यूपीआई से 2000 से ज्यादा भेजे तो देना होगा शुल्क

अगस्त 2026 में यूपीआई के जरिए करीब 2,451 करोड़ लेनदेन हुए, जिनकी कुल राशि लगभग 29.82 लाख करोड़ रुपये रही। 2000 रुपये से अधिक के व्यापारी भुगतान पर शुल्क की चर्चा के बीच व्यापारी भुगतान के आंकड़ों और छोटे कारोबारियों को मिलने वाली राहत को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

Sep 18, 2026 - 12:07
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यूपीआई से 2000 से ज्यादा भेजे तो देना होगा शुल्क

दि राइजिंग न्यूज | नई दिल्ली | 18 सितंबर 2026

भारत में डिजिटल भुगतान का सबसे प्रमुख माध्यम बन चुके यूपीआई को लेकर एक बार फिर शुल्क व्यवस्था चर्चा में है। अगस्त 2026 में यूपीआई के माध्यम से करीब 2,450.9 करोड़ लेनदेन दर्ज किए गए और इनका कुल मूल्य लगभग 29.82 लाख करोड़ रुपये रहा। राष्ट्रीय भुगतान निगम के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जुलाई की तुलना में अगस्त में लेनदेन की संख्या और कुल राशि दोनों में बदलाव दर्ज हुआ है।

2000 रुपये से अधिक के भुगतान पर शुल्क की चर्चा

यूपीआई के माध्यम से व्यापारियों को किए जाने वाले 2000 रुपये से अधिक के भुगतान पर व्यापारी छूट दर से जुड़े शुल्क की व्यवस्था को लेकर हाल में चर्चा सामने आई है। इसके बाद यह सवाल उठ रहा है कि इसका असर दुकानदारों और ग्राहकों पर किस तरह पड़ सकता है। व्यापारी भुगतान और व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले भुगतान को अलग-अलग श्रेणियों में देखा जाता है।यूपीआई की व्यवस्था में व्यक्ति से व्यापारी को होने वाला भुगतान व्यापारी भुगतान श्रेणी में आता है। राष्ट्रीय भुगतान निगम के अनुसार यूपीआई तत्काल बैंक खाते से बैंक खाते में धन हस्तांतरण की सुविधा देने वाली भुगतान प्रणाली है। इसका इस्तेमाल व्यक्ति से व्यक्ति और व्यापारी भुगतान दोनों के लिए किया जाता है।

अगस्त में यूपीआई का रिकॉर्ड लेनदेन

राष्ट्रीय भुगतान निगम के अगस्त 2026 के आंकड़ों के मुताबिक यूपीआई पर करीब 24,508.96 लाख लेनदेन दर्ज किए गए, जो लगभग 2,450.9 करोड़ के बराबर हैं। इन लेनदेन का कुल मूल्य 29,82,355.95 करोड़ रुपये यानी करीब 29.82 लाख करोड़ रुपये रहा। इससे पता चलता है कि देश में डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल लगातार बड़े पैमाने पर हो रहा है।यूपीआई के बढ़ते इस्तेमाल में खरीदारी, बिल भुगतान, सेवाओं का भुगतान और लोगों के बीच धन हस्तांतरण जैसी गतिविधियां शामिल हैं। दुकानों पर भुगतान के लिए क्यूआर संकेतक के इस्तेमाल ने डिजिटल भुगतान को आम लेनदेन का हिस्सा बना दिया है। ऐसे में शुल्क से जुड़ा कोई भी बदलाव व्यापारियों और भुगतान करने वाले ग्राहकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

व्यक्ति से व्यापारी भुगतान का बढ़ता इस्तेमाल

यूपीआई लेनदेन को broadly व्यक्ति से व्यक्ति और व्यक्ति से व्यापारी भुगतान जैसी श्रेणियों में समझा जाता है। व्यक्ति से व्यापारी भुगतान का इस्तेमाल दुकान, बाजार, सेवा प्रदाता या अन्य कारोबारी को पैसे देने के लिए किया जाता है। दूसरी तरफ व्यक्ति से व्यक्ति भुगतान में एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के खाते में धन भेजता है।अगस्त के आंकड़ों को लेकर सामने आई जानकारी में व्यक्ति से व्यापारी भुगतान की संख्या का हिस्सा काफी बड़ा बताया गया है। हालांकि कुल राशि के लिहाज से व्यक्ति से व्यक्ति लेनदेन का हिस्सा अधिक रहने की बात कही गई है। इसका अर्थ है कि व्यापारियों को बड़ी संख्या में छोटे भुगतान किए जाते हैं, जबकि व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले कुछ लेनदेन में रकम अपेक्षाकृत बड़ी हो सकती है।

96 प्रतिशत वाले दावे को लेकर चर्चा

2000 रुपये से अधिक के व्यापारी भुगतान पर शुल्क की चर्चा के बीच यह भी सवाल उठाया गया कि ऐसे कितने लेनदेन वास्तव में शुल्क के दायरे में आएंगे। पहले सरकार की ओर से यह बताया गया था कि यूपीआई के अधिकांश व्यापारी लेनदेन 2000 रुपये से कम के होते हैं। इसी आधार पर यह तर्क दिया गया कि प्रस्तावित शुल्क का दायरा सीमित होगा।वहीं अगस्त के आंकड़ों की अलग-अलग व्याख्याओं के आधार पर व्यापारी भुगतान की संख्या और 2000 रुपये से अधिक के भुगतान को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। यहां यह समझना जरूरी है कि कुल यूपीआई लेनदेन, व्यक्ति से व्यापारी लेनदेन और 2000 रुपये से अधिक के व्यापारी लेनदेन तीन अलग-अलग आंकड़े हैं। इसलिए इन आंकड़ों की सीधे तुलना करने के बजाय संबंधित श्रेणी के आधिकारिक आंकड़े देखना जरूरी है।

छोटे कारोबारियों के लिए राहत का प्रावधान

यूपीआई से जुड़े शुल्क ढांचे में छोटे कारोबारियों के लिए राहत का प्रावधान भी महत्वपूर्ण है। छोटे व्यापारी और सड़क किनारे सामान बेचने वाले कारोबारियों के लिए अलग श्रेणी बनाई गई है। यदि निर्धारित शर्तों के तहत ऐसे व्यापारी अपने व्यक्तिगत बैंक खाते में एक महीने में तय सीमा तक यूपीआई भुगतान प्राप्त करते हैं, तो उन पर व्यापारी छूट दर लागू नहीं होने की व्यवस्था बताई गई है।इस प्रावधान का उद्देश्य छोटे कारोबारियों पर डिजिटल भुगतान की लागत का अतिरिक्त बोझ पड़ने से बचाना है। छोटे दुकानदारों के लिए यूपीआई भुगतान सुविधा का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। इसलिए शुल्क व्यवस्था में छोटे कारोबारियों को मिलने वाली छूट का असर उनके कारोबार और डिजिटल भुगतान अपनाने पर पड़ सकता है।

क्या ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा असर

व्यापारी भुगतान पर शुल्क लागू होने की स्थिति में सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि उसका वास्तविक भार कौन उठाएगा। शुल्क व्यापारी स्तर पर लागू होने की स्थिति में दुकानदार अपनी लागत में बदलाव कर सकता है। हालांकि किसी व्यापारी द्वारा इस लागत को ग्राहक से वसूलना है या नहीं, यह उसके कारोबार और मूल्य निर्धारण पर निर्भर करेगा।इसलिए यह कहना अभी सही नहीं होगा कि हर ग्राहक को 2000 रुपये से अधिक का यूपीआई भुगतान करने पर सीधे अतिरिक्त रकम देनी होगी। शुल्क की संरचना, लागू होने वाली श्रेणियां और व्यापारियों द्वारा अपनाई जाने वाली मूल्य नीति यह तय करेगी कि इसका अंतिम असर ग्राहकों पर कितना पड़ता है।

नकद भुगतान बढ़ने की आशंका पर भी चर्चा

यूपीआई भुगतान पर शुल्क से जुड़ी किसी भी व्यवस्था के बाद नकद भुगतान के दोबारा बढ़ने की संभावना पर चर्चा होना स्वाभाविक है। हालांकि यूपीआई की व्यापक पहुंच और आसान भुगतान प्रक्रिया को देखते हुए केवल शुल्क व्यवस्था के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि लोग बड़े पैमाने पर नकद भुगतान की ओर लौट जाएंगे।राष्ट्रीय भुगतान निगम के आंकड़े बताते हैं कि अगस्त 2026 में यूपीआई पर करीब 29.82 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन हुए। इतना बड़ा डिजिटल भुगतान आधार यह दिखाता है कि यूपीआई देश की भुगतान व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

डिजिटल भुगतान व्यवस्था में आगे क्या बदलेगा

यूपीआई शुल्क व्यवस्था में बदलाव होने पर इसका असर व्यापारियों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और ग्राहकों के व्यवहार पर देखा जा सकता है। बड़े कारोबारियों और छोटे दुकानदारों के लिए अलग-अलग नियम होने से उनके ऊपर पड़ने वाला प्रभाव भी अलग हो सकता है। इसलिए किसी भी बदलाव को समझने के लिए शुल्क की दर के साथ-साथ छूट और पात्रता की शर्तों को देखना जरूरी होगा।फिलहाल यूपीआई भारत की तत्काल डिजिटल भुगतान व्यवस्था का प्रमुख हिस्सा बना हुआ है। राष्ट्रीय भुगतान निगम इसे बैंक खातों के बीच तत्काल धन हस्तांतरण की सुविधा देने वाली प्रणाली के रूप में संचालित करता है। आने वाले समय में शुल्क से जुड़े नियमों में होने वाले बदलाव यह तय करेंगे कि व्यापारी भुगतान की लागत और डिजिटल भुगतान के इस्तेमाल पर कितना प्रभाव पड़ता है।

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