सांपकांड में फांसी के फैसले को डीजीसी ने बताया नजीर:के.के चौबे बोले- मेरठ से शुरू होगी अपराधियों को सजा से संदेश देने की क्रांति
मेरठ में हुए सांपकांड मामले में अदालत का फैसला आने के बाद जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) केके चौबे ने अभियोजन पक्ष और देश की जनता को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस तरह के अपराधों से सामाजिक रिश्तों पर लोगों का भरोसा कमजोर हो रहा है। नई पीढ़ी का रिश्तों से विश्वास उठ रहा है। अदालत के फैसलों से यह भरोसा दोबारा कायम होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि मेरठ क्रांति की धरती है और अब अपराधियों को सजा के जरिए संदेश देने की क्रांति भी यहीं से शुरू होगी। डीजीसी केके चौबे ने कहा कि सांपकांड मामले में आया फैसला समाज के लिए महत्वपूर्ण संदेश देता है। उन्होंने दो दिन पहले देशभर में नीले ड्रम के नाम से चर्चित एक अन्य मामले में भी दोनों आरोपियों को फांसी की सजा सुनाए जाने का जिक्र किया। उनके मुताबिक, दोनों मामलों में आए फैसले देश के सामने नजीर बनकर आएंगे। रिश्तों के विश्वास की हत्या भी जघन्य अपराध केके चौबे ने कहा कि सांपकांड मामले में कुछ लोगों का तर्क था कि यह अपराध जघन्य अपराध की श्रेणी में नहीं आता। हालांकि, अदालत ने फैसला सुनाते हुए इस पहलू को स्पष्ट किया। डीजीसी के मुताबिक, न्यायालय ने कहा कि किसी व्यक्ति को काट देना ही जघन्य अपराध नहीं है, बल्कि रिश्तों, विश्वास और आपसी संबंधों की हत्या करना भी इसी श्रेणी में आता है। उन्होंने कहा कि पति-पत्नी का रिश्ता आपसी विश्वास और सहारे पर टिका होता है। ऐसे रिश्ते में जिस हाथ को सहारा देने के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए, उसी हाथ से पत्नी की हत्या करना गंभीर अपराध है। डीजीसी ने कहा कि इस मामले में अदालत ने फांसी की सजा देकर अपराध की गंभीरता का संदेश दिया है। अदालत के फैसले से समाज को संदेश डीजीसी ने कहा कि ऐसे मामलों में न्यायालय के फैसले समाज को यह संदेश देते हैं कि रिश्तों में विश्वासघात और गंभीर अपराधों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन फैसलों से नई पीढ़ी का रिश्तों और सामाजिक संबंधों पर भरोसा फिर मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि मेरठ में क्रांति का इतिहास रहा है। अब यहां से अपराधियों को उनके कृत्यों के लिए सजा दिलाकर समाज में संदेश देने की शुरुआत भी हो रही है। उनके अनुसार, सांपकांड और नीले ड्रम मामले में आए फैसले इसी दिशा में महत्वपूर्ण उदाहरण हैं।
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