राजू के मकान से नीले-ड्रम में 5 बोरी बारूद मिली:वाराणसी में पड़ोसी बोले- गृहस्थी बर्बाद, हमें मुआवजा कब मिलेगा; मलबे में अब भी गंध

Oct 17, 2026 - 07:28
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राजू के मकान से नीले-ड्रम में 5 बोरी बारूद मिली:वाराणसी में पड़ोसी बोले- गृहस्थी बर्बाद, हमें मुआवजा कब मिलेगा; मलबे में अब भी गंध
वाराणसी के सारनाथ थानाक्षेत्र के पंचकोसी इलाके पैगंबरपुर में गुरूवार की शाम पटाखा फैक्ट्री में धमाके से तीन मंजिला मकान जमींदोज हो गया था। इसमें दो लोग घायल और दो लोग लापता हैं। जबकि पटाखा फैक्ट्री का संचालक राजू खान पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार हुआ है। पुलिस ने उससे पूछताछ के आधार पर आज टूटे हुए मकान की तलाशी ली। इस मकान की बची हुई छत पर रखे नीले ड्रम से पुलिस ने कई किलो बारूद बरामद किया है। जिसे कई बोरियों में डालकर राजू ने ड्रम में छुपा रखा था। वहीं राजू खान के घर के सामने स्थित चन्द्रकला विश्वकर्मा और अजय कुमार केसरी के मकान सबसे अधिक क्षतिग्रस्त हुए हैं। अजय की पत्नी मंमता केसरी हाथ में चोट लगी थी और उनके कान में अभी भी दिक्कत है. क्योंकि वो घटना के समय अपने घर के बरामदे पर खड़ीं नीचे अपनी बेटी को देख रही थीं। उन्होंने कहा- मेरी सारी गृहस्थी बर्बाद हो गई, हमको मुआवजा कब मिलेगा। ऐसे में दैनिक भास्कर ने घटनास्थल पर पहुंचकर वहां के हालात को जाना और मलबे में क्या चीजें मिली हैं। साथ ही क्या कोई उन लोगों का हाल जानने आया। उसकी जानकारी और पीड़ितों से बात की। पढ़िए रिपोर्ट... सबसे पहले जानिए राजू खान की निशानदेही पर घर में क्या मिला गुरुवार को पटाखों में ब्लास्ट के बाद तीन मंजिला मकान ताश के पत्ते की तरह ढह गया। स्थानीय लोगों ने बताया - अचानक 5 बजे तीन धमाके हुए और मकान गिर गया। इस मकान का मालिक राजू खान रात में गिरफ्तार हुआ तो पुलिस ने उसे पूछताछ की। दोपहर दो बजे के बाद पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और सीधे बगल के मकान से उस मकान की छत पर पहुंची। नीले ड्रम से निकली बोरियां, बारूद या कुछ और पुलिस सीधे छत पर बने टीन शेड में रखे नीले ड्रम के पास पहुंची। उसे खोला और उसमें से चार से पांच बोरियां निकाली और उसे छत पर रखना शुरू किया। वीडियो बनता देख काम रोक दिया और नीचे उतर आए। कुछ देर बाद झोलों में भरकर इन बोरियों को वहां से हटा दिया गया। पुलिस ने यह क्लियर नहीं किया कि इन बोरियों में क्या है ? लेकिन बोरियों की चमक उसकी कहने स्वयं बता रही थी। हटाया गया मलबा तो निकले नए कपड़ों के गट्ठर इधर नगर निगम के 16 कर्मी सुपरवाइजर के निर्देश पर सुबह 8 बजे से रास्ते से मलबा हटाने में लगे थे। मलबे के अंदर से अभी भी बारूद की महक आ रहे थी। साथ ही महताबियां बनी हुई दिखाई दे रहीं थीं। उन्हें भी मलबे से निकाला गया। इसके अलावा पूरे घर के मलबे से कपड़ों का भंडारण था। जिसमें होजरी की सामान के साथ ही साथ लोअर टीशर्ट भी निकल रहे थे। जिन्हे मजदूर आपस में बांटते दिखाई दिए। अब जानिए उन दो महिलाओं ने क्या कहा जिनका मकान सबसे अधिक हुआ क्षतिग्रस्त ? कोई नहीं आया न कोई आश्वासन मिला राजू खान के मकान के ठीक सामने भाजपा महिला मोर्चा की महानगर मंत्री चन्द्रकला विश्वकर्मा का मकान है। वो परेशान घर के बाहर बैठी हैं। उनसे जब दैनिक भास्कर ने पूछा कि क्या कल से आज तक कोई अधिकारी या जनप्रतिनिधि आप से मिलने या मुआवजे की बात करने आया तो उन्होंने कहा - नहीं-नहीं अभी तक ऐसा कोई आश्वासन नहीं मिला है और ना कोई प्रशासनिक, ना सरकारी कोई अधिकारी नहीं आए। कल एक एसडीएम जो की एक महिला थीं। वो यहां थीं। उन्हें कुछ अधिकारियों ने कहा और हमने भी उनसे रोका पर वो नजरअंदाज करके यहां से निकल गयीं। अभी तक कोई अधिकारी सूचना नहीं है कि हमें कोई मुआवजा मिलेगा जबकि हमारा काफी नुकसान हुआ है। 5 लाख से अधिक नुकसान चन्द्रकला से जब नुकसान का आकलन पूछा गया तो उन्होंने कहा - आप अगर कैमरा उठा के देख लेंगे, तो मुझे देखिए आंकड़ा नहीं पता है। लेकिन अगर पांच-छह लाख से कम नहीं है। आप देख लीजिए कि ऊपर का एक कमरा आधा पूरा डैमेज हो गया। नीचे का कमरा, पूरा घर हुलस गया है। पूरे स्क्रैच आ गए हैं अंदर। यहां से दिख नहीं रहा है, लेकिन अंदर घर में जो भी पुट्टी हुई है, वो पुट्टी से दिख रहा है कि पूरे घर में कितने स्क्रैचेस आए हुए हैं। अब कार्यकर्ताओं की नहीं जनता की सुनवाई होती है चन्द्रकला ने कहा - नहीं पता की मुआवजा मिलेगा या नहीं। मै पार्टी से हूं लेकिन जब कोई कहीं बंध जाता है। तो वो वहां पर वो अपने स्तर से बात नहीं रख पाता है। "अरे! ऐसे होते रहता है" ये बोला जाता है, ठीक है। क्योंकि सुनवाई तो देखिए सभी की होती है। लोग कहते हैं ना कि पार्टी पदाधिकारी की ज्यादा होती है। लेकिन अब सब चेंज हो गया है। हमें अब ऐसा लगता है कि आम जनता की ज्यादा होती है। पर सुनवाई सेम स्तर पर होती है। पुलिस सब जानती थी चन्द्रकला ने कहा - पूरे क्षेत्र में राजू की मां मुन्नी पटाखे वाली के नाम से मशहूर थीं। दूर-दूर से लोग यहां पटाखा लेने आते थे। शादी-ब्याह में पटाखे का काम भी करता था। ऐसी में या पूरे क्षेत्र में फेमस था तो क्या पुलिस को नहीं पता होगा। पुलिस को हर हाल में पता होगा कि यहां यह धंधा चल रहा था। मेरे कान में अभी भी दिक्कत, हुआ लाखों का नुकसान स्थानीय निवासी ममता केशरी के कान से अभी भी कम सुनाई दे रहा है। वो हादसे के वक़्त अपने बरामदे पर खड़ी थीं और उनके मकान की कई खिड़कियां, दरवाजे और शीशे के साथ ही साथ दीवारें टूटी हैं और पिलर दरक गए हैं। ममता ने बताया - कल बहुत सारे अधिकारी आये थे। लेकिन किसी ने भी मुआवजे की बात नहीं की और चले गये। 24 घंटे बीत गए बस मलबा हटाया जा रहा है लेकिन किसी ने हम लोगों का हाल नहीं पूछा जबकि हम लोगों के घरों की स्थिति खराब हो गई है। एक साल पहले ही रेनोवेट कराया था घर ममता ने बताया- कितना नुकसान बताएं, एक साल पहले ही पूरा घर रेनोवेट कराया था। अभी तो रहना शुरू ही किया था। करीब 5 लाख रुपए खर्च हुए थे लेकिन बहुत बड़ा झटका लगा है। दीवारों पर दरारें हैं। पिलर दरक गए हैं। ऐसे में क्या ही कहा जाए। हम सभी को मुआवजा चाहिए क्योंकि यह अवैध कारखाना था पटाख़े का और पुलिस के कई अधिकारी निलंबित हुए हैं। ऐसे में हमारा मुआवजा कौन देगा। सरकार को हमारे बारे में सोचना चाहिए।

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