पार्टी जहां तय करेगी, वहीं से लड़ूंगी चुनाव- अपर्णा यादव:बोलीं- मैनपुरी से चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं, सीट का फैसला पार्टी पर छोड़ा
राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव मैनपुरी पहुंचीं। अपर्णा ने 2027 के विधानसभा चुनाव में लड़ने को लेकर कहा कि पार्टी जहां से तय करेगी, वह वहीं से चुनाव लड़ेंगी। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल मैनपुरी से चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं है। चुनाव लड़ने के लिए सीट का फैसला पार्टी पर छोड़ा। बुधवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यक्रम में शामिल हुई। उन्होंने महिला सशक्तिकरण, नशामुक्त भारत और महिलाओं की सामाजिक भूमिका पर बात की। महिला सशक्तिकरण और नशामुक्ति पर बात अपर्णा यादव ने कहा कि वह एबीवीपी के सम्मेलन में शामिल होने आई हैं। कार्यक्रम में युवतियों के सामने महिला सशक्तिकरण से जुड़े विभिन्न विषय रखे जा रहे हैं। उन्होंने भारतीय परंपराओं और प्राचीन प्रथाओं से जुड़ी महिलाओं के योगदान पर भी चर्चा की। नशामुक्त भारत के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि देश को नशामुक्त बनाने में महिलाओं और बेटियों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। कार्यक्रम में इस बात पर चर्चा की गई कि महिलाएं और युवतियां समाज में नशे के खिलाफ जागरूकता लाने में किस तरह योगदान दे सकती हैं। बोलीं- ससुराल से जुड़े संदर्भ में बोलना अच्छा लग रहा छात्रों के बीच अपने ससुराल से जुड़े संदर्भ में बोलने के अनुभव पर सवाल पूछे जाने पर अपर्णा यादव ने कहा कि उन्हें अच्छा लग रहा है। उन्होंने इसे अपने लिए “बहुत ही dignified moment” बताया। अखिलेश यादव के PDA की परिभाषा को लेकर सवाल पूछे जाने पर अपर्णा यादव ने राजनीतिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “यह एबीवीपी का कार्यक्रम है, इसमें कुछ नहीं कहना।” 2027 में विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी को लेकर सवाल पर अपर्णा यादव ने कहा, “हमारी राष्ट्रीय पार्टी है, जहां से पार्टी डिसाइड करेगी, अपर्णा यादव लड़ेंगी। मैनपुरी से तो अभी नहीं चाह रही हूं मैं। पार्टी जहां से तय करेगी, वहां से लड़ूंगी।” उन्होंने फिलहाल मैनपुरी से चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं जताई, जबकि चुनाव लड़ने के लिए सीट का फैसला पार्टी पर छोड़ा है। --------------------------- यह इंटरव्यू भी पढ़िए- रोहिणी बोलीं- चुनाव लड़ने नहीं, लड़वाने आई हूं, अखिलेश या कांग्रेस नहीं, वाल्मीकियों को हिस्सेदारी देने वाले को समर्थन देंगे स्विट्जरलैंड में 6 साल बिताने के बाद भारत लौटीं रोहिणी घावरी अब अपने वाल्मीकि समाज को राजनीतिक रूप से मजबूत करने की मुहिम में जुटी हैं। डॉक्टरेट की पढ़ाई पूरी करने और स्विट्जरलैंड में 2 साल नौकरी करने के बाद उन्होंने भारत लौटने का फैसला किया। दिल्ली, हरियाणा और मेरठ के बाद वे लखनऊ पहुंचीं। पढ़िए पूरी खबर…
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