रूस चुनाव में पुतिन समर्थित पार्टी की बड़ी जीत, 355 सीटें हासिल

रूस के संसदीय चुनाव में पुतिन समर्थित यूनाइटेड रशिया पार्टी ने 450 में से 355 सीटें जीतकर बहुमत बरकरार रखा है। पार्टी को 95 प्रतिशत से अधिक मतों की गिनती के बाद करीब 57.83 प्रतिशत वोट मिले। यह यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस का पहला संसदीय चुनाव था, जिसमें विपक्षी दलों की भागीदारी को लेकर भी सवाल उठे।

Sep 21, 2026 - 15:02
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रूस चुनाव में पुतिन समर्थित पार्टी की बड़ी जीत, 355 सीटें हासिल

दि राइजिंग न्यूज़ | मॉस्को | 21 सितंबर 2026

रूस के संसदीय चुनाव में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के समर्थन वाली यूनाइटेड रशिया पार्टी ने 450 में से 355 सीटें जीतकर संसद में अपना बहुमत बरकरार रखा है। केंद्रीय निर्वाचन आयोग के अनुसार 95 प्रतिशत से अधिक मतों की गिनती के बाद पार्टी को लगभग 57.83 प्रतिशत मत मिले हैं। यह चुनाव यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस में हुआ पहला संसदीय चुनाव था और इसके दौरान विपक्षी दलों की भागीदारी को लेकर भी सवाल उठे।

यूनाइटेड रशिया ने जीतीं 355 सीटें

रूस की 450 सदस्यीय राज्य ड्यूमा के चुनाव में यूनाइटेड रशिया ने 355 सीटों पर जीत दर्ज की है। केंद्रीय निर्वाचन आयोग के अनुसार पार्टी को दलों की सूची के आधार पर लगभग 57.83 प्रतिशत मत मिले। इसके अलावा एकल निर्वाचन क्षेत्रों में भी यूनाइटेड रशिया के उम्मीदवारों ने बड़ी संख्या में सीटें जीतीं, जिससे पार्टी को संसद में संवैधानिक बहुमत हासिल हुआ।

2021 के मुकाबले बढ़ा सीटों का आंकड़ा

पिछले संसदीय चुनाव में यूनाइटेड रशिया ने राज्य ड्यूमा की 450 में से 324 सीटें जीती थीं। इस बार पार्टी का आंकड़ा बढ़कर 355 सीटों तक पहुंच गया है। केंद्रीय निर्वाचन आयोग के अनुसार 2021 में पार्टी को दलों की सूची के तहत लगभग 49.8 प्रतिशत मत मिले थे, जबकि इस बार यह आंकड़ा 57 प्रतिशत से अधिक रहा।

पुतिन की पार्टी नहीं है यूनाइटेड रशिया

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूनाइटेड रशिया के औपचारिक सदस्य नहीं हैं, लेकिन पार्टी लंबे समय से उनकी सरकार और नीतियों का समर्थन करती रही है। पुतिन वर्ष 2008 से 2012 तक पार्टी के अध्यक्ष रहे थे। हालांकि उस समय भी वे पार्टी के औपचारिक सदस्य नहीं थे और बाद में दिमित्री मेदवेदेव ने पार्टी की अध्यक्षता संभाली।

यूक्रेन युद्ध के बाद पहला संसदीय चुनाव

यह चुनाव रूस द्वारा 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण स्तर पर सैन्य कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद पहला संसदीय चुनाव था। पुतिन ने चुनाव को यूक्रेन में लड़ रहे रूसी सैनिकों के समर्थन से भी जोड़ा था। चुनाव के दौरान यूक्रेन के कब्जे वाले क्षेत्रों में मतदान कराए जाने को लेकर यूक्रेन ने आपत्ति जताई है।

विपक्षी दलों की भागीदारी पर उठे सवाल

रूस के इस चुनाव में विपक्षी दलों और उम्मीदवारों की भागीदारी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठे हैं। अमेरिकी समाचार एजेंसी के अनुसार युद्ध का विरोध करने वाली याब्लोको पार्टी को संघीय स्तर की मतपत्र सूची से बाहर कर दिया गया था। कई विपक्षी नेताओं और उम्मीदवारों को भी चुनाव लड़ने से रोके जाने की खबरें सामने आईं।

मतदान के दौरान यूक्रेन के ड्रोन हमले

रूस में चुनाव के अंतिम दिन यूक्रेन की ओर से बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए जाने की खबर सामने आई। एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार यूक्रेन ने रूसी क्षेत्र में 1,000 से अधिक ड्रोन भेजे, जिनमें बड़ी संख्या में ड्रोन मॉस्को की ओर भी भेजे गए। रूस के अधिकारियों ने कई ड्रोन को मार गिराने का दावा किया, जबकि हमलों के कारण कुछ स्थानों पर नुकसान और जनहानि की भी सूचना मिली।

मॉस्को में भी ड्रोन हमलों का असर

चुनाव के अंतिम दिन मॉस्को और आसपास के इलाकों को भी ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा। रूसी अधिकारियों के अनुसार राजधानी की ओर बड़ी संख्या में ड्रोन भेजे गए थे। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ जब देश में संसदीय चुनाव की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में थी।

चुनाव परिणाम का रूस की संसद पर असर

355 सीटों के साथ यूनाइटेड रशिया ने राज्य ड्यूमा में संवैधानिक बहुमत बरकरार रखा है। 450 सदस्यीय सदन में संवैधानिक बहुमत के लिए 301 सीटों की आवश्यकता होती है। इस बहुमत के कारण सरकार समर्थित दल को संसद में कानूनों और संवैधानिक बदलावों से जुड़े मामलों में मजबूत स्थिति हासिल रहती है।

रूस की राजनीति में यूनाइटेड रशिया का दबदबा

यूनाइटेड रशिया लंबे समय से रूस की सबसे प्रमुख सत्तारूढ़ पार्टी रही है। इस चुनाव में भी पार्टी ने दलों की सूची और एकल निर्वाचन क्षेत्रों दोनों में बड़ी संख्या में सीटें हासिल कीं। केंद्रीय निर्वाचन आयोग के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार पार्टी के उम्मीदवार 225 एकल निर्वाचन क्षेत्रों में से 208 में आगे रहे थे, जिसके बाद कुल सीटों का आंकड़ा 355 तक पहुंचा।

चुनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

रूस के चुनाव में विपक्ष की सीमित भागीदारी और यूक्रेन के कब्जे वाले क्षेत्रों में मतदान को लेकर आलोचनाएं सामने आई हैं। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार कई विपक्षी नेताओं को चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखा गया और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षण को लेकर भी सवाल उठे। रूस की ओर से चुनाव प्रक्रिया को अपने कानूनों और संवैधानिक व्यवस्था के तहत आयोजित किया गया बताया गया है।

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