प्रयागराज में नवरात्रि पर 357 पंडालों में विराजेंगी मां दुर्गा:सुरक्षा के लिए पुलिस-PAC तैनात, ड्रोन-CCTV से निगरानी; महिला पुलिस और QRT भी रहेंगी
प्रयागराज में शारदीय नवरात्रि की तैयारियां पूरी हो गई हैं। शहर में जगह-जगह भव्य पंडाल सजाए जा रहे हैं। देवी मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की तैयारी है। 11 अक्टूबर से शुरू हो रहे नवरात्रि पर्व को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। शहर में करीब 357 स्थानों पर दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। वहीं, रामलीला मैदानों में मंचन देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। भीड़भाड़ वाले बाजारों, पूजा पंडालों और मंदिरों के आसपास पुलिस, पीएसी और आरएएफ की तैनाती की गई है। सुरक्षा के लिए ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी होगी। इसके अलावा क्विक रिस्पांस टीम (QRT), महिला पुलिस और गश्ती दल भी तैनात रहेंगे। अलोपी देवी, कल्याणी और ललिता देवी मंदिरों पर विशेष इंतजाम डीसीपी सिटी सागर जैन ने वीडियो जारी कर लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और सुरक्षा व्यवस्था का पालन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि या सूचना की जानकारी तत्काल पुलिस को दें। डीसीपी के मुताबिक, कटरा रामलीला मैदान और दारागंज समेत कई इलाकों में रामलीला देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। रात तक महिलाओं और बच्चों की आवाजाही बनी रहती है। रामदल, हनुमान दल समेत अन्य जुलूसों को देखते हुए भी सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। पुलिस अधिकारी रामलीला कमेटियों, पीस कमेटियों और अन्य संगठनों के पदाधिकारियों के संपर्क में हैं। नवरात्रि के दौरान सभी अधिकारियों को गश्त करने के निर्देश दिए गए हैं। थाना प्रभारी अपनी फोर्स के साथ पंडालों और मंदिरों के आसपास मौजूद रहेंगे। अलोपी देवी, कल्याणी देवी और ललिता देवी मंदिरों के आसपास विशेष व्यवस्था की गई है। एंटी रोमियो स्क्वॉड, QRT और गश्ती टीमों की भी ड्यूटी लगाई गई है। कटरा रामलीला में 10 अक्टूबर से मंचन कटरा रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों के मुताबिक, यहां रामलीला की शुरुआत पितृपक्ष की एकादशी पर रावण की शोभायात्रा से होती है। इस वर्ष 10 अक्टूबर से रावण जन्म प्रसंग के साथ रामलीला का मंचन शुरू हुआ। शोभायात्रा में रावण चांदी के सिंहासन और मंदोदरी चांदी की चौकी पर सवार होकर शामिल हुईं। कटरा रामलीला कमेटी के अनुसार, पौराणिक मान्यता है कि त्रेतायुग में महर्षि भरद्वाज का आश्रम वर्तमान कटरा क्षेत्र में था। इसी मान्यता के आधार पर रावण को महर्षि भरद्वाज का नाती और कटरा को उनका ननिहाल माना जाता है। इसी कारण यहां रावण को केवल अधर्म के प्रतीक के रूप में नहीं, बल्कि ऋषिपुत्र, प्रकांड विद्वान, महान तपस्वी और पराक्रमी के रूप में भी सम्मान दिया जाता है। कमेटी दशहरे पर रावण का पुतला दहन नहीं करती। रामलीला में रावण के ज्ञान, तपस्या और पराक्रम से जुड़े पक्षों को प्रमुखता दी जाती है। चांदी के सिंहासन पर हाथी से निकली रावण की शोभायात्रा कमेटी के मुताबिक, पितृपक्ष की एकादशी पर महर्षि भरद्वाज आश्रम में मंत्रोच्चार के साथ रावण की पूजा की जाती है। रामदल से पहले रावण की शोभायात्रा निकाली जाती है। इस वर्ष 6 अक्टूबर को रावण हाथी पर रखे चांदी के सिंहासन पर सवार होकर निकले। उनकी पत्नी मंदोदरी चांदी की चौकी पर बैठीं। ब्राह्मण कलाकार ही निभाते हैं रावण का किरदार कटरा रामलीला में रावण की भूमिका निभाने के लिए ब्राह्मण कलाकार का चयन किया जाता है। कमेटी की परंपरा के अनुसार, कलाकार का आचरण सात्विक होना चाहिए। उसे मांस और मदिरा का सेवन न करने तथा भविष्य में भी इनसे दूर रहने की शपथ लेनी होती है। इन शर्तों पर खरा उतरने वाले कलाकार को ही रावण की भूमिका दी जाती है। रावण वध के बाद श्रीराम ने किया था शिवलिंगों का अभिषेक कमेटी से जुड़ी पौराणिक मान्यता के अनुसार, कुबेर लंकापति रावण के भाई और महर्षि भरद्वाज उनके नाना थे। मान्यता है कि रावण वध के बाद जब श्रीराम प्रयाग पहुंचे तो महर्षि भरद्वाज ने ब्रह्महत्या के दोष का हवाला देते हुए उन्हें आशीर्वाद देने से इनकार कर दिया। इसके बाद ब्रह्महत्या के दोष से मुक्ति के लिए श्रीराम ने सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंगों का अभिषेक किया। इसके बाद उन्हें महर्षि भरद्वाज का आशीर्वाद मिला। कटरा की रामलीला में इसी पौराणिक मान्यता और रावण के विद्वान स्वरूप को विशेष महत्व दिया जाता है।
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