प्रयागराज में मां अलोप शंकरी के दरबार में उमड़े श्रद्धालु:बच्चों का मुंडन कराकर वेदी से स्पर्श कराया, सुख-समृद्धि की कामना की
शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन मंगलवार को प्रयागराज के अलोपीबाग स्थित मां अलोप शंकरी मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। भक्तों ने लाल चुनरी, नारियल और फूल चढ़ाकर परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की। मंदिर परिसर में दिनभर भक्ति का माहौल बना रहा। नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा होती है। इस मौके पर बच्चों का मुंडन कराने वाले परिवारों के साथ नवविवाहित जोड़े भी मंदिर पहुंचे और माता से सुखी जीवन का आशीर्वाद मांगा। पालने की पूजा होती है, मूर्ति नहीं मां अलोप शंकरी मंदिर की खास पहचान है कि यहां देवी की पारंपरिक मूर्ति के बजाय पालने की पूजा की जाती है। इसी वजह से यह शक्तिपीठ देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। नवरात्रि के दौरान यहां दूर-दराज से लोग दर्शन करने पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, सभी शक्तिपीठों की यात्रा के बाद मां अलोप शंकरी के दरबार में अंतिम आशीर्वाद लिया जाता है। श्री महाविद्या के पीठों में शामिल इस शक्तिपीठ को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देने वाला माना जाता है। पहले मुंडन के बाद वेदी से स्पर्श कराते हैं बच्चे मंदिर में परिवार की पहली संतान के जन्म के बाद बच्चे का पहला मुंडन संस्कार कराने की परंपरा है। इसके बाद बच्चे को मंदिर की वेदी से स्पर्श कराया जाता है। मंगलवार को भी कई परिवार अपने बच्चों को वेदी से स्पर्श कराकर माता का आशीर्वाद लेते नजर आए। मान्यता है कि इससे बच्चे पर मां भगवती की कृपा बनी रहती है। मंदिर में नवविवाहित जोड़े भी पहुंचते हैं। वे अपने दांपत्य जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। श्रद्धा के अनुसार मिलता है आशीर्वाद मंदिर के महंत यमुना पुरी जी के अनुसार, मां अलोप शंकरी के दरबार में आने वाले भक्तों की श्रद्धा और भावना के अनुरूप माता उन्हें सुख, समृद्धि और प्रसन्नता का आशीर्वाद देती हैं। इसी विश्वास के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु नवरात्रि में यहां दर्शन-पूजन करने पहुंचते हैं।
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