मोदी-जिनपिंग की मुलाकात, सीमा से व्यापार तक क्या बनी बात

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों नेताओं ने सीमा पर शांति, अरुणाचल प्रदेश, ब्रह्मपुत्र नदी, व्यापार, आर्थिक संबंध और आपूर्ति व्यवस्था से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा की।

Sep 12, 2026 - 19:13
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मोदी-जिनपिंग की मुलाकात, सीमा से व्यापार तक क्या बनी बात

दि राइजिंग न्यूज | नई दिल्ली | 12 सितंबर 2026

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और चीन के बीच रिश्तों को लेकर एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 12 सितंबर को द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान दोनों देशों के संबंधों से जुड़े कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान चीन की ओर से मिले समर्थन और सहयोग के लिए राष्ट्रपति शी जिनपिंग को धन्यवाद दिया।

सीमा पर शांति को लेकर भारत का स्पष्ट रुख

भारत और चीन के बीच बातचीत में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर बनी स्थिति प्रमुख मुद्दों में शामिल रही। भारत लंबे समय से यह स्पष्ट करता रहा है कि सीमा पर शांति और स्थिरता दोनों देशों के संबंधों में सुधार की बुनियाद है। भारत का मानना है कि सीमा पर तनाव बना रहने की स्थिति में व्यापार और आर्थिक संबंधों को सामान्य गति देना कठिन होगा। वहीं चीन का रुख रहा है कि सीमा विवाद को दोनों देशों के दूसरे संबंधों से अलग रखकर देखा जाना चाहिए।

अरुणाचल प्रदेश और ताकसिंग क्षेत्र का मुद्दा भी उठा

बैठक में अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के ताकसिंग क्षेत्र में जुलाई के दौरान बने तनाव और उसके बाद हुई सैन्य कमांडर स्तर की बातचीत का मुद्दा भी सामने आया। भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि अरुणाचल प्रदेश देश का अभिन्न हिस्सा है। दूसरी ओर चीन अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों के नाम बदलने को लेकर लगातार आपत्ति जताता रहा है। सीमा के पूर्वी क्षेत्र को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद अब भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।

ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन के बांध को लेकर भारत की चिंता

ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन की ओर से प्रस्तावित विशाल जलविद्युत परियोजना भी दोनों नेताओं की बातचीत में महत्वपूर्ण विषय रही। चीन तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी के ऊपरी हिस्से पर करीब 137 अरब डॉलर की लागत से बड़ी जलविद्युत परियोजना विकसित करने की योजना बना रहा है। भारत को आशंका है कि इस परियोजना का नदी के निचले क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है। भारत पहले भी चीन से इस परियोजना से जुड़ी जानकारी साझा करने की मांग कर चुका है।

मौसम और हिमनदों में बदलाव से बढ़ी चिंता

ब्रह्मपुत्र नदी को लेकर भारत की चिंता केवल बांध परियोजना तक सीमित नहीं है। तिब्बत और आसपास के क्षेत्रों में मौसम में बदलाव तथा हिमनदों में हो रहे परिवर्तन भी भारत के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। नदी के प्रवाह में किसी बड़े बदलाव का असर भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्रों पर पड़ सकता है। ऐसे में भारत चीन के साथ नदी से संबंधित सूचनाओं और पारदर्शिता के मुद्दे को महत्वपूर्ण मानता है।

व्यापार और भारतीय सामान की चीन में पहुंच पर चर्चा

प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को बेहतर बनाने पर भी बातचीत हुई। भारत चाहता है कि उसके सामान और उत्पादों को चीन के बाजार में अधिक अवसर मिलें। इसके साथ ही आपूर्ति व्यवस्था पर अत्यधिक निर्भरता को लेकर भी भारत ने अपनी चिंताएं रखीं। दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को संतुलित और स्थिर बनाने के लिए व्यापारिक बाधाओं को कम करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मशीनरी और उपकरणों की आपूर्ति बना अहम मुद्दा

भारतीय उद्योगों को चीन से मशीनरी, उपकरण और जरूरी कल-पुर्जे हासिल करने में कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। चीन की ओर से कुछ प्रमुख तकनीकों और उपकरणों के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों का असर भी भारतीय उद्योग पर पड़ा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करना आर्थिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण विषय बन गया है। बैठक में इस दिशा में मौजूद अड़चनों को दूर करने पर भी चर्चा होने की बात सामने आई है।

भारतीय कारोबारियों की यात्रा पाबंदियों पर भी बातचीत

बैठक में भारतीय कारोबारियों के लिए यात्रा अनुमति से जुड़ी पाबंदियों और दोनों देशों के बीच कारोबारी माहौल पर भी चर्चा हुई। इलेक्ट्रॉनिक सामान, औद्योगिक उपकरण और सौर उपकरणों जैसे कुछ क्षेत्रों में हाल के समय में कुछ राहत देखने को मिली है। हालांकि कई क्षेत्रों में अब भी सरकारी मंजूरी हासिल करने में कठिनाइयां बनी हुई हैं। भारत चाहता है कि कारोबारियों और उद्योगों के लिए दोनों देशों के बीच काम करना अधिक सहज बनाया जाए।

भारतीय और चीनी कंपनियों के बीच सहयोग से उम्मीद

भारतीय उद्योग जगत में चीन के साथ कुछ नए कारोबारी समझौतों को सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। डिक्सन टेक्नोलॉजीज और वीवो के बीच हालिया साझेदारी को भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया है। ऐसे सहयोग से भारत में विनिर्माण और तकनीकी क्षेत्र को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही इससे दोनों देशों के बीच कारोबारी संबंधों में धीरे-धीरे सुधार का रास्ता खुल सकता है।

मतभेद सुलझाने के लिए स्थायी व्यवस्था पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात का व्यापक उद्देश्य दोनों देशों के बीच मौजूद मतभेदों को बातचीत के माध्यम से नियंत्रित करना और सहयोग के नए रास्ते तलाशना रहा। दोनों पक्षों के बीच यह समझ बनाने पर जोर है कि किसी भी विवाद को पहले से तय व्यवस्थाओं और बातचीत के माध्यम से सुलझाया जाए। भारत के लिए सीमा पर शांति के साथ आर्थिक और व्यापारिक संबंधों में स्थिरता भी महत्वपूर्ण है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच बातचीत इस दिशा में कितना आगे बढ़ती है, इस पर नजर रहेगी।

भारत-चीन संबंधों के लिए क्यों अहम है यह बैठक

प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब दोनों देशों के बीच सीमा, व्यापार और आर्थिक संबंधों को लेकर कई चुनौतियां मौजूद हैं। बैठक से यह संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष संवाद के माध्यम से संबंधों को स्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि सीमा विवाद और रणनीतिक मतभेद जैसे मुद्दे अब भी संवेदनशील बने हुए हैं। ऐसे में इस बातचीत का वास्तविक असर आने वाले महीनों में दोनों देशों के फैसलों और जमीनी स्तर पर उठाए जाने वाले कदमों से स्पष्ट होगा।

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