पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर 39 हादसों में 14 की मौत:ढाबों के आसपास बढ़ रहा एक्सीडेंट का खतरा
पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। माइलस्टोन 70 से 122 के बीच अगस्त से अक्टूबर तक करीब 39 दुर्घटनाओं में 14 लोगों की मौत हो चुकी है। अक्टूबर में अब तक हुए महज चार हादसों में नौ लोगों की जान चली गई। इसके बावजूद एक्सप्रेसवे के किनारे वाहनों के खड़े होने और ढाबों के आसपास यातायात नियमों की अनदेखी का सिलसिला जारी है। स्थानीय लोगों के मुताबिक एक्सप्रेस-वे किनारे संचालित छोटे ढाबों के आसपास ट्रक, बस, कार, टेंपो और डीसीएम खड़े कर दिए जाते हैं। चालक वाहन रोककर खाना-नाश्ता करने चले जाते हैं, जबकि वाहन तेज रफ्तार यातायात के बीच सड़क किनारे खड़ा रहता है। रात के समय यह स्थिति और खतरनाक हो जाती है। तेज गति से आने वाले वाहन चालकों को अचानक खड़े वाहन दिखाई देने से टक्कर की आशंका बढ़ जाती है। आंकड़ों के अनुसार अगस्त में 14 हादसों में चार लोगों की मौत हुई। सितंबर में 21 दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें एक व्यक्ति की जान गई। अक्टूबर में अब तक चार हादसों में नौ लोगों की मौत हो चुकी है। खास बात यह है कि हाल में हुई दुर्घटनाओं के मामले में सुबह सात से आठ बजे के बीच हादसों की पुनरावृत्ति सामने आई है। लगातार एक ही समय के आसपास हादसे होने से एक्सप्रेस-वे की सुरक्षा व्यवस्था और दुर्घटनाओं के कारणों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क किनारे वाहनों के खड़े होने के बावजूद उन्हें हटाने के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती। कुछ लोगों ने ढाबा संचालकों और सुरक्षा कर्मियों के बीच कथित मिलीभगत और लेन-देन के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। लगातार बढ़ते हादसों को देखते हुए अधिकारियों ने दुर्घटनाओं के कारणों की समीक्षा शुरू कर दी है। सुबह के समय हादसों की पुनरावृत्ति, सड़क किनारे खड़े वाहन और ढाबों के आसपास यातायात व्यवस्था को जांच के दायरे में रखा जा रहा है। अब देखना यह है कि समीक्षा के बाद सुरक्षा व्यवस्था में क्या ठोस बदलाव किए जाते हैं।
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