फतेहपुर में नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा:2200 दुर्गा पंडालों में आयोजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन
यूपी के फतेहपुर जिले में नवरात्र पर्व के सातवें दिन शनिवार के दिन मां भगवती के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना पूरे श्रद्धाभाव के साथ की जाएगी।देवी कालरात्रि का यह स्वरूप अत्यंत व्यापक और अनंत माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 'कालरात्रि' शब्द का अर्थ काल अर्थात समय और मृत्यु को जीतने वाली देवी से है। देवी के मुख्यत तीन स्वरूप बताए गए हैं जन्म,पालन और काल। लसंपूर्ण सृष्टि का संयोजन और इसका सुचारू संचालन भगवान इंद्र की कृपा का ही फल माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान शिवजी ने देवी को हास-परिहास या किसी संदर्भ में 'काली' कहकर संबोधित कर दिया था। भगवान शिव द्वारा कहे गए इस शब्द के कारण ही उनका नाम 'काली' या 'कालरात्रि' पड़ा। धार्मिक ग्रंथों में यह उल्लेख मिलता है कि माता काली की विधि-विधान से पूजा और आराधना करने से साधक के लिए सब कुछ सिद्ध हो जाता है और जीवन के तमाम कष्टों व बाधाओं का निवारण होता है। मां कालरात्रि की पूजा के विशेष नियमों और अनुष्ठानों के विषय में बताया गया है कि इस पावन रात्रि को अखंड ज्योति प्रज्वलित करके, काले तिलों से मां का पूजन करना चाहिए। साथ ही देवी के मंत्रों का जाप और तप करने से माता काली अत्यंत प्रसन्न होती हैं। रात्रि काल में मां कालरात्रि के निमित्त यज्ञ और हवन करने से साधक की सभी मनोकामनाएं व मनोरथ सिद्ध एवं पूर्ण होते हैं। माता कालरात्रि अपने भक्तों को अभय प्रदान करती हैं और शुभ फल देने के कारण इन्हें 'शुभंकरी' भी कहा जाता है। वही नवरात्र पर्व के सातवें दिन शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में किशनपुर,धाता,असोथर,हथगाम, हुसैनगंज, विजयीपुर, ललौली,हसवा, में सजे 2200 दुर्गा पंडालों में कलाकारों के द्वारा कार्यक्रम किया जा रहा है।
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