साहिल-मुस्कान की फांसी को अभियोजन ने कहा सच्चाई की जीत:अधिवक्ता बोले- अपराध की हर कड़ी को जोड़कर सजा, बचाव पक्ष की 3 दलीलें खारिज

Oct 14, 2026 - 21:55
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साहिल-मुस्कान की फांसी को अभियोजन ने कहा सच्चाई की जीत:अधिवक्ता बोले- अपराध की हर कड़ी को जोड़कर सजा, बचाव पक्ष की 3 दलीलें खारिज
देश भर में चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में अदालत ने दोनों अभियुक्तों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। वहीं, शव छिपाने के आरोप में दोनों को सात-सात साल के कारावास और 20-20 हजार रुपये और हत्या में सजा के साथ 50 हजार रूपये के जुर्माने से दंडित किया गया है। मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता विजय बहादुर ने अदालत के फैसले पर पूरी संतुष्टि जताई है। उनका कहना है कि अदालत ने मामले के तथ्यों, परिस्थितियों और अपराध से जुड़ी सभी कड़ियों को ध्यान में रखते हुए फैसला सुनाया है। बचाव पक्ष की ओर से अभियुक्तों के पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड, जेल में अच्छे आचरण और पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए सजा में नरमी की मांग की गई थी, लेकिन अदालत ने अपराध की गंभीरता को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि मामले की परिस्थितियों और अपराध की प्रकृति को देखते हुए अदालत का निर्णय उचित है। उनके मुताबिक, इस अपराध ने समाज में भय का माहौल पैदा किया था और लोगों के बीच पति-पत्नी के रिश्ते को लेकर भी चिंता का वातावरण बना था। सजा के समय बचाव पक्ष ने रखे थे तीन प्रमुख तर्क पहले कोई आपराधिक इतिहास नहीं- बचाव पक्ष ने कहा कि अभियुक्तों का पहले से कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं रहा है जेल में अच्छा आचरण- यह तर्क दिया गया कि जेल में रहने के दौरान दोनों का व्यवहार अच्छा रहा है। पारिवारिक जिम्मेदारियां- बचाव पक्ष ने मुश्कान की दो छोटी बेटियों का हवाला देते हुए सजा में रियायत देने की मांग की थी। हालांकि, पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता के अनुसार, अपराध की गंभीरता और उसकी परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने इन दलीलों के बावजूद मृत्युदंड की सजा सुनाई। उन्होंने कहा कि आगे हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में मामले को किस तरह देखा जाएगा, यह वहां होने वाली सुनवाई और कानूनी पहलुओं पर निर्भर करेगा। फिलहाल निचली अदालत के फैसले से वह पूरी तरह संतुष्ट हैं। 30 साल की वकालत में ऐसा मामला पहले नहीं देखा अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता विजय बहादुर ने बताया कि करीब 30 साल से अधिक समय से वकालत कर रहे अधिवक्ता ने कहा कि उन्होंने अपने पूरे पेशेवर जीवन में इसी प्रकृति का कोई दूसरा मामला नहीं देखा। उन्होंने मेरठ के हसनपुर रजापुर गांव में हुए तीन हत्याओं के एक पुराने मामले का भी जिक्र किया, लेकिन कहा कि मौजूदा मामले जैसी प्रकृति का घटनाक्रम उनके सामने पहले नहीं आया। उनके अनुसार, यह मामला केवल एक आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके सामाजिक प्रभाव भी व्यापक रहे। उनका कहना है कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए वह शुरू से ही दोषियों के लिए मृत्युदंड की अपेक्षा कर रहे थे। फैसले से पीड़ित परिवार भी संतुष्ट पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि वह फैसले से पूर्ण रूप से संतुष्ट हैं और उनके अनुसार पीड़ित परिवार भी पूरी तरह संतुष्ट है। उन्होंने कहा कि अदालत ने मामले के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार करते हुए निर्णय दिया है और पीड़ित पक्ष को न्याय मिला है।

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