प्रसूता की मौत मामले में अस्पताल संचालक-झोलाछाप को उम्रकैद:2017 में बिना सहमति ऑपरेशन के बाद हुई थी मौत; तत्कालीन DM-CMO को भी नोटिस
अमरोहा कोर्ट ने गलत ऑपरेशन से प्रसूता की मौत के मामले में अपंजीकृत अस्पताल संचालक विल्सन और झोलाछाप मुस्तफा को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों पर 11-11 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अपर जिला न्यायाधीश विशेष (एमपी-एमएलए) तृतीय की अदालत ने शनिवार को दोनों को दोषी मानते हुए यह फैसला सुनाया। मामला 3 अक्टूबर 2017 का है। रहरा में विल्सन 'युग मेडिकल सेंटर' नाम से अपंजीकृत अस्पताल चलाता था। नेम सिंह अपनी पत्नी रूबी को प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल लेकर पहुंचे थे। आरोप के मुताबिक, विल्सन ने रूबी को सामान्य प्रसव के लिए भर्ती किया। बाद में ऑपरेशन के लिए झोलाछाप मुस्तफा को बुलाया गया। रात करीब 12 बजे दोनों ने परिवार की सहमति के बिना रूबी का ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के तुरंत बाद उसकी मौत हो गई। पति ने दर्ज कराया था गैरइरादातन हत्या का केस रूबी की मौत के बाद उसके पति नेम सिंह ने विल्सन और मुस्तफा के खिलाफ गैरइरादातन हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों को दोषी माना और उम्रकैद की सजा सुनाई। तत्कालीन DM और CMO को भी नोटिस अदालत ने मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल और सीएमओ डॉ. ज्ञान सिंह को भी नोटिस जारी किया है। आरोप है कि अवैध अस्पतालों पर रोक लगाने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया गया। अदालत के नोटिस के बाद इस पहलू पर भी कार्रवाई की स्थिति सामने आएगी।
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