2022 की महंगाई रिपोर्ट अब सार्वजनिक करने की मांग, पूर्व आरबीआई अधिकारी ने उठाया सवाल

आरबीआई के पूर्व अधिकारी जनक राज ने 2022 में महंगाई लक्ष्य से लगातार ऊपर रहने पर सरकार को भेजी गई रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है। 2022 में लगातार तीन तिमाहियों तक खुदरा महंगाई 6 प्रतिशत की ऊपरी सीमा से अधिक रही थी। जनक राज ने मौजूदा 4 प्रतिशत महंगाई लक्ष्य और खाद्य व ईंधन की कीमतों के प्रभाव पर भी सवाल उठाए हैं।

Oct 03, 2026 - 12:06
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2022 की महंगाई रिपोर्ट अब सार्वजनिक करने की मांग, पूर्व आरबीआई अधिकारी ने उठाया सवाल

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 3 अक्टूबर 2026

भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व अधिकारी जनक राज ने 2022 में महंगाई लक्ष्य से लगातार ऊपर रहने के कारण सरकार को भेजी गई रिजर्व बैंक की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि पारदर्शिता के लिए इस रिपोर्ट को अब भी सार्वजनिक किया जा सकता है। 2022 में लगातार तीन तिमाहियों तक खुदरा महंगाई निर्धारित सहनशीलता सीमा से ऊपर रही थी।

महंगाई लक्ष्य से बाहर निकलने पर क्या हुआ था

भारत में महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए महंगाई लक्ष्य आधारित मौद्रिक नीति व्यवस्था लागू है। इसके तहत खुदरा महंगाई का लक्ष्य 4 प्रतिशत रखा गया है, जबकि इसके लिए 2 प्रतिशत से 6 प्रतिशत तक की सहनशीलता सीमा निर्धारित है। वर्ष 2022 में महंगाई लगातार इस ऊपरी सीमा से ऊपर बनी रही थी। इसी वजह से रिजर्व बैंक को निर्धारित नियमों के तहत सरकार को अपनी रिपोर्ट भेजनी पड़ी थी।

2022 में कितनी बढ़ी थी महंगाई

जनवरी से सितंबर 2022 के दौरान लगातार तीन तिमाहियों में औसत खुदरा महंगाई 6 प्रतिशत से अधिक रही थी। जनवरी से मार्च के बीच यह करीब 6.3 प्रतिशत रही, जबकि अप्रैल से जून के दौरान औसत महंगाई लगभग 7.3 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। जुलाई से सितंबर के बीच भी महंगाई करीब 7 प्रतिशत रही। इस लगातार बढ़ी महंगाई के कारण रिजर्व बैंक को सरकार को स्पष्टीकरण देना पड़ा था।

जनक राज ने रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग क्यों की

रिजर्व बैंक के पूर्व कार्यकारी निदेशक और पूर्व मौद्रिक नीति समिति सदस्य जनक राज ने कहा है कि नवंबर 2022 में सरकार को भेजी गई रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए थी। उनके अनुसार, भले ही रिपोर्ट का विषय आज उतना प्रासंगिक नहीं रह गया हो, लेकिन इसे सार्वजनिक करने से पारदर्शिता बढ़ेगी। उनका कहना है कि रिपोर्ट को अब भी जनता के सामने रखा जा सकता है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि उस समय महंगाई लक्ष्य से बाहर जाने के पीछे क्या कारण बताए गए थे।

4 प्रतिशत महंगाई लक्ष्य पर भी उठे सवाल

जनक राज ने मौजूदा 4 प्रतिशत महंगाई लक्ष्य को लेकर भी अपनी राय रखी है। उनके अनुसार, महंगाई लक्ष्य आधारित व्यवस्था लागू होने के बाद अगस्त 2025 तक भारत की औसत खुदरा महंगाई करीब 4.8 प्रतिशत रही थी। इन आंकड़ों को देखते हुए 4 प्रतिशत से थोड़ा अधिक लक्ष्य निर्धारित करने के पक्ष में तर्क दिया जा सकता था। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि लक्ष्य को बढ़ाने से बाजार और आम लोगों के बीच अलग संदेश जा सकता था।

लक्ष्य बढ़ाने से क्या असर पड़ सकता था

जनक राज के मुताबिक, एक बार 4 प्रतिशत का महंगाई लक्ष्य तय हो जाने के बाद उसे बढ़ाना आसान फैसला नहीं होता। ऐसा करने से यह संदेश जा सकता है कि रिजर्व बैंक महंगाई को नियंत्रित करने के मामले में पहले की तुलना में कम सख्त हो गया है। इससे लोगों और बाजार की भविष्य की महंगाई को लेकर उम्मीदों पर असर पड़ सकता है। इसलिए महंगाई लक्ष्य तय करने में केवल पुराने आंकड़ों के साथ-साथ जनता की अपेक्षाओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

खाने-पीने की चीजों और ईंधन की कीमतों का बड़ा असर

भारत में खुदरा महंगाई पर खाद्य वस्तुओं और ईंधन की कीमतों का सीधा प्रभाव पड़ता है। आम परिवार के मासिक खर्च में भोजन और ईंधन का बड़ा हिस्सा होता है, इसलिए इनकी कीमत बढ़ने पर लोगों के घरेलू बजट पर तुरंत असर पड़ता है। जनक राज का कहना है कि केवल खाद्य और ईंधन की कीमतों को हटाकर महंगाई का आकलन करना पर्याप्त नहीं है। मौद्रिक नीति और उसकी जानकारी आम लोगों तक पहुंचाते समय कुल खुदरा महंगाई को केंद्र में रखना महत्वपूर्ण है।

महंगाई रिपोर्ट क्यों है महत्वपूर्ण

वर्ष 2022 में लगातार तीन तिमाहियों तक महंगाई के ऊपरी स्तर से अधिक रहने के कारण रिजर्व बैंक को सरकार को स्पष्टीकरण देना पड़ा था। वर्ष 2016 में महंगाई लक्ष्य आधारित मौद्रिक नीति व्यवस्था लागू होने के बाद यह पहली ऐसी स्थिति थी, जब निर्धारित नियमों के तहत रिजर्व बैंक को सरकार के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी। अब पूर्व अधिकारी द्वारा रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग ने उस पुराने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। रिपोर्ट सामने आने पर उस समय महंगाई को लेकर रिजर्व बैंक के आकलन और तर्कों की जानकारी मिल सकती है।

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