रोजगार की मांग को लेकर रायबरेली में युवाओं का धरना:बोले- नौकरी मिलने तक नहीं लौटेंगे घर, गांधी मैदान में डटे बेरोजगार
लखनऊ से शुरू हुआ 'घर छोड़ो सत्याग्रह' अब रायबरेली के ऊंचाहार स्थित रामचंद्रपुर गांव पहुंच गया है। बुधवार देर रात 9 बजे से बेरोजगार युवा ऊंचाहार के गांधी मैदान में धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि जब तक रोजगार नहीं मिलेगा, वे घर वापस नहीं लौटेंगे। पढ़ाई पूरी करने के बाद भी नौकरी न मिलने से निराश इन युवाओं ने परिवार पर बोझ बनने के बजाय यह आंदोलन शुरू किया है। उनका संकल्प है कि समाज जो खिलाएगा, वही खाएंगे, नहीं तो भूखे सो जाएंगे। एक वीडियो में कई युवा रात के अंधेरे में खाली पोस्टर लिए शांति से जमीन पर बैठे दिख रहे हैं। धरने पर बैठे एक युवक ने बताया कि मजदूरी करके पढ़ाई पूरी की, पर अब ऑटो चलाने को मजबूर हैं। उसने कहा कि नौकरी मिलने तक वे धरने पर रहेंगे। घरवाले भी पूछने लगे हैं कि आखिर कब तक वे उनका बोझ उठाएंगे। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे निराशाजनक पहलू शासन और प्रशासन की भारी बेरुखी है। धरने पर बैठे युवाओं की सबसे बड़ी शिकायत यही है कि इतने दिनों से बैठे रहने के बावजूद सरकार, प्रशासन या किसी भी राजनीतिक दल का एक छोटा कार्यकर्ता भी उनसे बात करने या उनका हाल जानने नहीं आया है। लखनऊ, बलिया, गोंडा, अमेठी और बहराइच के बाद अब रायबरेली में जोर पकड़ रहा यह आंदोलन सिर्फ स्थानीय बेरोजगारी का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह जेन-जेड युवाओं में व्यवस्था के खिलाफ पनप रहे गहरे असंतोष का परिचायक बन गया है। बिना किसी उग्र प्रदर्शन के, पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग मनवाने का यह तरीका एक नई बहस को जन्म दे रहा है। अगर समय रहते प्रशासन ने संवादहीनता खत्म कर इन युवाओं की सुध नहीं ली, तो यह हताशा एक बड़े और व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले सकती है।
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