रामपुर में फांसीघर जमीन कब्जा केस में आरोप तय नहीं:वीडियो कॉन्फ्रेंस से पेश हुए आजम खां, अन्य आरोपी नहीं पहुंचे; 21 अक्टूबर को अगली सुनवाई
रामपुर में जेल के फांसीघर की जमीन कब्जाने के मामले में मंगलवार को आरोप तय नहीं हो सके। दोपहर तीन बजे हुई सुनवाई में सपा के राष्ट्रीय महासचिव आजम खां रामपुर जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए न्यायालय में पेश हुए, लेकिन अन्य आरोपित न्यायालय नहीं पहुंचे। सभी आरोपितों की मौजूदगी नहीं होने के कारण सुनवाई टल गई। अब मामले में 21 अक्टूबर को सुनवाई होगी। फांसीघर की जमीन से जुड़े मामले में गंज कोतवाली में 20 सितंबर 2019 को तत्कालीन नायब तहसीलदार कृष्ण गोपाल मिश्रा की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसमें 37 लोगों को नामजद किया गया था। सभी पर फांसीघर की सरकारी जमीन की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया गया था। नायब तहसीलदार की रिपोर्ट के मुताबिक, जमीन सरकारी थी और उसकी बिक्री नहीं की जा सकती थी। आरोप है कि कागजों में हेराफेरी कर कुछ लोगों ने जमीन बेच दी। जमीन खरीदने के बाद खरीदारों ने उस पर घर भी बना लिए। पुलिस रिपोर्ट में जमीन बेचने और खरीदने वाले लोगों को नामजद किया गया था। विवेचना में आजम खां का नाम षड्यंत्र की धारा में जुड़ा विवेचना के दौरान पुलिस के सामने यह तथ्य आने की बात कही गई कि जमीन आजम खां के इशारे पर खरीदी गई थी। पूछताछ में कुछ खरीदारों ने आजम खां के कहने पर जमीन खरीदने की बात बताई थी। इसी आधार पर चार्जशीट में उनका नाम धारा 120बी यानी षड्यंत्र के तहत शामिल किया गया। मामले में आजम खां की मां और बेटे को भी नामजद किया गया था। मां की मृत्यु के बाद उनका नाम मुकदमे से हटा दिया गया, जबकि आजम खां और उनके बेटे का नाम आरोप पत्र में शामिल रहा। सभी आरोपितों के नहीं पहुंचने से टली सुनवाई मामले की सुनवाई एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट मजिस्ट्रेट ट्रायल में चल रही है। आजम खां के अधिवक्ता नासिर सुल्तान ने बताया कि सभी आरोपित न्यायालय में उपस्थित नहीं हो सके। इसी वजह से मंगलवार को आरोप तय नहीं हो पाए। अदालत ने अब मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 अक्टूबर की तारीख तय की है।
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