प्रयागराज के तीनों शक्तिपीठों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़:कहीं पालने की पूजा तो कहीं प्राचीन प्रतिमा, तीनों की अलग मान्यता
प्रयागराज में शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर संगम नगरी के प्रमुख देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। मां अलोप शंकरी, मां कल्याणी देवी और मां ललिता देवी के दर्शन के लिए सुबह से ही भक्त मंदिरों में पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु माता को नारियल, चुनरी और फूल-माला चढ़ाकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं। नवरात्रि के चलते तीनों मंदिरों में विशेष पूजा-पाठ, श्रृंगार और आरती की जा रही है। मंदिरों में माता के जयकारों से माहौल भक्तिमय बना हुआ है। मां अलोपशंकरी मंदिर में पालने की पूजा अलोपीबाग स्थित मां अलोप शंकरी मंदिर प्रयागराज के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां माता सती के शरीर का एक अंग गिरकर अदृश्य हो गया था। इसी कारण मंदिर का नाम अलोप शंकरी पड़ा। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां माता की कोई पारंपरिक मूर्ति नहीं है, बल्कि लकड़ी के पालने की पूजा की जाती है। भक्त पालने के दर्शन कर माता से अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना करते हैं।
मां कल्याणी देवी मंदिर की मूर्ति प्राचीन कल्याणी देवी मोहल्ले में स्थित मां कल्याणी देवी मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस स्थान का संबंध माता सती से है। मंदिर में स्थापित मां कल्याणी देवी की प्रतिमा लगभग 1500 वर्ष पुरानी बताई जाती है। नवरात्रि में यहां बड़ी संख्या में भक्त पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और माता का आशीर्वाद लेते हैं। मां ललिता देवी मंदिर का भी विशेष महत्व मीरापुर क्षेत्र में स्थित मां ललिता देवी मंदिर को भी प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस स्थान का संबंध माता सती के हाथ की उंगलियों से है। मां ललिता देवी को शक्ति और सौंदर्य की प्रतीक माना जाता है। मंदिर में नवरात्रि के दौरान विशेष पूजा और आरती होती है। नवरात्रि के अवसर पर तीनों शक्तिपीठों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ गई है। भक्त माता के दर्शन कर सुख-शांति और खुशहाली की कामना कर रहे हैं। इन मंदिरों की धार्मिक मान्यताएं प्रयागराज की प्राचीन परंपरा और आस्था को दर्शाती हैं।
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