पटेल सेवा संस्थान में फर्जी चुनाव और भ्रष्टाचार के आरोप:फतेहपुर में बैठक में 6 प्रस्ताव पास, सदस्यता, चंदे और किराए की रकम का हिसाब की मांग

Oct 10, 2026 - 16:16
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पटेल सेवा संस्थान में फर्जी चुनाव और भ्रष्टाचार के आरोप:फतेहपुर में बैठक में 6 प्रस्ताव पास, सदस्यता, चंदे और किराए की रकम का हिसाब की मांग
फतेहपुर में पटेल सेवा संस्थान में चुनाव और पैसों के हिसाब को लेकर विवाद सामने आया है। शनिवार दोपहर 2 बजे संस्थान की सर्वसाधारण बैठक हुई। इसमें मुकेश भाई पटेल ने वर्ष 2014 से संस्थान में फर्जी चुनाव कराने, मृत सदस्यों के नाम पर वोट दिखाने और सदस्यता शुल्क लेने के बाद रसीद नहीं देने के आरोप लगाए। बैठक में इन मामलों को लेकर छह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। मुकेश भाई पटेल ने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 से अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष, सचिव, उपसचिव और प्रबंधकारिणी के पदों पर एक ही समूह का कब्जा है। उनके अनुसार, चुनाव में गड़बड़ी की गई और कई दिवंगत लोगों के नाम भी आमसभा के सदस्यों की सूची में शामिल दिखाए गए। आरोप है कि मृत लोगों के नाम पर वोट भी दर्ज किए गए। 2500 से अधिक सदस्यों से शुल्क लेने का आरोप बैठक में आरोप लगाया गया कि 2500 से अधिक लोगों से सदस्यता के नाम पर 200 रुपए या उससे अधिक शुल्क लिया गया, लेकिन उन्हें रसीद नहीं दी गई। मुकेश भाई पटेल, एडवोकेट पूजा सचान और आस्था पटेल ने बैठक में अपने पक्ष में साक्ष्य पेश किए। इसके बाद वरिष्ठ सदस्यों ने चर्चा कर छह प्रस्ताव पारित किए। बैठक में पारित किए गए छह प्रस्ताव 1. पुराने चुनाव रद्द करने की मांग: वर्ष 2014 के बाद हुए कथित फर्जी चुनावों और नियमों के खिलाफ बनाए गए सदस्यों को अवैध घोषित करने की मांग की गई। 2. आजीवन सदस्यता पूरी करने की मांग: जिन 2500 से अधिक लोगों से 200 रुपए सदस्यता शुल्क लेने की बात कही गई, उनकी आजीवन सदस्यता की प्रक्रिया पूरी कराने का प्रस्ताव रखा गया। 3. संस्थान की आय का हिसाब मांगा: ओमनी नर्सिंग होम से मिलने वाले किराए, सदस्यता शुल्क, साहूजी महाराज की प्रतिमा के लिए जुटाए गए चंदे और अन्य कार्यक्रमों से मिलने वाली रकम का पूरा हिसाब देने की मांग की गई। साथ ही, संस्थान की रकम बैंक खाते में जमा कराने की बात कही गई। 4. पदनाम और नाम वाले पत्थरों में सुधार: प्रस्ताव में कथित रूप से अवैध तरीके से अध्यक्ष बने व्यक्ति से माफी मांगने और संस्थान में लगे पत्थरों पर अध्यक्ष व सचिव के सही नाम लिखवाने की मांग की गई। 5. स्मृति द्वार का नाम बदलने का प्रस्ताव: संस्थान के उत्तरी द्वार पर लिखे ‘स्वर्गीय इन्द्रपाल स्मृति द्वार’ का नाम बदलने की मांग की गई। इसके स्थान पर अमर स्वतंत्रता सेनानी बाबू दीपनारायण सिंह या संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष ज्ञानेन्द्र सिंह के नाम पर स्मृति द्वार रखने का सुझाव दिया गया। 6. पारदर्शी तरीके से चुनाव कराने की मांग: संस्थान के नियमों के अनुसार चुनाव कराने तक एडवोकेट सुनील उमराव की कार्यकारिणी को काम और जिम्मेदारियां संभालते रहने देने का प्रस्ताव रखा गया। बैठक में मौजूद सदस्यों ने संस्थान के चुनाव, सदस्यता और आय-व्यय से जुड़े मामलों में सुधार करने की मांग की। हालांकि, बैठक में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ​

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