फिरोजाबाद में रिटायर्ड प्रधान सहायक से ठगी की कोशिश:खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का इंस्पेक्टर बताया, विदेश भेजने का लगाया आरोप; सवालों से बौखलाया ठग

Oct 08, 2026 - 21:03
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फिरोजाबाद में रिटायर्ड प्रधान सहायक से ठगी की कोशिश:खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का इंस्पेक्टर बताया, विदेश भेजने का लगाया आरोप; सवालों से बौखलाया ठग
फिरोजाबाद के सुहाग नगर निवासी समाज कल्याण विभाग के सेवानिवृत्त प्रधान सहायक से साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करने का प्रयास किया। ठग ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का इंस्पेक्टर बताते हुए उन पर विदेशी खुफिया एजेंसियों को देश की गोपनीय जानकारी भेजने का आरोप लगाया और मुकदमे में फंसाने की धमकी दी। हालांकि, प्रदीप कुमार पांडेय घबराए नहीं और उन्होंने ठग से ही सवाल-जवाब शुरू कर दिए। इससे ठग बौखला गया और गाली-गलौज कर फोन काट दिया। सुहाग नगर सेक्टर-3 निवासी प्रदीप कुमार पांडेय वर्ष 2024 में समाज कल्याण विभाग में प्रधान सहायक के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। बुधवार दोपहर करीब ढाई बजे वह घर पर थे। इसी दौरान उनके मोबाइल पर अज्ञात नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि प्रदीप के नाम पर एक सिम कार्ड जारी हुआ है और उसके जरिए विदेशी खुफिया एजेंसियों को देश की गोपनीय जानकारी भेजी जा रही है। डिजिटल अरेस्ट की धमकी दी प्रदीप ने आरोप का विरोध करते हुए कहा कि उनके पास कोई दूसरा मोबाइल नंबर नहीं है। इस पर कथित इंस्पेक्टर ने उन्हें मुकदमे में फंसाने और डिजिटल अरेस्ट करने की धमकी देना शुरू कर दिया। कुछ देर बातचीत के बाद प्रदीप को कॉल करने वाले के तरीके पर शक हुआ। उन्होंने डरने के बजाय उससे उसका नाम, पद, तैनाती और विभागीय जानकारी पूछनी शुरू कर दी। सवालों से बौखलाया, गाली देकर फोन काटा करीब चार मिनट तक बातचीत चली। प्रदीप के सवालों का जवाब देने के बजाय ठग बौखला गया और गाली-गलौज करने लगा। इसके बाद उसने अचानक फोन काट दिया। संदिग्ध नंबर पर दोबारा संपर्क करने का प्रयास किया गया तो वह बंद मिला। जागरूकता से ठगी से बचे प्रदीप कुमार पांडेय ने घटना की जानकारी परिजनों और परिचितों को दी। उन्होंने बताया कि जागरूकता और संयम के कारण वह साइबर ठग के जाल में फंसने से बच गए। फिलहाल उन्होंने साइबर सेल में लिखित शिकायत नहीं दी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अनजान कॉल पर पुलिस, क्राइम ब्रांच या किसी जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर धमकाने वालों के झांसे में न आएं। किसी भी स्थिति में बिना सत्यापन के कोई रकम न भेजें।

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