सहारनपुर में आदि-धर्म समाज ने शिक्षा अपनाने का दिया संदेश:पारंपरिक सफाई कार्य छोड़कर शिक्षा, रोजगार और स्वरोजगार में आगे बढ़ने पर जोर

Oct 04, 2026 - 17:29
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सहारनपुर में आदि-धर्म समाज ने शिक्षा अपनाने का दिया संदेश:पारंपरिक सफाई कार्य छोड़कर शिक्षा, रोजगार और स्वरोजगार में आगे बढ़ने पर जोर
सहारनपुर में रोटरी क्लब में रविवार दोपहर दो बजे वाल्मीकि-अंबेडकर आंदोलन समाज के तत्वावधान में आदि धर्म समाज का जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में समाज के लोगों से पारंपरिक सफाई कार्य छोड़कर शिक्षा, रोजगार और स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत आदि सृष्टिकर्ता भगवान वाल्मीकि दयावान और बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर की गई। पंजाब के लुधियाना से पहुंचे आदि धर्म समाज के राष्ट्रीय प्रचारक आनंद राक्षस ने समाज के लोगों को शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक किया। उन्होंने कहा कि समाज के बच्चों को हर हाल में स्कूल भेजना चाहिए। अभिभावक अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए जरूरत पड़े तो एक रोटी कम खाएं, लेकिन उनकी पढ़ाई से समझौता न करें। उन्होंने कहा कि बाबा साहब का संदेश था कि पढ़ो, लिखो और संघर्ष करो। इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए आदि धर्म समाज पिछले करीब 25 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहा है। राष्ट्रीय प्रचारक ने कहा कि समाज को सदियों से चले आ रहे सफाई के पारंपरिक काम से बाहर निकलना होगा। शिक्षा के माध्यम से ही समाज के लोग दूसरे क्षेत्रों में आगे बढ़कर बराबरी हासिल कर सकते हैं। उन्होंने युवाओं से नौकरी के साथ-साथ स्वरोजगार अपनाने का भी आह्वान किया। कार्यक्रम में ऐसे लोगों और बच्चों को सम्मानित कर प्रमाण पत्र दिए गए, जिन्होंने पारंपरिक सफाई कार्य छोड़कर दूसरे व्यवसाय अपनाए हैं। इनमें कारपेंटरी, फोटोग्राफी समेत विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले लोग शामिल रहे। वक्ताओं ने कहा कि इन लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे सफाई के पारंपरिक काम में वापस नहीं लौटेंगे और अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाएंगे। आनंद राक्षस ने बताया कि शिक्षा के अभियान के सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। समाज के कई परिवारों में बच्चे पीएचडी, इंजीनियरिंग, चिकित्सा और कानून जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य समाज के प्रत्येक बच्चे को बेहतर स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय तक पहुंचाना है, ताकि नई पीढ़ी अपने भविष्य का निर्माण स्वयं कर सके।

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