शामली कलेक्ट्रेट में प्रेरणा कैंटीन चला रहीं सीमा:रोजाना 4 से 5 हजार रुपए की कमाई, घर चलाने के साथ बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी उठा रहीं
कभी रोजगार की तलाश में रहीं पंजोखरा गांव की सीमा आज शामली कलेक्ट्रेट परिसर में प्रेरणा कैंटीन चला रही हैं। स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने आत्मनिर्भरता की राह चुनी। अब वह अपनी कमाई से परिवार का खर्च उठाने के साथ बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं। उनका सफर ग्रामीण महिलाओं के लिए खुद का रोजगार शुरू करने की एक मिसाल है। सीमा उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। उन्होंने गांव की महिलाओं को एकजुट कर समूह बनाया और इसका नाम 'प्रगति संगठन' रखा। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें रोजगार के अवसर मिले। धीरे-धीरे उन्होंने कामकाज की समझ विकसित की और ई-सखी के रूप में भी अपनी पहचान बनाई। कलेक्ट्रेट में शुरू की प्रेरणा कैंटीन सीमा ने इसके बाद शामली कलेक्ट्रेट परिसर में प्रेरणा कैंटीन का संचालन शुरू किया। यहां वह लोगों को चाय-नाश्ता और अन्य खाद्य सामग्री उपलब्ध कराती हैं। नियमित मेहनत और काम के प्रति लगन से कैंटीन उनके रोजगार का प्रमुख जरिया बन गई है। सीमा की रोजाना की कमाई करीब 4 से 5 हजार रुपए बताई गई है। यह दैनिक कमाई है, शुद्ध मुनाफा नहीं। बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी उठा रहीं कैंटीन से होने वाली आमदनी से सीमा घर के खर्च में योगदान देने के साथ बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी भी निभा रही हैं। रोजगार शुरू करने से उन्हें आर्थिक रूप से परिवार का सहारा बनने का अवसर मिला है। अब वह अप
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