सहारनपुर में बच्चों ने शास्त्रीय-संगीत और कथक से मन मोहा:मेला गुघाल में 'हमारी संस्कृति हमारी पहचान' कार्यक्रम में दी प्रस्तुति

Sep 30, 2026 - 21:37
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सहारनपुर में बच्चों ने शास्त्रीय-संगीत और कथक से मन मोहा:मेला गुघाल में 'हमारी संस्कृति हमारी पहचान' कार्यक्रम में दी प्रस्तुति
सहारनपुर में मेला गुघाल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में बुधवार शाम 7 बजे जीआईसी सभागार में ‘हमारी संस्कृति हमारी पहचान’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। नगर निगम ने स्पिक मैके और स्पर्श प्रयास के सहयोग से कार्यक्रम कराया। इसमें पांच से 12 वर्ष तक के बाल कलाकारों ने भारतीय शास्त्रीय संगीत और कथक की प्रस्तुतियों से दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। कार्यक्रम का शुभारंभ आरएसएस के विभाग प्रचारक कुलदीप कुमार, नगर विधायक राजीव गुंबर, भाजपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष राकेश जैन व हेमंत अरोड़ा, सीनियर सिटीजन वेल्फेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष केएल अरोड़ा समेत अन्य अतिथियों ने भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर और रिबन काटकर किया। ‘स्पर्श’ के तत्वावधान और पंकज मल्होत्रा के निर्देशन में तैयार कार्यक्रम में बच्चों ने विभिन्न भारतीय शास्त्रीय वाद्यों पर राग किरवानी की प्रस्तुति दी। इसमें बताया गया कि वर्ष 1950 से 2026 तक फिल्मों के गीतों में भी इस राग का किस तरह प्रयोग हुआ। सरोद पर रुद्र, अथर्व, अवंतिका, सिदक, गर्व और परीशा ने प्रस्तुति दी। सितार पर कवनप्रीत और अनन्या, इसराज पर अमान्या व शुभ, संतूर पर अपूर्वा व मनका और बांसुरी पर दैविक, गर्वित व शुभ ने राग किरवानी की पारंपरिक गत, तान और झाला प्रस्तुत किया। इसके बाद दिल्ली से आईं लखनऊ घराने की गुरु मालती श्याम के दल ने कथक की प्रस्तुति दी। अश्विनी सोनी, गौरी, हर्षिता, बादल, हर्षिता शर्मा, डोल्मा गुप्ता और हर्षिता द्विवेदी ने कृष्ण प्रसंग पर नृत्य और तराना पेश किया। प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। विभाग प्रचारक कुलदीप कुमार ने कहा कि संगीत और वाद्य यंत्र हमारी संस्कृति और संस्कार हैं। इन्हें भूलने के बजाय नई पीढ़ी को इनसे जोड़ना जरूरी है। संस्कृति और संस्कारों को साथ लेकर चलने से ही श्रेष्ठ चरित्र का निर्माण हो सकेगा। महापौर डॉ. अजय कुमार ने कहा कि वाद्य यंत्र हमारी संस्कृति, विरासत और धर्म का हिस्सा हैं। संगीत और नृत्य मंदिरों से निकले,बाद में दरबारों की रौनक बने। उन्होंने बाल कलाकारों से परिचय लिया और उनकी कला की सराहना की। कार्यक्रम संयोजक मनोज प्रजापति ने अतिथियों का अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत किया। इस दौरान बड़ी संख्या में पार्षद,पूर्व पार्षद और गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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