सहारनपुर में अवैध खनन का 'व्हाट्सऐप नेटवर्क':अधिकारियों की रेकी, लोकेशन शेयर होते ही अलर्ट हो जाते थे वाहन चालक, 'याराना' और 'सरकार' नाम से बनाए गए थे दो ग्रुप
सहारनपुर में अवैध खनन और खनन सामग्री के अवैध परिवहन का मामला अब व्हाट्सऐप ग्रुपों के जरिए पर चलाए जा रहे सूचना नेटवर्क तक पहुंच गया है। खनन विभाग की गोपनीय रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की गतिविधियों पर नजर रखने, उनकी गाड़ियों की लोकेशन साझा करने और खनन सामग्री से लदे वाहनों को चेकिंग से बचाने के लिए दो व्हाट्सऐप ग्रुप बनाए गए थे। इन ग्रुपों में कथित तौर पर वाहन चालकों, ट्रक मालिकों और खनन कारोबार से जुड़े अन्य लोगों को जोड़ा गया था। अधिकारियों की चेकिंग की सूचना मिलते ही वाहन चालकों को सतर्क होने और अपना रास्ता बदलने का मौका मिल जाता था। खनन विभाग की ओर से दी गई तहरीर के आधार पर बेहट थाना पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज किया है। रिपोर्ट में कई लोगों के नाम सामने आए हैं, जिन पर अधिकारियों की रेकी करने, सूचनाएं ग्रुप में साझा करने, वाहनों को निकलवाने और इस गतिविधि के बदले अवैध रूप से धन जुटाने के आरोप लगाए गए हैं।
अवैध परिवहन में फर्जी नंबर प्लेटों के इस्तेमाल की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। हालांकि, ये सभी आरोप हैं और संबंधित लोगों की भूमिका की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। दो व्हाट्सऐप ग्रुप से चल रहा था सूचना नेटवर्क खनन विभाग की गोपनीय रिपोर्ट के अनुसार, इस नेटवर्क से जुड़े लोगों ने 'याराना' और 'सरकार' नाम से दो व्हाट्सऐप ग्रुप बनाए थे। रिपोर्ट में याराना ग्रुप का एडमिन दूधगढ़ निवासी शोभान पुत्र मोहम्मद हसन और सरकार ग्रुप का एडमिन गंदेवड़ निवासी रजत लाला पुत्र राजीव कुमार को बताया गया है। आरोप है कि इन ग्रुपों में खनन कारोबार से जुड़े वाहन चालकों, ट्रक मालिकों और दूसरे लोगों को शामिल किया गया था। ग्रुप का इस्तेमाल केवल आपसी बातचीत के लिए नहीं, बल्कि पुलिस और प्रशासन की गतिविधियों से संबंधित सूचनाएं साझा करने के लिए भी किए जाने का आरोप है। तहरीर के मुताबिक, रास्ते में किसी सदस्य को पुलिस की चेकिंग होती दिखाई देती थी या खनन वाहनों की जांच कर रही प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ी नजर आती थी, तो वह इसकी जानकारी ग्रुप में साझा कर देता था। इस सूचना से दूसरे वाहन चालकों को पहले ही सतर्क होने का मौका मिल जाता था। आरोप है कि इसी तरह खनन सामग्री से लदे वाहनों को जांच से बचाकर निकालने में मदद की जाती थी। अधिकारियों की रेकी कर ग्रुप में भेजी जाती थी लोकेशन खनन विभाग की रिपोर्ट में गालिब निवासी नानौली, दिलशाद निवासी नानौली और अभिषेक निवासी असलमपुर बरथा के नाम भी दर्ज हैं। तहरीर में अभिषेक के संबंध में वास्तविक नाम दीपक पुत्र ऋषि होने का उल्लेख किया गया है। इन लोगों पर आरोप है कि वे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की गतिविधियों की जानकारी जुटाकर व्हाट्सऐप ग्रुपों में साझा करते थे। रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों की लोकेशन और उनकी चेकिंग से संबंधित सूचनाओं का इस्तेमाल अवैध खनन सामग्री ले जा रहे वाहनों को रास्ते में कार्रवाई से बचाने के लिए किया जाता था। इस नेटवर्क में रेकी की भूमिका अहम बताई गई है। यदि किसी मार्ग पर चेकिंग की सूचना मिल जाती थी, तो दूसरे वाहन चालकों को उसके बारे में जानकारी मिल सकती थी। इससे वे सतर्क होकर अपने वाहनों की आवाजाही में बदलाव कर सकते थे। हालांकि, रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए पुलिस को सूचनाओं के आदान-प्रदान, संबंधित लोगों की भूमिका और वाहनों की आवाजाही की जांच करनी होगी। 11 लोगों पर वाहनों को निकलवाने का आरोप खनन विभाग की तहरीर में 11 अन्य लोगों पर खनन में लगे वाहनों को निकलवाने का काम करने का आरोप लगाया गया है। इनमें सागर कांबोज निवासी कांबोह माजरा, जाविर और इखलाख निवासी लौधीपुर, अंकुश निवासी नानौली, रवित गुर्जर निवासी लतीफपुर भूड़, बिट्टू निवासी धौलरा, विकास कुमार और बिड्डू निवासी सढ़ौली भूड़, पप्पन निवासी टटोहल, शहजाद निवासी ताजपुरा और जब्बार निवासी बिजौपुरा के नाम शामिल हैं। तहरीर में आरोप है कि ये लोग रजत लाला, गुफरान, शहजाद और अश्वनी शर्मा के लिए काम करते थे। रिपोर्ट में रजत लाला निवासी गंदेवड़, मुसारिक निवासी लौधीपुर, गुफरान निवासी बोलरा, अश्वनी शर्मा निवासी कवाड़पुर और शहजाद निवासी बिजौपुरा के नाम भी दर्ज किए गए हैं। खनन विभाग का आरोप है कि इस पूरी व्यवस्था के जरिए खनन सामग्री से लदे वाहनों को रास्ते में चेकिंग से बचाकर निकालने में मदद की जाती थी। रिपोर्ट में इस गतिविधि के बदले अवैध रूप से धन एकत्र करने की बात भी कही गई है। पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि आरोपित लोगों के बीच क्या संबंध थे और कथित नेटवर्क में प्रत्येक व्यक्ति की क्या भूमिका थी। फर्जी नंबर प्लेट से परिवहन का भी आरोप गोपनीय रिपोर्ट में खनन सामग्री के अवैध परिवहन में लगे वाहनों पर फर्जी नंबर प्लेट इस्तेमाल किए जाने का आरोप भी लगाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई से बचते हुए खनन सामग्री का परिवहन कराया जाता था। यदि जांच में फर्जी नंबर प्लेटों के इस्तेमाल और अधिकारियों की चेकिंग से बचने के लिए सूचनाएं साझा करने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामले में वाहनों, उनके मालिकों और परिवहन से जुड़े लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। फिलहाल इस संबंध में रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों का सत्यापन किया जाना है। सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका खनन विभाग की तहरीर में कहा गया है कि अवैध खनन और खनन सामग्री के अवैध परिवहन से सरकारी राजस्व प्रभावित हो सकता है। नियमानुसार शुल्क और अन्य देय रकम जमा किए बिना खनन सामग्री का परिवहन होने पर सरकार को राजस्व का नुकसान होने की आशंका रहती है। विभाग ने इसी आधार पर मामले की जांच कर संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। हालांकि, इस मामले में सरकारी राजस्व को वास्तविक रूप से कितना नुकसान हुआ, इसका कोई स्पष्ट आंकड़ा उपलब्ध विवरण में नहीं दिया गया है। 12 अक्टूबर को दी गई थी तहरीर, अब जांच पर नजर खान निरीक्षक अभिलाष चौबे ने 12 अक्टूबर 2026 को बेहट थाना प्रभारी को तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की थी। तहरीर के साथ खनन विभाग की गोपनीय रिपोर्ट की छायाप्रति भी संलग्न की गई थी। इसके बाद पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज किया। अब जांच में व्हाट्सऐप ग्रुपों की भूमिका, अधिकारियों की लोकेशन साझा किए जाने के आरोप, वाहनों को चेकिंग से बचाकर निकालने की व्यवस्था और फर्जी नंबर प्लेटों के इस्तेमाल से जुड़े तथ्यों का सत्यापन किया जाना है।
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