प्राकृतिक संसाधनों के सही इस्तेमाल पर जोर:प्रयागराज में 'एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य' गोष्ठी, मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य पर चर्चा
आरोग्य भारती एवं विश्व आयुर्वेद मिशन की ओर से बुधवार को आईसीएफआरई पारिस्थितिकी पुनर्वास केंद्र प्रयागराज में ‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य मानव, पशु एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य में सामंजस्य’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी में प्रकृति, जीव-जंतुओं और मानव स्वास्थ्य के बीच गहरे संबंधों पर मंथन किया गया। साथ ही प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता आईसीएफआरई के निदेशक डॉ. संजय सिंह ने की। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि, जीबी पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान प्रयागराज के निदेशक प्रो. (डॉ.) वाईपी सिंह ने कहा कि मानव स्वास्थ्य को पर्यावरण से अलग करके नहीं देखा जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वच्छ जल, शुद्ध वायु, जैव विविधता और संतुलित पारिस्थितिकी मानव जीवन के दीर्घकालिक अस्तित्व के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने प्रकृति के संरक्षण को एक स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य की असली आधारशिला बताया। विशिष्ट अतिथि राजकीय यूनानी चिकित्सा महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. वसीम अहमद ने कहा कि आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा पद्धतियां हमेशा से प्रकृति और स्वास्थ्य के बीच के गहरे और अटूट संबंध को महत्व देती आई हैं। एक स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए यह अनिवार्य है कि हम अपने पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करें। विश्व आयुर्वेद मिशन के अध्यक्ष एवं समन्वयक प्रो. (डॉ.) जीएस तोमर ने कहा कि ‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य’ का यह विचार केवल एक अवधारणा नहीं, बल्कि आज के समय की सबसे बड़ी और अनिवार्य आवश्यकता है। मनुष्य, पशु और प्रकृति एक-दूसरे से इस तरह जुड़े हैं कि किसी एक के स्वास्थ्य पर पड़ने वाला प्रतिकूल प्रभाव अंततः पूरे पारिस्थितिक तंत्र को प्रभावित करता है। अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए डॉ. संजय सिंह ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीवों की सुरक्षा और मानव स्वास्थ्य इन तीनों को एक साथ लेकर चलना ही स्थायी विकास (Sustainable Development) का वास्तविक मार्ग है। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और जनसामान्य के बीच पर्यावरणीय स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और अधिक बढ़ाने पर विशेष बल दिया।
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