प्रयागराज में UPTET अभ्यर्थियों का प्रदर्शन:OMR रिजेक्शन-नॉर्मलाइजेशन को लेकर नारेबाजी की,छात्रों की मांग-संशोधित रिजल्ट जारी हो
प्रयागराज में यूपीटीईटी-2026 के परिणाम में ओएमआर शीट रिजेक्शन और नॉर्मलाइजेशन को लेकर अभ्यर्थियों ने सोमवार को प्रदर्शन किया। अभ्यर्थियों ने पत्थर गिरजाघर स्थित धरना स्थल पर संशोधित परिणाम जारी करने और प्रभावित अभ्यर्थियों को न्याय देने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ओएमआर करेक्शन के नाम पर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का परिणाम रिजेक्ट किया गया है। वहीं, नॉर्मलाइजेशन के कारण कई ऐसे अभ्यर्थी भी फेल हो गए, जो कच्चे अंकों के आधार पर उत्तीर्ण होने का दावा कर रहे हैं। अभ्यर्थियों ने इन दोनों मामलों में दोबारा समीक्षा कर संशोधित परिणाम जारी करने की मांग की। ओएमआर रिजेक्शन पर उठाए सवाल अभ्यर्थियों का कहना है कि रोल नंबर, प्रश्नपत्र पुस्तिका संख्या या अन्य कॉलम में मानवीय भूल के कारण ओएमआर शीट रिजेक्ट कर दी गईं। उनका तर्क है कि यदि अभ्यर्थी ने प्रश्नों के उत्तर सही दिए हैं और केवल गोला भरने में गलती हुई है, तो उसे परिणाम से बाहर नहीं किया जाना चाहिए। सत्येंद्र यादव ने कहा कि सीटीईटी में इस तरह के मामलों में सुधार कर अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण किए जाने का दावा किया जाता है, जबकि यूपीटीईटी में आयोग राहत देने से इनकार कर रहा है। उन्होंने इसे आयोग का दोहरा रवैया बताया। अधिकारियों से वार्ता पर असंतोष छात्र संतोष यादव ने बताया कि आयोग के अधिकारी अभ्यर्थियों से मिलने पहुंचे, लेकिन उन्हें कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। उनके अनुसार, अधिकारी केवल अभ्यर्थियों की बात सुनकर उसे आयोग के अध्यक्ष तक पहुंचाने की बात कह रहे हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि अध्यक्ष स्तर से सुधार नहीं किए जाने की जानकारी दी गई है। उन्होंने कहा कि जब तक मांगों पर निर्णय नहीं होता, धरना जारी रहेगा और अभ्यर्थी धरना स्थल से नहीं हटेंगे। प्रमाण पत्र में सुधार पर भी सवाल अभ्यर्थियों ने कहा कि आयोग ने सफल अभ्यर्थियों के नाम, माता-पिता के नाम और जन्मतिथि जैसी गलतियों में सुधार की अनुमति देने की बात कही है। इसके लिए निर्धारित शुल्क भी लिया जाएगा। अभ्यर्थियों का सवाल है कि जब प्रमाण पत्र में मानवीय भूल सुधारने की अनुमति दी जा सकती है, तो ओएमआर भरने में हुई मामूली गलती के कारण रिजेक्ट अभ्यर्थियों को राहत क्यों नहीं दी जा रही। नॉर्मलाइजेशन खत्म करने की मांग प्रदर्शनकारियों ने नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया के कारण अभ्यर्थियों के अंकों में काफी अंतर आया है। यादव ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई अभ्यर्थी 100 प्रश्न हल करके आता है, तो नॉर्मलाइजेशन के बाद उसके अंक घटाकर उसे न्यूनतम उत्तीर्ण अंक से नीचे किया जा सकता है। उन्होंने आयोग से नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और प्रभावित अभ्यर्थियों के अंकों की दोबारा जांच करने की मांग की। मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। हालांकि, आयोग की ओर से पहले जारी निर्णय में ओएमआर रिजेक्शन और नॉर्मलाइजेशन से जुड़ी आपत्तियों को खारिज किया जा चुका है। आयोग ने प्रमाण पत्र में नाम, जन्मतिथि और अन्य विवरणों की त्रुटियों में सुधार की सुविधा देने पर सहमति जताई थी।
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