फर्जी चोट दिखाकर बीमा क्लेम का खेल:अलीगढ़ में एक डॉक्टर की रिपोर्ट पर 5 मुकदमे, MACT के क्लेम सत्यापन में खुला फर्जीवाड़ा
हादसा हुआ...किसी की मौत हुई, कोई घायल हुआ और फिर शुरू हुआ बीमा क्लेम का खेल। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) में मुआवजा पाने के लिए ऐसे लोगों को भी घायल दिखाने का आरोप है, जिन्हें हादसे में चोट ही नहीं लगी थी। इनके नाम से मेडिकल रिपोर्ट तैयार हुईं और इन्हीं रिपोर्टों को क्लेम की कार्रवाई में इस्तेमाल किया गया। ICICI Lombard General Insurance Company की ओर से MACT मामलों के सत्यापन में ऐसे पांच मामले सामने आने के बाद अब एक ही डॉक्टर की मेडिकल रिपोर्ट कड़ी सामने आई है।
ICICI Lombard के प्रतिनिधि/नियुक्त सत्यापन अधिकारी पांचवीं मंजिल समिट टावर विभूति खंड लखनऊ निवासी जीवन पाल डांगी की शिकायतों पर एसपी सिटी के निर्देश से थाना बन्नादेवी में मंगलवार रात लगातार पांच FIR दर्ज की गईं। सभी मुकदमों में BNS की धारा 318(4), 338, 336(3) और 340(2) लगाई गई हैं। पांचों मामलों में डॉ. सुकुमार यादव का नाम सामने आया है। पुलिस अब यह जांच करेगी कि कथित फर्जी मेडिकल रिपोर्ट किसने तैयार कराईं, MACT में किसने लगाईं और क्लेम की पूरी प्रक्रिया में और कौन-कौन शामिल था।
पहली FIR में ई-रिक्शा हादसे में बिना चोट के क्लेम का आरोप
इस मामले में अरुण कुमार पुत्र मुकेश कुमार, निवासी क्वार्सी, अलीगढ़ और डॉ. सुकुमार यादव, संचालक महादेव हॉस्पिटल, बन्नादेवी, अलीगढ़ को आरोपी बनाया गया है। मामला 2025 से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार 12 नवंबर 2025 को मुकेश कुमार ई-रिक्शा UP81GT0329 चला रहे थे। उनके साथ शिव कुमार पुत्र राजवीर सिंह थे। इसी दौरान टेंपो UP81GT3827 ने ई-रिक्शा में टक्कर मार दी। हादसे में मुकेश कुमार की मौत हो गई, जबकि शिव कुमार को घायल बताया गया।
बीमा कंपनी के सत्यापन में आरोप सामने आया कि शिव कुमार को हादसे में चोट नहीं लगी थी, फिर भी महादेव हॉस्पिटल के लेटरहेड पर उसका मेडिकल परीक्षण कर चोट की रिपोर्ट तैयार की गई। शिकायत में रिपोर्ट पर डॉ. सुकुमार यादव के हस्ताक्षर और मुहर होने की बात कही गई है। आरोप है कि इस रिपोर्ट के आधार पर MACT में बीमा क्लेम का दावा किया गया।
हादसे की FIR अतरौली थाने में 0736/2025 के रूप में दर्ज हुई थी।
उसी हादसे से जुड़ा दूसरा मुकदमा
इस मुकदमे में भी अरुण कुमार पुत्र मुकेश कुमार, निवासी क्वार्सी, अलीगढ़ और डॉ. सुकुमार यादव, महादेव हॉस्पिटल, बन्नादेवी, अलीगढ़ आरोपी हैं। यह मुकदमा भी 2025 से जुड़ा है। शिकायत में आरोप है कि हादसे में वास्तविक रूप से घायल व्यक्ति के अलावा शिव कुमार को भी घायल दिखाया गया और उसके नाम से मेडिकल रिपोर्ट तैयार कराई गई। यानी एक ही हादसे, एक ही MACT केस और एक ही डॉक्टर से जुड़ी रिपोर्ट के आधार पर दो अलग एफआईआर दर्ज हुई हैं। इनके दस्तावेजों में घटनाक्रम काफी हद तक समान है। पुलिस जांच में दोनों मुकदमों की भूमिका और दस्तावेजों का आपसी संबंध भी महत्वपूर्ण रहेगा।
तीसरी FIR में दो लोगों को बिना चोट के घायल दिखाने का आरोप
इस मुकदमे में टिटू पुत्र रमेश चंद्र, निवासी इलियासपुर सरसौल महारावल, थाना बन्नादेवी, लोकेश उर्फ लोकेंद्र पाल पुत्र सूरज पाल, निवासी वेदामई, थाना सासनी, जिला हाथरस और डॉ. सुकुमार यादव, देव हॉस्पिटल, बरौला बाईपास, बन्नादेवी आरोपी हैं। मामला 2025 से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार 25 जनवरी 2025 को टाटा 109 वाहन UP81CT9665 को कैंटर NL01AJ1525 ने टक्कर मारी थी। हादसे में टिटू और लोकेश को घायल बताया गया। ICICI Lombard के सत्यापन में आरोप लगाया गया कि दोनों को चोट नहीं लगी थी, फिर भी देव हॉस्पिटल एंड क्रिटिकल केयर के लेटरहेड पर 25 जनवरी 2025 की मेडिकल रिपोर्ट तैयार की गई। रिपोर्ट पर डॉ. सुकुमार यादव के हस्ताक्षर और मुहर होने की बात शिकायत में कही गई है। हादसे की रिपोर्ट हरदुआगंज थाने में दर्ज हुई थी।
चौथी FIR में तीन घायल बताए, दो को चोट ही नहीं
इस मुकदमे में जफरुद्दीन पुत्र मोहम्मद अली, निवासी गोंडा रोड, अलहदादपुर निवरी, केशोपुर, थाना रोरावर, अलीगढ़, अजय पुत्र महावीर, निवासी माती, अलीगढ़, ईशानचंद्र उर्फ ईशान और डॉ. सुकुमार यादव, देव हॉस्पिटल, बरौला बाईपास, बन्नादेवी, अलीगढ़ आरोपी बनाए गए हैं।
मामला 2023 से संबंधित है। 24 नवंबर 2023 को हुए हादसे की FIR अकराबाद थाने में दर्ज हुई थी।
शिकायत के मुताबिक जफरुद्दीन को वाहन UP13BB1248 की टक्कर से चोट लगी थी। अजय और ईशान को भी हादसे में घायल बताया गया। लेकिन बीमा कंपनी के सत्यापन में आरोप लगाया गया कि जफरुद्दीन को मामूली चोट थी, जबकि अजय और ईशान को चोट नहीं लगी थी। इसके बावजूद तीनों के नाम से देव हॉस्पिटल एंड क्रिटिकल केयर के लेटरहेड पर 24 नवंबर 2023 की मेडिकल रिपोर्ट तैयार कराए जाने का आरोप है। रिपोर्टों को डॉ. सुकुमार यादव से जोड़ा गया है।
पांचवीं FIR में महिला को भी फर्जी चोट दिखाने का आरोप
इस मुकदमे में वसुधा सिंह पत्नी अभिमन्यु सिंह, निवासी क्वार्सी गली नंबर-2, रामघाट रोड, थाना बन्नादेवी, अलीगढ़ और डॉ. सुकुमार यादव, देव हॉस्पिटल, बरौला बाईपास, बन्नादेवी, अलीगढ़ आरोपी हैं। मामला 2025 से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार 14 जनवरी 2025 को वसुधा सिंह अपनी भाभी भूमि के साथ बाजार जा रही थीं। इसी दौरान कार UP81DN8222 की टक्कर से उनके घायल होने की बात सामने आई। इस संबंध में क्वार्सी थाने में FIR दर्ज हुई थी। बीमा कंपनी के सत्यापन में आरोप लगाया गया कि वसुधा सिंह को हादसे में चोट नहीं लगी थी, इसके बावजूद देव हॉस्पिटल के लेटरहेड पर उनका मेडिकल परीक्षण दिखाते हुए रिपोर्ट तैयार की गई और उसे MACT में मुआवजे के दावे में इस्तेमाल किया गया।
ऐसे खुला कथित फर्जीवाड़ा
MACT क्लेमों की जांच, मेडिकल रिपोर्ट का सत्यापन, चोट और हादसे के रिकॉर्ड में अंतर, एक ही डॉक्टर की रिपोर्ट सामने आई, तब यह मामला खुला और सभी मामलों में शिकायत के आधार पर एसपी सिटी के निर्देश पर पांच FIR दर्ज की गईं। जांच में कथित तौर पर मेडिकल रिपोर्टों और हादसे से जुड़े अन्य दस्तावेजों का मिलान किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कुछ मामलों में जिन लोगों को घायल बताया गया था, उनके घायल होने के पर्याप्त आधार नहीं मिले। इसके बाद मेडिकल रिपोर्टों की भूमिका जांच के दायरे में आई। पांचों मामलों में डॉ. सुकुमार यादव की रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस ने अलग-अलग घटनाओं के आधार पर पांच मुकदमे दर्ज किए।
डॉक्टर के खिलाफ पहले भी दर्ज हैं मुकदमे
शिकायतों में डॉ. सुकुमार यादव के खिलाफ पहले हुई स्वास्थ्य विभाग की जांच और मुकदमों का भी उल्लेख किया गया है। शिकायत के मुताबिक PCPNDT के नोडल अधिकारी डॉ. दिनेश खत्री ने उनके मेडिकल रिकॉर्ड का सत्यापन कराया था। CMO जांच में 2025 में डॉ. सुकुमार यादव द्वारा बताई गई MBBS रजिस्ट्रेशन संख्या 1952 उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाई थी। जिसके आधार पर बन्नादेवी, गभाना, इगलास और छतारी बुलंदशहर थानों में डॉ. सुकुमार के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए थे। स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई में उनके अस्पतालों को भी सील किया गया था।
अब जांच का सबसे बड़ा सवाल : क्लेम तक कौन-कौन पहुंचा?
पुलिस जांच अब सिर्फ यह तय करने तक सीमित नहीं रहेगी कि मेडिकल रिपोर्ट असली हैं या फर्जी। जांच का असली सिरा MACT क्लेम तक जाता है। पुलिस को यह देखना होगा कि मेडिकल रिपोर्ट किसने तैयार कराई? डॉक्टर तक कथित क्लेम कराने वाले लोगों की पहुंच कैसे हुई? रिपोर्ट MACT में किसने दाखिल की? क्लेम के लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ? इन पांच मामलों के बीच कोई साझा व्यक्ति या मध्यस्थ है या नहीं? और क्या इसी तरीके से दूसरे हादसों में भी बीमा कंपनियों से क्लेम लेने की कोशिश हुई? एक ही डॉक्टर की मेडिकल रिपोर्ट, अलग-अलग हादसे, अलग-अलग क्लेम और पांच मुकदमे, अब पुलिस जांच इस कथित नेटवर्क की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटेगी। सीओ द्वितीय धनंजय बताते हैं कि जांच में आगे इन सभी सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे।
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