पूर्वांचल-विश्वविद्यालय में जल सुरक्षा और पृथ्वी के विकास पर चर्चा:2030 तक पानी की मांग आपूर्ति से 40% ज्यादा होने का अनुमान
जौनपुर में वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के भू एवं ग्रहीय विज्ञान विभाग की ओर से शनिवार को ‘पृथ्वी, पर्यावरण एवं भविष्य’ विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। दोपहर 12 से 3 बजे तक चले कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने जल सुरक्षा, भूजल संरक्षण, मृदा और पृथ्वी के भू-वैज्ञानिक विकास पर विचार रखे। दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, गया के प्रो. प्रफुल्ल कुमार सिंह ने कहा कि भारत में दुनिया की करीब 18 प्रतिशत आबादी रहती है, जबकि वैश्विक जल संसाधनों में देश की हिस्सेदारी करीब 4 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि बढ़ती आबादी और जलवायु परिवर्तन के कारण जल संसाधनों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। प्रो. प्रफुल्ल कुमार सिंह के अनुसार, दुनियाभर में करीब 2.3 अरब लोग जल संकट से जूझ रहे हैं। अनुमान है कि 2030 तक वैश्विक पानी की मांग उपलब्ध आपूर्ति से करीब 40 प्रतिशत अधिक हो सकती है। उन्होंने वर्षाजल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण को जल सुरक्षा के लिए जरूरी बताया। मृदा में दर्ज है पृथ्वी के जलवायु इतिहास का रिकॉर्ड काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. बी.पी. सिंह ने कहा कि मृदा पृथ्वी के जलवायु इतिहास का महत्वपूर्ण प्राकृतिक रिकॉर्ड है। उन्होंने भारतीय प्लेट के भू-वैज्ञानिक संचलन और पृथ्वी के दीर्घकालिक विकास की जानकारी दी।
कुलपति का संदेश पढ़कर सुनाया कार्यक्रम में कुलपति प्रो. आरके सिंह का संदेश अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. प्रमोद यादव ने पढ़कर सुनाया। विषय प्रवर्तन प्रो. प्रदीप कुमार ने किया और अतिथियों का स्वागत प्रो. मिथिलेश कुमार ने किया। इस अवसर पर प्रो. देवराज सिंह, प्रो. प्रमोद कुमार, डॉ. मिथिलेश यादव, डॉ. शशिकांत यादव, डॉ. नितेश जायसवाल, डॉ. विवेक पाण्डेय समेत विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे। संचालन अंजू यादव ने किया। डॉ. नीरज अवस्थी ने आभार जताया।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)