रविता-अमरदीप को फांसी कब होगी?:हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद तय होगी तारीख; जानिए पूरा प्रोसेस
मेरठ में चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड के बाद अब सांपकांड में दोषी रविता-अमरदीप को भी अदालत ने मृत्युदंड से दंडित किया है। शुक्रवार को अपर जिला जज 12 जयवीर सिंह नागर ने दोनों लोगों को सजा सुनाई।
मुस्कान-साहिल की तरह अब हर किसी के मन में यही सवाल है कि रविता-अमरदीप को फांसी कब और कैसे होगी? फांसी की तारीख आखिर क्या होगी? फांसी की पूरी प्रक्रिया और मृत्युदंड होने का लीगल प्रॉसिजर क्या होगा? इस पर अभियोजन के वकील डीजीसी केके चौबे से दैनिक भास्कर ने बातचीत की। पढ़िए उन्होंने क्या कहा…
अब पहले हाईकोर्ट में कंफर्म की जाएगी फांसी डीजीसी केके चौबे ने बताया- अभी लोअर कोर्ट, जिला जज के यहां से दोनों को फांसी की सजा सुनाई गई है। लेकिन, अभी हायर कोर्ट में माफी मिलने के रास्ते खुले हैं। अभी केस का जजमेंट भी अपलोड नहीं किया गया है। जजमेंट अपलोड होने के बाद इसे जेल में रविता-अमरदीप को रिसीव कराया जाएगा। इसके बाद फांसी की सजा को हाईकोर्ट में कंफर्म कराया जाता है। लगभग एक महीने के अंदर केस की फाइल को हाईकोर्ट भेजा जाएगा। जहां हाईकोर्ट में फांसी को कन्फर्म किया जाएगा। अगर वहां डिफेंस की ओर से अपना वकील पेश करते हुए फांसी की सजा पर बहस होगी। अगर हाईकोर्ट में फांसी की सजा को कंफर्म नहीं किया जाता तो मुस्कान-साहिल, रविता-अमरदीप फांसी से बच भी सकते हैं। अगर हाईकोर्ट ने इनकी फांसी को कंफर्म कर दिया तो केस फाइल सुप्रीम कोर्ट में जाएगी। सुप्रीमकोर्ट में कंफर्म की जाएगी फांसी
हाईकोर्ट की तरह ही सुप्रीमकोर्ट में अदालत और जज के सामने फांसी को कंफर्म किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में फांसी कंफर्म हो गई और इन चारों को सुप्रीम कोर्ट ने भी मर्सी नहीं दी तो इनका बचना मुश्किल है। अगर सुप्रीम कोर्ट ने फांसी को कंफर्म नहीं किया तो फांसी की सजा टल सकती है। ये आजीवन कारावास या अन्य सजा में भी बदल सकती है। राष्ट्रपति द्वारा दी जाएगी स्वीकृति
सुप्रीम कोर्ट में फांसी कंफर्म होने के बाद केस फाइल देश के राष्ट्रपति के पास जाएगी। क्योंकि मृत्युदंड में स्वीकृति का अधिकार देश के राष्ट्रपति को होता है। मुस्कान-साहिल राष्ट्रपति के यहां फांसी की सजा में माफी के लिए मर्सी अपील कर सकते हैं। राष्ट्रपति द्वारा मर्सी अपील न मानने और मृत्युदंड देने को स्वीकार किया गया, तब इनको फांसी मिलना पक्का होगा। क्योंकि किसी भी मृत्युदंड में लोअर कोर्ट के बाद हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट फिर राष्ट्रपति से स्वीकृति आवश्यक होती है। इस पूरी प्रक्रिया में एक साल या दो से तीन साल का समय, या इससे ज्यादा भी लग सकता है। चारों लोग हाईकोर्ट, सुप्रीमकोर्ट में अपना केस लड़ने के लिए कौन सा वकील करते हैं? कौन उनका पक्ष रखेगा या वो क्या अर्जी डालेंगे, यह बात भी अहम होगी।
जिस अदालत में सजा वहीं से ही मुकर्रर होगी फांसी की तारीख
राष्ट्रपति द्वारा फांसी पर स्वीकृति मिलने के बाद केस फाइल दोबारा संबंधित अदालतों में जाएगी। मुस्कान-साहिल का केस जिला जज की अदालत में चलेगा। जबकि रविता-अमरदीप का केस एडीजे 12 के यहां जाएगा। दोनों अदालतों के न्यायाधीशों द्वारा मृत्युदंड देने की तारीख तय की जाएगी। चूंकि मृत्युदंड में दोषसिद्ध होने तक लटकने यानि फांसी की सजा का फैसला सुनाया गया है। इसलिए दोनों को फांसी होगी।
जिला अदालत की तय तारीख पर ही दोनों को फांसी होगी। तब तक रविता-अमरदीप दोनों जेल में रहेंगे। आवश्यकतानुसार इनकी जेलें बदल सकती हैं। ये सेंट्रल जेल में शिफ्ट हो सकते हैं। अगर इस बीच इनको जमानत मिली तो ये बेल पर बाहर भी आ सकते हैं।
मेरठ में 3 दिन में दूसरी महिला को फांसी की सजा मेरठ में ये पहली बार है, जब 3 दिनों के अंदर दो महिलाओं और कुल 4 लोगों को फांसी का दंड सुनाया गया है। कचहरी में वैसे फांसी की सजा सुनाए जाने का ये तीसरा केस है। 2003 में एक केस में जिला अदालत से फांसी की सजा सुनाई गई थी।
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