पंचायत चुनाव समय पर क्यों नहीं…हाईकोर्ट में सुनवाई:हाईकोर्ट ने ओबीसी कमीशन को फटकारा था, आज देंगे विस्तृत रिपोर्ट

Oct 14, 2026 - 10:58
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पंचायत चुनाव समय पर क्यों नहीं…हाईकोर्ट में सुनवाई:हाईकोर्ट ने ओबीसी कमीशन को फटकारा था, आज देंगे विस्तृत रिपोर्ट
यूपी में पंचायत चुनाव समय पर कराने की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल 11 याचिकाओं पर आज बुधवार को सुनवाई होगी। आज ओबीसी कमीशन को अपनी विस्तृत रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश करनी है। साथ ही राज्य सरकार की तरफ से पक्ष रखा जाएगा। 9 अक्टूबर को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई थी। हाईकोर्ट ने ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट पर असंतोष जताते हुए कहा था कि ऐसा लगता है कि कमीशन ने फील्ड में जाकर नहीं बल्कि दफ्तर में बैठकर रिपोर्ट तैयार कर दी है। हाईकोर्ट ने उठाए थे सवाल हाईकोर्ट ने ओबीसी आरक्षण के लिए आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। हाईकोर्ट ने कहा आगरा जिले में 3 लाख से अधिक ओबीसी आबादी है। अखबारों में विज्ञापन के बावजूद केवल 179 लोग आयोग के समक्ष पहुंचे। और उनमें से महज 29 लोगों के बयान दर्ज किए गए। कोर्ट ने आयोग से पूछा कि जातिवार सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पिछड़ेपन का आकलन कैसे किया जा रहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने दशरथ यादव की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। 3 लाख आबादी महज 29 के बयान सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से कहा गया कि 40 जिलों में आंकड़े जुटाने का काम पूरा हो चुका है। और शेष जिलों का काम भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा। कोर्ट ने पाया कि आयोग के समक्ष आने वाले लोगों की संख्या वास्तविक आबादी के मुकाबले बेहद कम है। कोर्ट ने कहा कि आगरा जिले में 3 लाख से अधिक ओबीसी आबादी के बावजूद केवल 179 लोग आयोग के समक्ष पहुंचे और उनमें से महज 29 लोगों के बयान दर्ज किए गए। कोर्ट ने आयोग से पूछा कि जातिवार सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पिछड़ेपन का आकलन कैसे किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि अखबारों में नोटिस प्रकाशित कराने के बावजूद इतने कम लोगों के बयान दर्ज करना पर्याप्त और प्रामाणिक डेटा हासिल करने के लिए उचित नहीं प्रतीत होता। ​सलाहकार समिति की एक भी बैठक नहीं कोर्ट ने रेखांकित किया कि आयोग पिछले लगभग पांच महीनों से यह कार्य कर रहा है, लेकिन आयोग के गठन के बाद बनाई गई सलाहकार समिति की अब तक आयोग के साथ एक भी बैठक नहीं हुई है। ​खंडपीठ ने कहा कि वह यह समझना चाहती है कि आयोग छह महीने की तय समयसीमा में पूरे प्रदेश का कार्य किस तरह पूरा करने की योजना बना रहा है। कोर्ट ने आयोग से स्पष्ट करने को कहा है कि उसने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों डॉ. के. कृष्ण मूर्ति बनाम भारत संघ और सुरेश महाजन बनाम मध्य प्रदेश राज्य के तहत 'ट्रिपल टेस्ट' की शर्तों के अनुसार ओबीसी जातियों के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पिछड़ेपन का एम्पिरिकल डेटा (अनुभवजन्य आंकड़े) किस प्रकार जुटाया है और वह इसका आकलन कैसे करेगा। ​कोर्ट ने आयोग को आगरा जिले में किए गए कार्य का विस्तृत विवरण 14 अक्टूबर को दिन में 12 बजे तक प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। पंचायत चुनाव की 11 याचिकाओं को कंपाइल कर सुनवाई यूपी में पंचायत चुनाव समय पर कराने की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल 11 याचिकाओं पर लगातार सुनवाई चल रही है। हाईकोर्ट ने ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट पर असंतोष जताया। कोर्ट ने कहा ऐसा लगता है कि कमीशन ने फील्ड में जाकर नहीं बल्कि दफ्तर में बैठकर रिपोर्ट तैयार कर दी है। अब जानिए क्या है पूरा मामला इम्तियाज हुसैन की याचिका में मांग की गई है कि राज्य निर्वाचन आयोग को पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले पूरी चुनाव प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से संपन्न करने का विस्तृत कार्यक्रम जारी रखने का निर्देश दिया जाए। याचिका में कहा गया है कि पंचायत चुनाव 26 मई 2026 या उससे पहले हो जाने चाहिए। इस पर हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से एक हलफनामा मांगा था। कोर्ट ने पूछा था कि आयोग भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243 ई के जनादेश के अनुसार चुनाव संपन्न कराने की स्थिति में है या नहीं। कोर्ट का कहना था कि राज्य निर्वाचन आयोग से यह अपेक्षा की जाती है कि चुनाव कराने का पूरा कार्यक्रम अंतिम रूप देकर अगली सुनवाई की तारीख से पहले रिकॉर्ड पर लाया जाए। हालांकि, उसके बाद से इस याचिका पर सुनवाई नहीं हो पा रही है। यूपी राज्य निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा इलाहाबाद हाईकोर्ट में पंचायत चुनाव को लेकर एक बार फिर नहीं हो सकी। लंच बाद मामले की सुनवाई होनी थी लेकिन अत्याधिक केसों की वजह से मामला नहीं सुना जा सका। अब सुनवाई की नई तारीख आएगी। हाईकोर्ट के जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डिवीजन बेंच को मामले की सुनवाई करनी है। 17 मार्च को याचिका दाखिल होने के बाद हाईकोर्ट ने यूपी राज्य निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा था। पूछा था कि समयसीमा पर चुनाव क्यों नहीं हो सकते। 17 मार्च के बाद मामले की सुनवाई 25 मार्च को होनी थी लेकिन किन्हीं कारणों सुनवाई टल गई थी। 17 मार्च को हाईकोर्ट ने कहा था- ‘पंचायत चुनाव समय सीमा के भीतर चुनाव क्यों नहीं करवाए जा रहे हैं? संवैधानिक समयसीमा के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी कर पाएंगे या नहीं?’ यह सवाल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी राज्य निर्वाचन आयोग से पूछा था। कोर्ट ने ग्राम पंचायत चुनाव- 2026 को लेकर आयोग से चुनाव की तैयारियों की स्थिति साफ करने को कहा है। राज्य सरकार की जिम्मेदारी बताई याचिकाकर्ता इम्तियाज हुसैन ने कोर्ट में दलील दी कि संविधान के अनुच्छेद 243E के अनुसार पंचायत का कार्यकाल उसकी पहली बैठक की तारीख से अधिकतम 5 साल तक ही हो सकता है, इससे ज्यादा नहीं। इसलिए समय पर चुनाव कराना जरूरी है। वहीं, राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से दलील दी गई कि यूपी पंचायत राज अधिनियम 1947 की धारा 12-BB के अनुसार प्रधान के सामान्य चुनाव या उपचुनाव की तिथि तय करने की अधिसूचना जारी करना राज्य सरकार का दायित्व है। यह अधिसूचना राज्य निर्वाचन आयोग के परामर्श से जारी की जाती है। सरकार और संगठन भी नहीं चाहते समय पर चुनाव हों भाजपा के सूत्रों का कहना है कि पार्टी और सरकार भी समय पर चुनाव कराने के पक्ष में नहीं है। विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव में कई तरह के राजनीतिक जोखिम हैं। पहला तो गांवों में पार्टी के ही कार्यकर्ताओं के बीच राजनीतिक रंजिश बढ़ जाएगी। दूसरा प्रत्याशी चयन नहीं होने से नाराज पार्टी के कार्यकर्ता दूसरे दलों से टिकट लेकर पार्टी को कमजोर कर सकते हैं। जिला पंचायत सदस्य और क्षेत्र पंचायत सदस्य के चुनाव में यदि पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहता, तो इसका सीधा असर विधानसभा चुनाव पर भी पड़ेगा। 2021 में भी पंचायत चुनाव के पहले चरण का अनुभव योगी सरकार और भाजपा के लिए अच्छा नहीं था। उसका डैमेज कंट्रोल करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। पंचायतराज विभाग की तैयारी नहीं राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से पंचायतीराज विभाग को पत्र लिखा था कि पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण निर्धारण कर सूची सौंपी जाए। आरक्षण का निर्धारण करने के लिए पंचायती राज विभाग को एक कमेटी बनानी है। कमेटी ही 2021 और 2015 के पंचायत आरक्षण के आधार पर 2026 के लिए आरक्षण निर्धारित करेगी। आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया में करीब 2 महीने का समय लगता है, लेकिन विभाग की ओर से अब तक कमेटी का गठन करने की कवायद भी शुरू नहीं की गई है। विभाग के उच्च पदस्थ अधिकारी ने भी संकेत दिए हैं कि पंचायत चुनाव की फिलहाल कोई तैयारी नहीं है। सरकार में भी उच्च स्तर से इसके लिए कोई संकेत नहीं मिला है।

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