लंबे समय तक कमजोर रहने का प्रभाव केवल उसके घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रह सकता। दक्षिण एशिया के देशों की अर्थव्यवस्थाएं व्यापार, ऊर्जा, क्षेत्रीय सुरक्षा और आपूर्ति व्यवस्था के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़ी हैं। इसलिए पड़ोसी देश में गंभीर आर्थिक अस्थिरता क्षेत्रीय वातावरण को प्रभावित कर सकती है।फिलहाल पाकिस्तान सरकार का ध्यान सरकारी खर्च घटाने, ईंधन बचाने और विदेशी मुद्रा पर दबाव कम करने पर है। आने वाले महीनों में इन उपायों से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को कितनी राहत मिलती है और आम लोगों तथा कारोबारियों पर इसका कितना असर पड़ता है, यह महत्वपूर्ण विषय रहेगा।

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