रामलीला के तीसरे दिन पंचवटी से बालि वध तक मंचन:लखनऊ की 34वीं रामलीला में कलाकारों ने जीवंत किए दृश्य, दर्शकों ने सराहा
लखनऊ के सेक्टर-ए सीतापुर रोड योजना कॉलोनी में चल रही पांच दिवसीय 34वीं रामलीला के तीसरे दिन रविवार को मंच पर पंचवटी से लेकर बालि वध तक के प्रसंग जीवंत हो उठे। कलाकारों के सजीव अभिनय, प्रभावशाली संवाद और भावपूर्ण हाव-भाव ने दर्शकों को रामकथा से जोड़े रखा। भगवान शिव की आरती के साथ मंचन की शुरुआत हुई। इसके बाद पूरा परिसर जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। मंच पर सबसे पहले पंचवटी का प्रसंग दिखाया गया। सूर्पनखा आकर्षक नृत्य और भाव-भंगिमाओं के जरिए भगवान श्रीराम को रिझाने का प्रयास करती है। श्रीराम उसे लक्ष्मण के पास जाने के लिए कहते हैं। लक्ष्मण भी उसके प्रस्ताव को ठुकरा देते हैं। इससे नाराज सूर्पनखा की उद्दंडता बढ़ जाती है। इसके बाद लक्ष्मण उसकी नाक काट देते हैं। सीता हरण के बाद व्याकुल हुए श्रीराम सूर्पनखा के अपमान की खबर रावण तक पहुंचते ही उसका क्रोध भड़क उठता है। इसके बाद छल से माता सीता के हरण का प्रसंग मंचित किया गया। सीता के हरण के साथ ही मंच का माहौल करुण हो गया। सीता को अपने से दूर पाकर श्रीराम की व्याकुलता, पुकार और विरह की पीड़ा ने दर्शकों को भावुक कर दिया। जटायु ने रावण से लिया लोहा माता सीता की रक्षा के लिए जटायु और रावण के बीच संघर्ष का दृश्य भी प्रभावशाली रहा। जटायु ने पूरी शक्ति से रावण को रोकने का प्रयास किया। कर्तव्य और बलिदान के इस प्रसंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया। जटायु मरण के दृश्य के दौरान पूरा वातावरण गंभीर हो गया। हनुमान से भेंट, सुग्रीव से हुई मित्रता रामलीला में आगे श्रीराम और हनुमान की भेंट का प्रसंग आया। हनुमान जी की भक्ति और समर्पण ने दर्शकों का मन जीत लिया। इसके बाद श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता का मंचन हुआ। दोनों के बीच विश्वास और सहयोग का संदेश दिया गया। अंत में बालि वध के प्रसंग ने कथा को आगे बढ़ाया। कलाकारों के अभिनय पर दर्शकों ने तालियों से उत्साह बढ़ाया।
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