प्रयागराज रामलीला में मेघनाद-लक्ष्मण युद्ध...VIDEO:लक्ष्मण को लगा बाण, हनुमान लाए संजीवनी;रावण के पुत्र का हुआ वध

Oct 20, 2026 - 07:17
0
प्रयागराज रामलीला में मेघनाद-लक्ष्मण युद्ध...VIDEO:लक्ष्मण को लगा बाण, हनुमान लाए संजीवनी;रावण के पुत्र का हुआ वध
प्रयागराज के पत्थरचट्‌टी रामलीला में सोमवार देर रात मेघनाद-लक्ष्मण का महायुद्ध का आयोजन किया गया। जिसमें ‘कथा रामराज की’ प्रसंग में राम के दूत अंगद का रावण के दरबार में प्रवेश और उनके अद्भुत बल का प्रसंग दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया। इसके बाद कुम्भकर्ण और मेघनाद के युद्ध, लक्ष्मण की संज्ञा शून्य होना, संजीवनी बूटी लाने का प्रसंग तथा मेघनाद वध तक की घटनाओं का मंचन किया गया। इस प्रसंग में रावण पुत्र मेघनाद का किरदार प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता सुदेश बेरी ने निभाया। अब पढ़िए रामराज की कथा… रावण दरबार में अंगद का दम कथा के अनुसार, अंगद रावण के दरबार में पहुंचते हैं। रावण उनका परिचय पूछता है, तो अंगद अपने पिता बालि का नाम लेकर उसे बालि की शक्ति की याद दिलाते हैं, जिससे रावण को संकोच होता है। रावण अपने बल का बखान करते हुए कहता है कि राम के दल में उससे युद्ध करने योग्य कोई वीर नहीं है। इस पर अंगद पृथ्वी पर अपना पैर जमा देते हैं और चुनौती देते हैं कि यदि रावण का कोई वीर उनका पैर हटा दे, तो राम लंका छोड़कर वापस चले जाएंगे और वे सीता माता को वहीं छोड़ देंगे। रावण के सभी वीर एक-एक कर बल लगाते हैं, पर कोई अंगद का पैर तिलभर भी नहीं हिला पाता। अंत में जब स्वयं रावण उठता है, तो अंगद अपना पैर हटा लेते हैं और वापस लौट आते हैं। कुम्भकर्ण और मेघनाद का युद्ध रावण बहुत प्रयास के बाद अपने भाई कुम्भकर्ण को जगाता है और उसे सारा वृत्तांत बताता है। कुम्भकर्ण सीता हरण की निंदा करता है, पर युद्ध के लिए तैयार हो जाता है। युद्धभूमि में वह राम की सेना पर कहर ढाता है और अंततः राम के हाथों वध होता है। इसके बाद रावण की आशा का एकमात्र केंद्र मेघनाद बचते हैं। सुदेश बेरी के अभिनय में मेघनाद का यह किरदार युद्धभूमि में लक्ष्मण से घोर संघर्ष करता है और अंततः वह शक्ति फेंकता है, जो सीधे लक्ष्मण के हृदय पर लगती है। संज्ञा शून्य होकर लक्ष्मण धराशायी हो जाते हैं और राम की सेना में हाहाकार मच जाता है। संजीवनी और लक्ष्मण का स्वास्थ्य हनुमान घायल लक्ष्मण को राम के पास ले आते हैं। उपचार के लिए वे लंका से वैद्य राज सुषेण को उनके घर समेत ले आते हैं। वैद्य सुषेण द्रोणाचल पर्वत पर उगी संजीवनी बूटी लाने की सलाह देते हैं, पर शर्त रखते हैं कि वह सूर्यास्त से पहले लाई जाए। हनुमान पूर्ण वेग से उड़ते हैं। रास्ते में तालाब किनारे राम-राम जपते मुनि से मिलते हैं, जो उन्हें विश्राम करने की सलाह देता है। तालाब में मकड़ी के रूप में उनका पैर पकड़ने पर उस राक्षस का रहस्य खुलता है। वह मुनि नहीं, बल्कि घोर राक्षस कालनेमि था, जिसे मारकर हनुमान आगे बढ़ते हैं। द्रोणाचल पहुंचकर जब औषधि पहचानना कठिन होता है, तो हनुमान पूरा पर्वत उठा लेते हैं। अयोध्या के ऊपर पहुंचने पर भरत उन्हें राक्षस समझकर बिना फेर का बाण चला देते हैं। हनुमान पर्वत समेत धरती पर आ गिरते हैं और मुंह से ‘राम-राम’ कहते हैं। सारी कथा सुनकर चिंतित भरत उन्हें शीघ्र लंका पहुंचने के लिए कहते हैं। मेघनाद वध और अंतिम रात उधर राम और वानर सेना हनुमान की प्रतीक्षा में विलाप कर रही होती है। तभी हनुमान संजीवनी लेकर पहुंचते हैं। वैद्य सुषेण औषधि बनाकर लक्ष्मण को देते हैं और वे पूर्ण स्वस्थ होकर उठ बैठते हैं। यह समाचार रावण के लिए गहरा आघात बन जाता है। इसके बाद मेघनाद की पत्नी सुलोचना और मेघनाद के बीच भावुक संवाद प्रस्तुत होगा। मेघनाद देवी निकुम्भिला के मंदिर में पूजा और यज्ञ कर रहा होता है, जिसे पूरा होने से पहले लक्ष्मण भंग कर देते हैं। युद्ध में मेघनाद के सभी घातक अस्त्र बेअसर हो जाते हैं और अंततः लक्ष्मण उसे मारकर धराशायी कर देते हैं। कथा के अनुसार, अब रावण, राम और सीता के लिए केवल अगली रात बचती है—वही अंतिम और भारी रात, जिसमें रावण वध का महाप्रसंग होगा।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User