रायबरेली में दिव्यांग सुमन अवस्थी चला रहीं 'जय टेलर' बुटीक:6 से ज्यादा महिलाओं को रोजगार, दो अनाथ बच्चों को भी दे रहीं शिक्षा
हौसलों की 'जय': दिव्यांगता को मात देकर रायबरेली की सुमन बनीं मिसाल, खुद के साथ दूसरों की जिंदगी संवार रहीं बचपन से दिव्यांग सुमन अवस्थी सन 2000 से चला रही हैं 'जय टेलर', आधा दर्जन से अधिक महिलाओं को दे रही हैं रोजगार और दो अनाथ बच्चों को पढ़ा-लिखाकर बना रही हैं । काबिल शारीरिक अक्षमता अगर इरादों के आगे घुटने टेक दे, तो इंसान न केवल अपनी तकदीर बदलता है बल्कि समाज के लिए भी एक नई राह बनाता है। उत्तर प्रदेश के रायबरेली की रहने वाली सुमन अवस्थी इसकी जीती-जागती मिसाल हैं। बचपन से ही दोनों पैरों से दिव्यांग सुमन ने कभी खुद को बेबस नहीं माना। किसी पर बोझ बनने के बजाय उन्होंने आत्मनिर्भर बनने की ठानी और आज वे न केवल अपना 'जय टेलर' बुटीक सफलतापूर्वक चला रही हैं, बल्कि कई अन्य महिलाओं को रोजगार और प्रशिक्षण देकर सशक्त बना रही हैं। सुमन अवस्थी के सफर की शुरुआत आसान नहीं थी। स्वावलंबी बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) से सिलाई का औपचारिक प्रशिक्षण लिया। इसके साथ ही, खुद को निखारने के लिए उन्होंने लगभग 5 साल तक एक स्थानीय टेलर के यहां रहकर सिलाई का व्यावहारिक काम सीखा। कड़ी मेहनत और लगन के बाद, सन 2000 में उन्होंने किराए की एक छोटी सी दुकान से 'जय टेलर' नाम से अपना बुटीक शुरू किया। वर्षों के कड़े संघर्ष और अपनी बचत के बल पर आज वे खुद की दुकान में अपना कारोबार सफलता से संचालित कर रही हैं। सुमन न केवल अपने पैरों पर खड़ी हुई हैं, बल्कि रोजगार सृजक भी बनी हैं। वर्तमान में उनके बुटीक में 6 कारीगर (युवतियां) नियमित रूप से काम कर रही हैं, जिन्हें सुमन हर महीने लगभग ₹5,000 से ₹6,000 की सैलरी देती हैं। अब तक वे 25 से अधिक महिलाओं और युवतियों को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बना चुकी हैं। वर्तमान में भी आधा दर्जन से अधिक युवतियां उनसे सिलाई सीख रही हैं। कड़ी मेहनत और लगन के बाद, सन 2000 में उन्होंने किराए की एक छोटी सी दुकान से 'जय टेलर' नाम से अपना बुटीक शुरू किया। वर्षों के कड़े संघर्ष और अपनी बचत के बल पर आज वे खुद की दुकान में अपना कारोबार सफलता से संचालित कर रही हैं। सुमन न केवल अपने पैरों पर खड़ी हुई हैं, बल्कि रोजगार सृजक भी बनी हैं। वर्तमान में उनके बुटीक में 6 कारीगर (युवतियां) नियमित रूप से काम कर रही हैं, जिन्हें सुमन हर महीने लगभग ₹5,000 से ₹6,000 की सैलरी देती हैं। अब तक वे 25 से अधिक महिलाओं और युवतियों को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बना चुकी हैं। वर्तमान में भी आधा दर्जन से अधिक युवतियां उनसे सिलाई सीख रही हैं।
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